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डाॅ. ए.के. अरुण का लेख : ईमानदार एक्शन की जरूरत

कोरोना की यह लहर ज्यादा घातक है। बचाव के एहतियात के साथ-साथ सामुदायिक एवं सरकारी स्तर पर सभी सार्वजनिक आयोजनों पर तत्काल रोक लगे। सभी चिकित्सा संस्थानों को सरकारी दर पर इलाज के लिए अध्यादेश जारी कर दिए जाएं। दवा की कालाबाजारी को राष्ट्रविरोधी अपराध घोषित कर सरकारें यह सुनिश्चित करें कि ऐसा न होने पाए।

डाॅ. ए.के. अरुण का लेख : ईमानदार एक्शन की जरूरत
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डाॅ. ए.के. अरुण 

सबक सीखने के लिए एक वर्ष का समय कम नहीं होता। हम दिल से चाहते तो बीते 14 महीनों में कोरोना वायरस संक्रमण क्या अन्य महामारियों से बचाव का एक बेहतर माॅडल खड़ा कर देशवासियों की जान बचा सकते थे। यदि नीयत साफ होती और हम जन कल्याण की दृष्टि से कुछ बेहतर करने की तमन्ना रखते तो चीन, न्यूजीलैंड, डेनमार्क, सिंगापुर, रवांडा आदि देशों की तरह बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था खड़ी कर लेते और डूबती अर्थव्यवस्था भी संभाल सकते थे। बहरहाल अपने देश में कोरोना त्रासदी की अब तक की स्थिति का यदि मूल्यांकन करें तो आगे का रास्ता तलाशने में मदद मिलेगी।

कोरोना काल 2020 और हम देश के एक जिम्मेदार नागरिक के नाते हमें यह जानना चाहिए कि वर्ष 2020 में हमारी सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए क्या-क्या कदम उठाए थे। 29 मई 2020 को एक प्रसिद्ध अंग्रेजी दैनिक में छपी खबर के अनुसार मार्च से मई 2020 तक पीएम केयर फंड में कुल 10,600 करोड़ रुपये जमा हुए थे, जिसमें से सरकार ने 3100 करोड़ रुपये कोविड से बचाव के लिए जारी किए थे।

इसमें खासकर 2000 करोड़ रुपये भारत में बने 50,000 वेंटिलेटर के लिए, 2000 करोड़ रुपये प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए, 100 करोड़ रुपये वैक्सीन निर्माण के लिए। अब इन रुपयों से हासिल क्या हुआ, यह पूछना आज लाजिमी है, ताकि जिम्मेेदारी तय हो सके। हाँ इसी फंड से देश में नोएडा की एगवा (AGVA) नाम की एक गैर पेशेवर कंपनी को 10,000 वेंटिलेटर बनाने का ठेका दिया गया था जिसे हाई एंड वेंटिलेटर बनाने का कोई अनुभव नहीं था। बाद में इस कंपनी के बनाए वेंटिलेटर क्लिनिकल ट्रायल में फेल पाए गए। ऐसे ही गुजरात की कंपनी सीएनसी के भी वेंटिलेटर का वही हाल था। मजदूरों की वापसी का हाल पूरे देश ने देखा था। अपने जेब से पैसा लगाकर भूखे प्यासे पैदल हजारों किलोमीटर की यात्रा कर मजदूर जैसे तैसे घर पहुंचे थे। अपने देश में बनी वैक्सीन (आनन- फानन में बनी) का हाल देश देख ही रहा है। कुल मिलाकर आपदा में अवसर का पूरा लाभ राजनीति, सरकार और प्रशासन ने लिया, मगर जनता के हाथ कुछ खास हाथ लहीं लगी।

इसके अलावा अब मोदी सरकार ने कोरोना काल 2020 में 20 लाख करोड़ रुपये का कोरोना पैकेज भी घोषित किया था। ​कोरोना काल 2020 में महामारी की त्रासदी के दौरान तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का भारत दौरा, कई राज्यों में चुनाव एवं सत्ता परिवर्तन, देश में प्रशासन व पुलिस की मदद से सांप्रदायिक व जातिगत आधार पर हिंसा की घटनाएं आदि भारत में कोरोना विस्फोट के लिए जिम्मेदार हैं। विगत 16 महीने में सरकार की ऐसी कोई भी पहल नहीं दिखी जिससे एक नागरिक के तौर पर संकट में संकटमोचक के रूप में सरकार की तारीफ की जा सके। सरकार आत्म प्रशंसा में मग्न थी कि कब दबे पांव कोरोना की दूसरी लहर ने दस्तक दे दी, पता ही नहीं चला। इस दौरान कई प्रभावशाली नेताओं के जुमलों पर गौर करें- 'ताली-थाली बजाओ, गो-कोरोना गो का मंत्र पढ़ो, भाभी जी का पापड़ खाओ, महामृत्युंजय का जाप करो- कोरोना भगाओ, कुंभ में नहाने से कोरोना नहीं होता', और भी न जाने क्या क्या? जबकि ऐसे बयान नहीं आने चाहिए थे। अंततः कोरोना वायरस के संक्रमण का यह दूसरा शक्तिशाली हमला पूरे देश पर है।

यूं तो भारत ने दिलेरी दिखाते हुए 50 से अधिक देशों को कोराना वैक्सीन का निर्यात किया, लेकिन अचानक देश में केस बढ़ने व टीकाकरण में तेजी आने से खुद ही टीके की जरूरत आन पड़ी। कई राज्यों में टीके की कमी की खबर आ रही है। कोरोना काल में सरकार की प्राथमिकताएं सुनियोजित व स्पष्ट होनी चाहिए।

आगे का रास्ता

अब हमें इस बात की चर्चा करनी चाहिए कि कोरोना वायरस संक्रमण की बढ़ती विभीषिका के दौर में हम क्या करें कि मानवता व लोगों की जानों को बचा सकें। देश के नागरिक निम्नलिखित बिन्दुओं पर ध्यान दें:- 1. कोरोना संक्रमण का ताजा स्ट्रेन एक तीव्र फैलने वाला वायरस है, इसलिए संक्रमण से बचाव के एहतियाती उपाय में ढील न बरतें अर्थात मास्क, हाथ धोना, भीड़ में न जाना, नियमित विटामिन सी एवं जिंक का प्रयोग करना आदि। 2. खांसी या छींके आने पर मुंह को रुमाल या मास्क से ढकें। एक व्यक्ति दूसरे से 6 फीट की दूरी पर रहें। यदि छींक के समय टिश्यू पेपर का उपयोग किया है तो उसे सुरक्षित रूप से डिस्पोज करें। 3. मास्क से मुंह और नाक को पूरी तरह ढकें तथा बाहर जाने पर मेडिकल दस्तानों का प्रयोग करें। 4. अनजान लोगों से सावधानीपूर्वक मिलें। यदि बाहर से घर आने पर आपमें बुखार, छींके या खांसी के लक्षण हों तो स्वयं को आइसोलेट कर लें और उन्हें भी आइसोलेट होने को कहें जिनसे आप मिले हों। 5. कोरोना के

आरम्भिक लक्षणों में बुखार, छींके, खांसी, सिर दर्द, दस्त, मुंह का स्वाद चला जाना, नाक में गंध का पता न लगना आदि या इसमें से कुछ लक्षण हो सकते हैं। ऐसा होने पर स्वयं को आइसोलेट कर लें एवं चिकित्सक को इसकी सूचना दे दें। 6. कोरोना जैसे लक्षणों का अन्देशा होने पर घबराए नहीं और स्वयं को आइसोलेट कर नियमित हाथ धोएं, गुनगुने पानी में थोड़ा नमक डालकर गले में गरारे करें। ज्यादा से ज्यादा गर्म तरल पदार्थ लेते रहें एवं बाहर जाने से बचें।

अब यह भी करें

कोरोना की यह लहर ज्यादा घातक है। बचाव के एहतियात के साथ साथ सामुदायिक एवं सरकारी स्तर पर सभी सार्वजनिक आयोजनों पर तत्काल रोक लगे। सभी चिकित्सा संस्थानों को सरकारी दर पर इलाज के लिए अध्यादेश जारी कर दिए जाएं। दवा की कालाबाजारी को राष्ट्रविरोधी अपराध घोषित कर सरकारें यह सुनिश्चित करें कि ऐसा हरगिज न होने पाए। प्रत्येक जिले में एक केन्द्रीय श्रेणी भर्ती केन्द्र, पोर्टल एवं मोबाइल नम्बर जारी किए जाएं जहां कोई भी व्यक्ति महज एक फोन काल से आपात चिकित्सा सुविधा ले सके। सरकार की सभी लग्ज़री सुविधाएं खत्म कर दी जाएं और देश में उपलब्ध सभी चिकित्सकों को आपात चिकित्सा सेवा के तहत काम पर लगाया जाए। इससे आगे भी कोरोना की घातक लहर आ सकती है। सरकार को भी जनसेवा में सच्चे मन से और गंभीरता के साथ लगना होगा। लोग बचेंगे तो देश बचेगा।

(लेख: डा. ए.के. अरुण, होमियोपैथिक चिकित्सक)

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