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काॅमनवेल्थ गेम्स 2018: भारत का शानदार प्रदर्शन, 26 स्वर्ण, 20 रजत और 20 कांस्य के साथ कुल 66 पदक जीते

आस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में हुए 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में भारत ने शानदार प्रदर्शन के साथ अपना सफर खत्म किया। भारतीय खिलाड़ियों ने 26 स्वर्ण, 20 रजत और 20 कांस्य के साथ कुल 66 पदक जीते।

काॅमनवेल्थ गेम्स 2018: भारत का शानदार प्रदर्शन, 26 स्वर्ण, 20 रजत और 20 कांस्य के साथ कुल 66 पदक जीते

आस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में हुए 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने शानदार प्रदर्शन के साथ अपना सफर खत्म किया। भारतीय खिलाड़ियों ने 26 स्वर्ण, 20 रजत और 20 कांस्य के साथ कुल 66 पदक जीते। इस तरह भारत पदक तालिका में आस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बाद तीसरे स्थान पर रहा। साल 2014 में स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में हुए 20वें कॉमनवेल्थ गेस्म में भारत ने 15 स्वर्ण, 30 रजत और 19 कांस्य के साथ कुल 64 पदक जीते थे और पदक तालिका में पांचवें स्थान पर रहा था।

खिलाड़ियों के इस लाजवाब प्रदर्शन कारण पूरे देश में उल्लास का माहौल है। समापन पर इस इस खुशी में बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल ने स्वर्ण पदक जीतकर चार चांद लगा दिए। उन्होंने यह पदक अपने ही देश की पीवी सिंधू को हराकर जीता। पीवी सिंधू को सिल्वर मेडल मिला। साइना का स्वर्ण देश के लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि वो चोट के कारण कई प्रतियोगिताओं से हिस्सा नहीं ले पाई थी। सभी खिलाड़ी और उनके पदक पूरे देश के हैं।

अगर राज्य स्तर पर इनका आंकलन किया जाए तो भारत की पदक तालिका के नंबर तीन पर आने में सर्वाधिक योगदान हरियाणा के खिलाड़ियों का रहा। इस बार भारत ने गोल्ड कोस्ट में अब तक सबसे बड़ा 218 खिलाड़ियों का दल भेजा था। जिनमें से 37 खिलाड़ी हरियाणा के थे और इन्होंने नौ गोल्ड, छह रजत और सात कांस्य समेत 22 पदक जीते। साइना नेहवाल ने भी खेल की शुरुआत हरियाणा से ही की थी।

उनके पिता हिसार स्थित चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में वैज्ञानिक के पद पर रहे हैं। अगर साइना के स्वर्ण को भी जोड़ा जाए तो हरियाणा के स्वर्ण पदकों की संख्या दस हो जाती है। देश अगर पदक तालिका में लंबी छलांग लगा पाया तो इसमें सबसे ज्यादा योगदान हरियाणा के खिलाड़ियों का रहा है। अगर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो ये देश के युवाओं को प्रेरणा भी देते हैं।

इंफाल के एक छोटे से गांव में आग जलाने के लिए लकड़ी चुनने वाली मीराबाई चानू ने वेटलिफ्टिंग में देश को स्वर्णिम सफलता दिलाई। बनारस के छोटे से गांव से आने वाली पूनम यादव ने भूखे रहकर ट्रेनिंग की और देश के लिए वेटलिफ्टिंग में सोना जीतकर लाई। किसान परिवार में जन्म पूनम के घर के आर्थिक हालात ये हैं कि लाड़ली को खेलने के लिए विदेश भेजने को पिता ने अपनी दो भैंसें बेच दीं।

मणिपुर के एक गरीब परिवार में पैदा हुईं मैरीकॉम तीन बच्चों की परवरिश के बाद बॉक्सिंग रिंग में उतरी और विरोधियों को चित कर दिया। हरियाणा के झज्जर जिले की मनु भाकर ने 16 और करनाल के अनीश ने महज 15 वर्ष की उम्र में ही सोने पर निशाना लगा दिया। अनीश भनवाला ने तो कॉमनवेल्थ के लिए दसवीं की परीक्षा तक छोड़ दी।

खिलाड़ियों के देश के लिए खेलने के इसी जज्बे को देखकर ही प्रधानमंत्री ने भी ट्वीट किया कि कामनवेल्थ में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाला हर एथलीट हमें प्रेरणा देता है। उनकी जीवन कथाएं समर्पण और शक्ति के दृष्टिकोण को स्पष्ट करती हैं। उन्होंने सफलता की ऊंचाई हासिल करने के लिए अनगिनत बाधाओं को दूर किया।

यह सही भी हैं खिलाड़ियों ने अपने संघर्ष, मेहनत और लगन से पूरे देश को गौरवान्वित किया है। अगर इन्हें प्रारंभ से ही सुविधाएं मिल जाएं तो वे और भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। 2020 में टोक्यो ओलंपिक होना है। अगर अभी से ही खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, खानपान और जरूरत पर ध्यान दे तो वे देश का नाम रोशन कर सकते हैं।

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