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अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर भारत के मजबूत होते कदम

दुनिया में उनके बढ़ते कद का ही प्रमाण है कि जी-20 देशों की बैठक में पहली बार कालाधन और समृद्धि उद्यमियों द्वारा कर चोरी पर व्यापक चर्चा हुई।

अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर भारत के मजबूत होते कदम

नई दिल्‍ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दस दिवसीय यात्रा कई उपलब्धियों के साथ समाप्त हो गई। इस दौरान उन्होंने म्यांमार, आॅस्ट्रेलिया और फिजी का सफल दौरा किया, साथ ही भारत-आसियान, ईस्ट एशिया, जी-20 के शिखर बैठक में भाग लिया तो 12 प्रशांत महासागर के द्वीप देशों के प्रमुखों सहित करीब 40 राष्‍ट्राध्‍यक्षों से भी मिले। इस पूरी यात्रा में वे एक विश्व नेता के रूप में उभरते प्रतीत हुए हैं। क्योंकि जहां विश्व के सभी अग्रणी देशों के प्रधानमंत्री व राष्टÑपति उपस्थिति थे, वहां राष्‍ट्रीय -अंतरराष्‍ट्रीय मीडिया में नरेंद्र मोदी ही छाए रहे। दुनिया में उनके बढ़ते कद का ही प्रमाण है कि जी-20 देशों की बैठक में पहली बार कालाधन और समृद्धि उद्यमियों द्वारा कर चोरी पर व्यापक चर्चा हुई। देश में कालाधन व करचोरी एक बड़ा मुद्दा है। इन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाना और उस पर सभी प्रमुख देशों की सहमति प्राप्त करना, जिसके बाद दोनों मुद्दों को जी-20 के घोषणा पत्र में शामिल किया गया, बड़ी कामयाबी मानी जाएगी।

राजीव गांधी के बाद नरेंद्र मोदी के रूप में 28 साल बाद किसी प्रधानमंत्री ने आस्‍ट्रेलिया की धरती पर कदम रखा तो वहां कि जनता ने उनको हाथों-हाथ लिया। आॅस्ट्रेलिया के अलफॉन्स एरीना स्टेडियम में 20 हजार प्रवासी भारतीय लोगों को संबोधन इसका प्रमाण है।आस्‍ट्रेलिया के संसद को संबोधित करने वाले भी मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने हैं।आस्‍ट्रेलिया के साथ पांच अहम करार को अंजाम दिया गया है। जिसमें सामाजिक सुरक्षा, कैदियों की अदला-बदली, नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने, पर्यटन और कला व संस्कृति को आगे बढ़ाने से संबंधित समझौते शामिल हैं। हालांकि यूरेनियम आपूर्ति पर अभी बात नहीं बनी है, लेकिन दोनों नेताओं ने उम्मीद जताई है कि यह मसला जल्द ही सुलझ जाएगा। सितंबर में आॅस्टेÑलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबॉट भारत दौरे पर आए थे तब असैन्य परमाणु सहयोग समझौता पर हस्ताक्षर हुआ था।

वहीं दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाना भी अभी अहम मसला बना हुआ है। अभी दोनों के बीच 15 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है, यह चीन के साथ उसके व्यापार का दसवां हिस्सा ही है। आॅस्टेÑलिया के बाद प्रधानमंत्री मोदी फिजी गए। इंदिरा गांधी के बाद 33 साल बाद किसी प्रधानमंत्री ने वहां की यात्रा की है। फिजी सामरिक और रणनीतिक रूप से भारत के लिए काफी मायने रखता है। मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री बने हैं जिन्होंने फिजी के संसद को संबोधित किया है। दोनों देशों के बीच तीन अहम समझौते हुए हैं जिसमें वीजा आॅन एराइवल, छात्रों को दोगुनी छात्रवृत्ति की सुविधा, आर्थिक मदद सहित रक्षा, संस्कृति और आईटी सेक्टर में सहयोग प्रमुख हैं। फिजी की 37 फीसदी आबादी भारतीय मूल की है।

बीते कुछ दशकों से हमारी उदासीनता के कारण इस द्वीप देश से दूरी बढ़ गई थी। जिससे चीन आदि देश अपना प्रभाव कायम करने में सफल रहे। भारत की सुरक्षा के लिए फिजी से मधुर रिश्ते होने जरूरी हैं। नरेंद्र मोदी इसे बखूबी समझ रहे हैं। फिजी की जनता ने प्रधानमंत्री को जिस तरह से सम्मान दिया है, उससे उम्मीद की जा रही है कि दोनों देशों के बीच समय के साथ जो खाई बन गई थी वह जल्द ही भर जाएगी। कुल मिलाकर तीन देशों की यात्रा भारत के लिए नई संभावनाएं लेकर आई है। इस दौरान भारत को कई अहम सहयोगी मिले हैं, जिनकीदोस्ती आने वाले दिनों में कई मायने में फायदेमंद साबित हो सकती है।

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