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योगेश कुमार गोयल का लेख : अब ग्राहक बनेगा ताकतवर

नए कानून के लागू होते ही ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए कई ऐसे नए नियम भी लागू हो गए हैं। इस कानून को क्रांतिकारी बताते हुए केन्द्रीय उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान का कहना है कि पहले का उपभोक्ता कानून उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने की दृष्टि से समय खपाऊ था। नए कानून के तहत उपभोक्ताओं को ठगी और धोखाधड़ी से बचाने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं।

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लंबे इंतजार के बाद देश में उपभोक्ता अधिकारों को मजबूती प्रदान करने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा उपभोक्ता संरक्षण कानून-2019 लागू कर दिया गया। ग्राहकों के साथ आए दिन होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए बने इस कानून ने अब 34 वर्ष पुराने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 का स्थान ले लिया है। इस कानून के तहत उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए उपभोक्ता अदालतों के साथ-साथ सलाहकार निकाय के रूप में केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की स्थापना की व्यवस्था की गई है, जो उपभोक्ता अधिकारों, अनुचित व्यापार प्रथाओं और भ्रामक विज्ञापनों से संबंधित मामलों में पूछताछ और जांच करेगा। परिषद का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा और इसके अध्यक्ष केन्द्रीय उपभोक्ता मंत्री तथा उपाध्यक्ष केन्द्रीय उपभोक्ता राज्यमंत्री होंगे जबकि विभिन्न क्षेत्रों के 34 अन्य व्यक्ति इसके सदस्य होंगे।

नए कानून के लागू होते ही ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए कई ऐसे नए नियम भी लागू हो गए हैं। इस कानून को क्रांतिकारी बताते हुए केन्द्रीय उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान का कहना है कि पहले का उपभोक्ता कानून उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने की दृष्टि से समय खपाऊ था। नए कानून के तहत उपभोक्ताओं को ठगी और धोखाधड़ी से बचाने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। नए कानून में प्रयास किया गया है कि दावों का यथाशीघ्र निपटारा हो। उपभोक्ता आयोगों में स्थगन प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ राज्य और जिला आयोगों को अपने आदेशों की समीक्षा करने का अधिकार भी दिया गया है।

देश में पारंपरिक विक्रेताओं के अलावा तेजी से बढ़ते ऑनलाइन कारोबार को भी पहली बार उपभोक्ता कानून के दायरे में लाया गया है। ऑनलाइन उपभोक्ता हितों की अनदेखी भी कंपनियों पर भारी पड़ सकती है। अब ई-कॉमर्स कंपनियां खराब सामान बेचकर उपभोक्ताओं की शिकायतों को दरकिनार नहीं कर सकेंगी। किसी भी उपभोक्ता की शिकायत मिलने पर अब ई-कॉमर्स कम्पनी को 48 घंटे के भीतर उस शिकायत को स्वीकार करना होगा और एक महीने के भीतर उसका निवारण भी करना होगा। अगर कोई ई-कॉमर्स कंपनी ऐसा नहीं करती तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ई-कॉमर्स कंपनियों को सामान के मूल उद्गम देश का विवरण भी देना होगा। उपभोक्ता अधिकारों को नई ऊंचाई देने वाले नए कानून के तहत उपभोक्ता अब देश की किसी भी उपभोक्ता अदालत में मामला दर्ज करा सकेंगे। वे किसी भी स्थान और किसी भी माध्यम के जरिये शिकायत कर सकते हैं। नया कानून उपभोक्ताओं को इलेक्ट्रॉनिक रूप से शिकायतें दर्ज कराने और उपभोक्ता आयोगों में शिकायतें दर्ज करने में भी सक्षम बनाता है।

खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट करने वाली कंपनियों और भ्रामक विज्ञापनों पर निर्माता तथा सेलिब्रिटी पर जुर्माने तथा सख्त सजा जैसे प्रावधान भी हैं। कंपनी अपने जिस उत्पाद का प्रचार कर रही है, वह वास्तव में उसी गुणवत्ता वाला है या नहीं, इसकी जवाबदेही अब सेलिब्रिटी की भी होगी। क्योंकि अगर विज्ञापन में किए गए दावे झूठे पाए गए तो उस पर भी कार्रवाई होगी। शरीर को आकर्षक बनाने वाले झूठे विज्ञापन दिखाने पर एक लाख रुपये तक जुर्माना और छह माह तक की कैद हो सकती है। इसके अलावा ऐसे उत्पादों से कोई नुकसान होने या मौत हो जाने पर बड़ा जुर्माना और लंबी सजा हो सकती है। भ्रमित करने वाले विज्ञापनों पर अब सीसीपीए को अधिकार दिया गया है कि वह जिम्मेदार व्यक्तियों को 2-5 वर्ष की सजा के साथ कंपनी पर दस लाख रुपये तक का जुर्माना लगा सके। यही नहीं, बड़े और ज्यादा गंभीर मामलों में जुर्माने की राशि 50 लाख रुपये तक भी संभव है। सीसीपीए के पास उपभोक्ता अधिकारों की जांच करने के अलावा वस्तु और सेवाओं को वापस लेने का अधिकार भी होगा।

संसद द्वारा पिछले साल ही उपभोक्ता संरक्षण विधेयक 2019 को मंजूरी दे दी गई थी और यह नया कानून पहले इसी वर्ष जनवरी में और फिर बाद में मार्च में लागू किया जाना तय किया गया किन्तु कोरोना प्रकोप और लॉकडाउन के कारण लागू नहीं किया जा सका। अब इसके लागू हो जाने के बाद उपभोक्ताओं की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई शुरू हो जाएगी। नए कानून के तहत अब कैरी-बैग के पैसे वसूलना कानूनन गलत होगा और सिनेमा हॉल में खाने-पीने की वस्तुओं पर ज्यादा पैसे लेने की शिकायत पर भी कार्रवाई होगी। पुराने कानून में पीआईएल या जनहित याचिका दायर करने का प्रावधान नहीं था, लेकिन नए कानून के तहत अब ये याचिकाएं दायर की जा सकेंगी। नए कानून के तहत कन्ज्यूमर फोरम में एक कराड़ रुपये तक के मामले जबकि राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में एक करोड़ से 10 करोड़ तक के और राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में 10 करोड़ रुपये से ऊपर के मामलों की सुनवाई हो सकेगी। उम्मीद की जानी चाहिए कि नया उपभोक्ता कानून देश के उपभोक्ताओं को और ज्यादा ताकतवर बनाएगा तथा इसके तहत उपभोक्ता विवादों को समय पर और प्रभावी एवं त्वरित गति से सुलझाने में मदद मिलेगी।

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