Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

निर्मल गुप्त का व्यंग्य : एक मौलिक शोक संदेश

उन्होंने वहां घूम घूम कर बरबादी को नजदीक से देखा। प्राकृतिक आपदा के खिलाफ उन्हें कुछ लिखना था।

निर्मल गुप्त का व्यंग्य : एक मौलिक शोक संदेश
X
वह शोकाकुल थे। भूकंप से हुई जान और माल की हानि का जायजा लेने के लिए वहां पहुंचे थे। उन्होंने वहां घूम घूम कर बरबादी को नजदीक से देखा। प्राकृतिक आपदा के खिलाफ उन्हें कुछ लिखना था। शोक पुस्तिका में लिखने के लिए उन्होंने अपनी अक्ल पर जोर दिया। बात बनती हुई दिखाई नहीं दी तो उन्होंने और जोर लगाया। खूब जोर लगाने से अकसर बड़े-बड़े काम निबट जाते हैं। पर इस जोर लगाने का असर यह हुआ कि शोक संदेश वाली इबारत तो नदारद रही अलबत्ता कहीं दूर से भैंस के रम्भाने की आवाज आती जरूर सुनाई पड़ी।
वह तुरंत समझ गए कि भैंस अपने को अक्ल के मामले में अधिक स्ट्रीट स्मार्ट समझ रही है। वह समझ में नहीं पा रहे थे कि शोक की इस घड़ी में क्या लिखें। उन्होंने अपने मोबाइल में क्लू मिलने की आस में झांका तो उन्हें स्क्रीन पर योयो हनी सिंह मटक मटक बड़ी द्रुत गति से गा रहे थे। वह गा रहे थे, यह तो ठीक, पर क्या गा रहे थे यह समझ नहीं आया। ओय, हनी सिंह ठीक से गा। तेरी बात समझ में आए तो कुछ लिखूं। उन्होंने कहा। पर बात बनी नहीं। योयो यूं ही गाता रहा। उनकी समझ में आया कि ये योयो इसीलिए पॉपुलर है क्योंकि इसकी बात किसी को समझ में नहीं आती।
उन्होंने तुरंत यह बात गांठ बांधी कि जो करो ऐसा करो जो सबकी समझ से परे हो। उन्होंने तय किया कि वह अपनी देशव्यापी ख्याति के लिए जरा हट कर सोचेंगे और काम करेंगे। वह शोक पुस्तिका के पास से हटने लगे तो उनको किसी ने याद दिलाया सर इस कितबवा में कुछ लिखिए न। यह सुनते ही वह विचार निमग्न हो गए। सबसे पहले उन्होंने शोक के बारे सोचा तो उन्हें बस इतना याद आया कि इसका मतलब सॉरो होता है। यह भी पता लगा कि ऐसे मौके पर हाथ बांध कर और मुंह लटका कर खड़ा रहना पड़ता है। पर लिखना क्या होता है, इसकी कोई भनक उन्हें नहीं लगी। वह झक्क मार कर फिर अपने मोबाइल की शरण में गए। वहां उन्हें गूगल सर्च के जरिए विभिन्न विषयों पर लिखे निबंध मिले। उन्होंने उन निबंधों में से मनचाहे वाक्य लिए उन्हें अपने सम्यक ज्ञान से मोडिफाई किया ताकि शोक संदेश की मौलिकता बनी रहे।

और कोई उसे पढ़ने के बाद यह न कह पाए कि इसे अमुक टेक्स्ट से टीपा गया है। उन्होंने अपनी आंख मोबाइल के स्क्रीन पर गड़ा दी और अपनी समस्त मेधा उपयुक्त वाक्यों के संशोधन, संवर्धन और परिमार्जन में लगा दी। वह मग्न होकर वाक्य दर वाक्य मोबाइल में से चुन चुन कर लिखते रहे और अपने लिखे पर रीझते रहे। उन्होंने कुछ इस तरह लिखा। नेपाल एक महान देश है। यहां की जनता महान है और सरकार महान है। पहले यहां एक राजा था, वह भी महान था। जब उसकी महानता में कुछ कमी आई तो जनता ने उसे हटा दिया। नेपाल में अनेक पर्व मनाए जाते हैं।
हर उत्सव पूरे उत्साह से मनाया जाता है। यहां कभी कभी अर्थक्वेक टाइप की की बातें होती रहती हैं। यहां के बहादुर इसका मुकाबला बड़ी बहादुरी से करते हैं। इस बार अर्थ क्वेक दिन में आया इसलिए अधिक बरबादी हुई। रात में आता तो ये बहादुर जागते-जागते रहो कह कर सबको जगा देते और अर्थक्वेक किसी का कुछ न बिगाड़ पाता। ईश्वर से प्रार्थना है कि नेपाल को अर्थक्वेक से बचाए और यदि कभी आए तो सिर्फ रात में आए। यह शोकसंदेश पढ़ने के बाद यह तो मानना होगा कि उन्होंने जो लिखा सौ फीसदी मौलिक लिखा।
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और
पिंटरेस्‍ट पर-

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top