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चिंतन: हास्य-व्यंग्य के नाम पर ''अपमान'' स्वीकार्य नहीं

हाल के वर्षों में कई कॉमेडियन सीमा पार करते दिखे हैं, लेकिन स्वस्थ कला में इसका स्थान नहीं है।

चिंतन: हास्य-व्यंग्य के नाम पर
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अपने फायदे के लिए किसी का मजाक उड़ाना किसी भी सभ्य समाज में मान्य नहीं हो सकता है, कॉमेडी के नाम पर किसी का 'अपमान' करना भी स्वीकार्य नहीं हो सकता है और कला भी किसी की संवेदना पर 'कुठाराघात' करने की इजाजत ही नहीं देती है। फिर यूट्यूब का कॉमेडी चैनल एआईबी के सदस्य तन्मय भट्ट खुद को 'क्या' कहेंगे.. आमजन, कॉमेडियन या कलाकार? क्योंकि एआईबी के दो मिनट के स्नैपचैट वीडियो में तन्मय भट्ट ने जिस तरह दो भारत रत्नों-लता मंगेशकर और सचिन तेंदुलकर का भोंडा मजाक उड़ाया है, वैसा न ही एक आमजन कर सकता है, न ही कोई कॉमेडियन कर सकता है और न एक कलाकार कर सकता है।

कॉमेडी किसी को हंसाने की एक स्वस्थ विधा है, इसमें हास्य के लिए व्यंग्य और 'अपमान' के बीच एक बारीक रेखा रखनी होती है। कॉमेडी करते वक्त इस बात का पूरा ध्यान रखा जाता है कि भूल से भी किसी का अपमान नहीं हो जाए या किसी की भावना को ठेस नहीं पहुंचे। लेकिन इस वीडियो से लगता है कि तन्मय भट्ट ने इस बारीक रेखा का ध्यान नहीं रखा है। 'सचिन वर्सेज लता सिविल वार' शीर्षक वाले वीडियो में तन्मय का लता मंगेशकर के लिए कहना कि 'अमेरिकी टीवी सीरीज 'गेम ऑफ थ्रोन्स' का एक किरदार 'जॉन स्नो' भी मर गया, अब आपको भी मर जाना चाहिए', बेहद अशोभनीय है, निंदनीय है, असंवेदनशील है।

भारतीय ही नहीं, करीब करीब दुनिया की आधी आबादी लता दीदी का सम्मान करती है और उनकी लंबी उम्र के लिए दुआ करती है। वे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित हैं। वैसे ही सचिन को क्रिकेट के भगवान का दर्जा प्राप्त है। वे भी 'भारत रत्न' हैं। दोनों ही शख्सियतों की अपनी गरिमा और सम्मान है। ऐसे में उनका मजाक उड़ाना कॉमेडी कैसे हो सकता है। इस तरह की कॉमेडी से मनोरंजन हो ही नहीं सकता है। कोई भी भारतीय इस तरह का वीडियो देखना पसंद नहीं करेगा। हम सभी जानते हैं कि भारतीय समाज में हास्य-व्यंग्य की स्वस्थ परंपरा रही है।

हंसी-ठिठोली हमारी संस्कृति की हिस्सा रही है। हमारे रिश्तों में भी मजाक को स्थान प्राप्त है। लेकिन ये सब स्वस्थ और र्मयादित होते हैं। इसमें 'अपमान' की जगह नहीं है। इधर कुछ वर्षों में फिल्मों और टीवी शोज में कॉमेडी का स्तर गिरा है। वह फूहड़ और अश्लील होती गई है। व्यंग्य ने कई बार अपमान की रेखा पार की है। कुछ दिन पहले कपिल शर्मा शो की टीम के कॉमेडियन कीकू शारदा को डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम की मिमिक्री करने के लिए हवालात की हवा खानी पड़ी है। कॉमेडियन कृष्णा के शो में सिद्धार्थ यादव को अपनी अभद्र टिप्पणी के लिए अभिनेता अक्षय कुमार के गुस्से का सामना करना पड़ा है।

हाल के वर्षों में कई कॉमेडियन सीमा पार करते दिखे हैं, लेकिन स्वस्थ कला में इसका स्थान नहीं है। बहरहाल तन्मय भट्ट के खिलाफ केस दर्ज हो गया है और देश भर में उनका काफी विरोध हो रहा है। ऐसे में उन्हें अपने शो के कॉन्सेप्ट पर फिर से विचार करना चाहिए। वैसे भी यूट्यूब का एआईबी चैनल शुरू से ही गाली-गलौज के लिए विवाद में रहा है। करण जाैहर, अर्जून कपूर जैसे अभिनेता कथित गाली देते देखे गए हैं। ऐसे में उन्हें अपने शो के कॉन्सेप्ट पर फिर से ध्यान देना चाहिए। यूट्यूब को भी सख्त गाइडलाइन बनानी चाहिए कि किसी भी देश में कोई भी उसके प्लटफार्म का गलत इस्तेमाल नहीं कर सके। भारत सरकार को भी सोशल मीडिया की मॉनीटरिंग के लिए गाइडलाइन सख्त करनी चाहिए।

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