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योगेश कुमार सोनी का लेख : चीन से सतर्क रहने की जरूरत

सभी देशों में हर छोटे-बड़े क्षेत्र में अपना वर्चस्व बनाने के लिए चीन बड़ी रणनीति के तहत अपने पैर पसार रहा है। अब चीन की निगाह उन देशों व क्षेत्रों पर है जो कोरोना के चलते आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। हाल ही में ब्रिटेन को चीन ने अपना निशाना बनाया है। चीनी कंपनियों ने ब्रिटेन के करीब डेढ़ दर्जन स्कूलों को खरीदा है। दुनिया के सभी देशों को यह समझना होगा कि अपने स्तर पर भी स्थिति को सुधारने का प्रयास करें चूंकि यदि देश की विरासत को बेच देंगे तो उस देश का भविष्य अच्छा नहीं होगा। चीन की चाल से पूरी दुनिया को सतर्क रहने की जरूरत हैं, चूंकि किसी भी देश का अस्तित्व उसका भविष्य होता है और वह स्कूल में तैयार होता है।

योगेश कुमार सोनी का लेख : चीन से सतर्क रहने की जरूरत
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भारत- चीन बॉर्डर

योगेश कुमार सोनी

दुनिया की सबसे महान शक्ति बनने के लिए चीन कोई मौका नहीं छोड़ रहा। सभी देशों में हर छोटे-बड़े क्षेत्र में अपना वर्चस्व बनाने के लिए चीन बहुत बड़ी रणनीति के तहत किसी भी कीमत पर अपने पैर पसार रहा है। अब चीन की निगाह उन देशों व क्षेत्रों पर है जो कोरोना के चलते आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। हाल ही में ब्रिटेन को चीन ने अपना निशाना बनाया है। चीनी कंपनियों ने ब्रिटेन के करीब डेढ़ दर्जन स्कूलों को खरीदा है और आगे भी यह प्रक्रिया जारी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन में पिछले एक साल से स्कूल बंद हैं जिस कारण से स्कूल प्रबंधकों को जबर्दस्त घाटा हो रहा है। इस वजह से परेशान होकर कई स्कूल प्रबंधक स्कूलों को बेच रहे हैं। इनमें से नौ स्कूलों के मालिक चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सक्रिय सदस्य हैं। ब्रिटेन सरकार के लिए सबसे दुख की बात यह है कि ब्रिटेन के सबसे बड़े व पुराने स्कूल 'प्रिंसेस डायना प्रीप्रेटोरी स्कूल' को भी चीन ने खरीद लिया।

कोरोना संकट से अभी तक पूरी दुनिया परेशान है, लेकिन यहां दुनिया के सभी देशों को यह समझना होगा कि अपने स्तर पर भी स्थिति को सुधारने का प्रयास करें चूंकि यदि परेशान होकर अपने देश की विरासत या धरोहरों को बेच देंगे तो उस देश का भविष्य निश्चित तौर पर अच्छा नहीं होगा। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण तब माना जाता है जब शिक्षा के क्षेत्र में कोई डाका डाले। इसके अलावा दुनिया को यह भी समझना होगा कि चीन जैसे देश की मंशा बिल्कुल सही नहीं है, चूंकि वह महान शक्ति बनने के लिए किसी हद तक जा सकता है और जा भी रहा है। चीनी कंपनी के एक डायरेक्टर ने स्पष्ट कहा है कि हमारा उद्देश्य है कि 'हम चीन समर्थक विचारधारा को आगे बढ़ाना चाहते हैं और स्कूलों में इस तरह की शिक्षा देंगे जिससे ब्रिटेन के बच्चे बचपन से ही चीन समर्थक बनने शुरू हो जाएंगे।' इस वाक्य से स्पष्ट हो जाता है कि चीन कितनी गंदी व घटिया सोच के साथ दुनिया को अपने कब्जे में करना चाहता है। यदि चीन अपने विस्तार व प्रभाव को बढ़ाने के लिए यहां तक सोच बैठा है तो यह दुनिया के लिए अच्छे संकेत नही हैं। इस मामले में दुनियाभर से आलोचना झेल रहे ब्रिटेन के लिए विशेषज्ञों ने कहा है कि 'शिक्षा के मंदिर को बेचने का अर्थ यह होता है कि आपने अपने घर पर वार करवा लिया हो । संकट के समय पर देश को संचालित करने के लिए कर्ज लिया जा सकता है या अन्य किसी रणनीति तहत देशहित में कदम उठाया जा सकता है व इसके अलावा कुछ और चीजों की खरीद-फरोख्त की जा सकती है, लेकिन शिक्षा के मंदिरों को बेचना व गिरवी रखना बहुत घटिया हरकत है।'

दरअसल कुछ देशों में प्राइवेट संस्थानों का अपने देश की सरकार से इस तरह का करार होता है कि वह सरकार की बिना दखलंदाजी के वह अपनी संपत्ति किसी भी बाहरी व्यक्ति व देश को बेच सकते हैं। इस तरह का कानून ब्रिटेन में भी लागू है। ब्रिटेन के तमाम स्कूल संचालकों ने अपनी सरकार से कई बार मदद की गुहार लगाई, लेकिन कोई मदद न मिलते देख उन्होंने यह कदम उठाया वहीं दूसरी ओर इस मामले में ब्रिटेन में चीन के पैर पसरते देख बोरिस जॉनसन सरकार की चिंता भी बढ़ा दी है। जॉनसन ने कहा कि वह अपने देश के लोगों से अपील कर रहे हैं कि वह कुछ समय और निकालें, सरकार आर्थिक संकट को खत्म करने के लिए प्रयासरत हैं। ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमिनिक रॉब ने कहा है कि चीन की नियत कई पश्चिमी देशों पर है और वह इस तरह के कार्य करके घिनौनी हरकत कर रहा है। ब्रिटेन के अलावा भी कुछ और देशों पर वह अपना शिकंजा बनाना चाहता है, लेकिन अब समय आ चुका है सभी पश्चिमी देश मिलकर इसका विरोध करें।'

दुनिया जानती है कि कोरोना चीन से आया व जिससे पूरी मानवजाति पर संकट आया और परेशानी में मदद की बजाय लोगों की मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है। ज्ञात हो कि कोरोना की प्रारंभिकता में जब सबसे पहले चीन में कोरोना संकट आया था तब दुनिया के तमाम देशों ने चीन को दान के रूप में मास्क व सैनिटाइजर दिए थे लेकिन जब पूरी दुनिया में कोरोना आया और उन देशों ने चीन से मदद मांगी तो मास्क और सैनिटाइजर की कीमत वसूली, जिसकी वजह से चीन की पूरी दुनिया में थू-थू हुई। ऐसी तमाम घटनाओं की लंबी फेहरिस्त है, लेकिन वह अपने ढीठपन के व्यवहार से कभी बाज नहीं आ सकता। उसकी हर मंशा पर शंका पूरी दुनिया को है फिर भी उसको अपने घर में घुसने दे रहे हैं। इसकी हर नीति में चालाकी होती है, इसलिए चीन जैसे देश को अपने यहां किसी भी रूप में आमंत्रण देना घातक हो सकता है।

चीन ने एक ऐसा फार्मेट बनाया जो बहुत तेजी से पूरी दुनिया को अपने कब्जे में कर रहा है। दरअसल मामला यह है कि चीन किसी भी देश की छोटी-बड़ी कंपनियों को उसकी लिमिट से अधिक कर्जा दे देता है, जिसके बाद वह यदि देने में अक्षम हो जाता है और जब मामला संबंधित देश की कोर्ट में जाता है तो वह कानूनी रूप से आदेश दे देता है कि चीन उसकी प्रॉपर्टी को ले सकता है। अब तक चीन 67 देशों की 1722 संपत्तियों को इसी तर्ज पर कब्जा चुका है जिसकी कीमत 44 अरब के करीब आंकी जा रही है। कुछ देशों में डेवलमेंट प्रोसेस पर कोलेबोरेशन करके वहां अपनी संपत्ति तैयार कर रहा है। यदि एशियाई देशों के संदर्भ में बात करें तो चीन पाकिस्तान, श्रीलंका,नेपाल व भूटान के अलावा कुछ देशों को अपनी गिरफ्त में लेता जा रहा है। पाकिस्तान को तो वह इतना कर्जा दे चुका है कि अंदरुनी तौर पर पूर्ण रूप से वह अब चीन का हिस्सा बन चुका है। हमारे देश में भी वह तमाम क्षेत्रों में आगे बढ़ चुका था, लेकिन अब उस रथ थमने लगा है। दरअसल भारत जैसे देश में लोग इच्छाशक्ति दिखाते हुए देश के साथ खड़े रहते हैं। विगत दिनों सीमाओं पर चीन की हरकतों के बाद देशावासियों ने चीन के सामानों का विरोध किया जो बेहद कारगर साबित हुआ। इसके अलावा पिछले कई वर्षों से वह भारत की सीमा में घुसकर लगातार कब्जा कर रहा था, लेकिन इस बार मोदी सरकार ने विरोध किया तो वह बौखला गया था जिस पर यह सारा विवाद हुआ था। हमारे यहां भी उसने कई रूप में अपना वर्चस्व कायम करना चाहता था, लेकिन सरकार की नीति से वह कभी उबर नहीं पाया। बहरहाल, चीन की इस तरह की चाल से पूरी दुनिया को सतर्क रहने की जरूरत है, चूंकि किसी भी देश का अस्तित्व उसका भविष्य होता है और वह स्कूल में ही तैयार होता है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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