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प्रभात कुमार रॉय का लेख : रक्षा बजट में वृद्धि की जरूरत

अनेक रक्षा विशेषज्ञों का विचार रहा है कि अगले पांच वर्ष के लिए भारतीय सेना के अत्याधुनिकरण योजना को बाकायदा लागू करना होगा। भारतीय सेना को अत्याधुनिक अस्त्र शस्त्रों तथा अन्य साजो-सामान के लिए केंद्रीय हुकूमत से रक्षा बजट में समुचित वृद्धि करने की दरियाफ्त लगातार करती रही है। खासकर आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत राष्ट्रीय स्तर पर डिफेंस रिसर्च, समुचित विकास और सुरक्षा हथियारों की पर्याप्त खरीद को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। आगामी दो वर्षों में भारतीय सेना के लिए बड़े पैमाने पर आधुनिक हथियार और दूसरे साजो-सामान खरीदने होंगे।

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म्यांमार सेना (प्रतीकात्मक फोटो)

प्रभात कुमार रॉय

विश्व पटल पर भारत एक ऐसा राष्ट्र है, जो चीन और पाकिस्तान सरीखे दो आक्रामक पड़ोसी राष्ट्रों के मध्य फंसा हुआ है और ये तीनों ही पड़ोसी मुल्क वस्तुतः विनाशकारी परमाणु शक्तियों से पूर्णतः लैस भी हैं। पाकिस्तान और चीन के विरुद्ध भारत अनेक युद्ध लड़ चुका है और वर्तमान दौर में भी इन दोनों देशों के विरुद्ध भारत की सैन्य तनातनी निरंतर बनी हुई है। सुरक्षा चुनौतियों का कामयाबी के साथ कड़ा मुकाबला करने के लिए भारत को सदैव एक अत्यंत शक्तिशाली सेना की दरकार रही है।

केंद्रीय हुकूमत द्वारा विगत वित्तीय वर्ष 2020-21 के रक्षा बजट में 4 लाख 71 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। इस रक्षा बजट आंकड़े के मुताबिक कुल बजट का करीब केवल दो फीसदी रक्षा बजट के खाते में गया था। वर्ष 1962 के पश्चात विगत रक्षा बजट में सबसे कम वृद्धि करार दिया गया था। विगत जून से भारत-चीन सरहद पर जबरदस्त सैन्य तनाव बरकरार है, अतः आगामी वित्तीय वर्ष के लिए भी रक्षा बजट में जबर्दस्त वृद्धि की जा सकती है। अनेक रक्षा विशेषज्ञों का विचार रहा है कि अगले पांच वर्ष के लिए भारतीय सेना के अत्याधुनिकरण योजना को बाकायदा लागू करना होगा। भारतीय सेना को अत्याधुनिक अस्त्र शस्त्रों तथा अन्य साजो-सामान के लिए केंद्रीय हुकूमत से रक्षा बजट में समुचित वृद्धि करने की दरियाफ्त लगातार करती रही है। खासकर आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत राष्ट्रीय स्तर पर डिफेंस रिसर्च, समुचित विकास और सुरक्षा हथियारों की पर्याप्त खरीद को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। आगामी दो वर्षों में भारतीय सेना के लिए बड़े पैमाने पर आधुनिक हथियार और दूसरे साजो-सामान खरीदने होंगे। अतः रक्षा मंत्रालय ने इस साल वित्त मंत्रालय के समक्ष अतिरिक्त फंड प्रदान करने की मांग पेश कर दी है, ताकि भारतीय सशस्त्र बलों के लिए अनेक आधुनिकीकरण की योजनाओं को तत्काल लागू किया जा सके। रक्षा उत्पादन क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने की जोरदार कोशिशें अंजाम दी जानी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि भारत वस्तुतः अरब देशों के बाद सबसे अधिक सैन्य अस्त्र शस्त्रों को आयात करने वाला राष्ट्र रहा है। हाल ही में जब हिंदुस्तान एरोनाॅटिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित 83 तेजस लड़ाकू विमानों को भारतीय वायु सेना के लिए खरीदने की खबर आई तो देश में खुशी लहर दौड़ गई कि अब रक्षा उत्पादन क्षेत्र में भारत में एक नए युग का आगाज़ हो गया है। भारत रूस, फ्रांस, इजराइल और अमेरिका से लड़ाकू सैन्य विमान खरीदता रहा है। रूस के साथ ही साथ भारत द्वारा अमेरिका के साथ भी रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत की जा चुकी है। सौभाग्य से विश्व की दो प्रबल शक्तियों का सैन्य और रणनीतिक सहयोग भारत को हासिल हो रहा है। भारत के साथ रशिया की सैन्य और रणनीतिक दोस्ती ऐतिहासिक कसौटी पर सदैव खरी उतरी है. रशिया और चीन की दोस्ती का विपरीत प्रभाव भारत और रूस की दोस्ती पर कदापि नहीं पड़ेगा।

अनेक रक्षा विशेषज्ञों का विचार है कि 2021-22 के वित्तीय वर्ष में रक्षा बजट में बहुत अधिक वृद्धि की गुंजाइश नहीं है, क्योंकि कोविड महामारी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से ध्वस्त करके रख दिया है। रक्षा क्षेत्र में हुकूमत की प्राथमिकता केवल उसके बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश करने तक सीमित बनी रहेंगी। सैन्य पूंजीगत बजट में 15,000 करोड़ रुपये की वृद्धि भी उल्लेखनीय साबित होगी। स्पष्ट संकेत प्राप्त हो रहे हैं कि रक्षा क्षेत्र में होने वाले खर्चों के लिए न सिर्फ एक साल के लिए वित्तीय बजट की व्यवस्था होगी, बल्कि रक्षा बजट में आगामी पांच वर्षों के खर्चों के हिसाब से भी वित्तीय व्यवस्था प्रारम्भ की जा सकती है। रक्षा सूत्रों के अनुसार सरहद पर जारी तनाव को दृष्टिगत रखते हुए रक्षा बजट में अभी तक की सबसे बड़ी वृद्धि अंजाम दी जा सकती है। इस बार रक्षा बजट छह लाख करोड़ तक जा पहुंच सकने का अनुमान है। भारत की तुलना में चीन का रक्षा बजट तकरीबन पांच गुना बना रहा है। विगत वित्तीय वर्ष में भारत के करीब 45 अरब डॉलर के रक्षा बजट की तुलना में चीन का रक्षा बजट 167 अरब डॉलर रहा है।

आज का दौर वस्तुतः केवल पारंपरिक तौर तरीकों से युद्ध संचालित करने का दौर नहीं रहा है। साइबर तकनीक के विस्मयकारी विकास ने साइबर युद्ध प्रणाली को बहुत महत्वपूर्ण बना दिया है। रणनीतिक युद्ध में अत्याधुनिक अस्त्र शस्त्रों के साथ ही भारत को डिफेंस साइबर सैन्य दस्तों को भी सनद करना होगा। चीन का सैन्य मुकाबला केवल अत्याधुनिक हथियारों से लैस परम सैन्य वीरता के साथ कदापि नहीं किया जा सकेगा। इसके लिए साइबर डिफेंस क्षेत्र में भारतीय सेना को पूर्णतः दक्ष करना होगा। साइबर युद्ध प्रणाली की दक्षता में चीन का स्थान अमेरिका के मुकाबले में कहीं बेहतर हो गया है। भारत में साइबर डिफेंस के क्षेत्र में अभी तक कुछ कम ही काम किया गया है। अतः साइबर डिफेंस के इस उपेक्षित रहे रक्षा क्षेत्र में भी भारत को अत्यंत शक्तिशाली बनना होगा। भारतीय सेना में विशेष साइबर ऑपरेशन डिविजनें खड़ी करने का काम तेजी से करना होगा।

प्रसिद्ध सैन्य विशेषज्ञ जेफ़री ब्लैनी ने कहा है कि प्रत्येक सैन्य तनाव में प्रायः शक्ति संतुलन सबसे प्रमुख किरदार अदा करता है। युद्ध के लिए समुचित तौर पर तैयार और तत्पर रहकर ही युद्ध को जीता जा सकता है अथवा टाला जा सकता है। कोल्ड वार के विकट ऐतिहासिक दौर में सोवियत संघ और अमेरिका के मध्य सैन्य शक्ति संतुलन स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ था। भारत को भी पाकिस्तान और चीन की संयुक्त सैन्य चुनौती का कामयाब मुकाबला करने के लिए सभी प्रकार के युद्धों के लिए तत्पर और तैयार रहना ही होगा। साइबर युद्ध से लेकर परमाणु युद्ध तक की समुचित तैयारियों में जुट जाना होगा। राष्ट्रीय सुरक्षा के शानदार वातावरण में ही आर्थिक सुरक्षा और विकास संभव हो सकता है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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