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NCRB की रिपोर्ट जारी, कहा- सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाना जरूरी

2014 में देश भर में सड़क हादसों में 1.41 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई जो 2013 के मुकाबले तीन फीसदी ज्यादा थी।

NCRB की रिपोर्ट जारी, कहा- सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाना जरूरी
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नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया रिपोर्ट के मुताबिक साल 2014 में देश भर में सड़क हादसों में 1.41 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई जो 2013 के मुकाबले तीन फीसदी ज्यादा थी। इसका मतलब यह हुआ कि देश में हर घंटे लगभग 16 लोग सड़क हादसों में अपनी जान गवां देते हैं। वहीं अपंग होने वाले लोगों की संख्या करीब पांच लाख है। देश में सबसे ज्यादा लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में होना चिंता की बात है। एक कड़वा सच यह भी है कि आज दुनिया में सबसे अधिक हादसे भारत में होते हैं। यदि व्यक्ति अपनी औसत आयु तक जीवन जी कर प्राण त्यागता है तो दुख कम होता है, लेकिन जब व्यक्ति किसी दुर्घटना का शिकार होकर, काल का ग्रास बनता है तो इससे न केवल एक परिवार बल्कि कई-कई परिवार बर्बाद और तबाह हो जाते हैं।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि तकरीबन 80 फीसदी दुर्घटनाएं वाहन चालकों की गलती के कारण होती हैं। वहीं सड़क का दोष बामुश्किल 1.5 फीसदी होता है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट बताती है कि सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में 85 फीसदी 20 से 25 वर्ष की उम्र के युवा होते हैं। इनमें आधी मौतें शराब पी कर वाहन चलाने से होती हैं। भारत में जिस रफ्तार से दो व चार पहिया वाहनों के क्रय के साथ-साथ रफ्तार में इजाफा हो रही है यदि हादसों को रोकने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए तो ऐसा अनुमान है कि 2020 तक सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या दो गुनी से तीन गुनी तक बढ़ जाएगी।
योजना आयोग के 2014 के एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि भारत सरकार को हर साल 3.8 लाख करोड़ रुपये की हानि हो रही है। यह देश की जीडीपी का करीब तीन फीसदी है। वहीं तेज
गति से गाड़ी चलाना शानो-शौकत का महत्वपूर्ण अंग बन गया है। सड़कें जानलेवा साबित न हों इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों को तत्काल कई कदम उठाने की जरूरत है। भारत में ड्राइविंग को कभी शिक्षा की तरह लिया ही नहीं गया। आजादी के बाद से अब तक इसको आरटीओ के भरोसे छोड़ दिया गया। अभी तक देश में सड़क मंत्रालय ने राष्ट्रीय ड्राइविंग नीति बनाई ही नहीं, जिसमें तीन या छह माह का ड्राइविंग ट्रेनिंग प्रोग्राम हो। उस प्रशिक्षण के बाद ही किसी को लाइसेंस मिले। अभी लोग अपने स्तर पर ड्राइविंग सीखते हैं, जिसमें एकरूपता नहीं है।
लिहाजा देश में राष्ट्रीय ड्राइविंग प्रोग्राम बनाने की जरूरत है। वहीं हमें सड़कों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार बनाना होगा। कड़े कानून भी बनाने की जरूरत है। मौजूदा कानून काफी लचर है। दुर्घटना करने वाले व्यक्ति को कुछ ही देर में जमानत मिल जाती है और मामला वर्षों तक अदालत में चलता रहता है। ऐसे में वाहन चालक बेखौफ हो कर ट्रैफिक नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाते रहते हैं।
प्रस्तावित नए कानून में सख्त धाराओं को जोड़ा जाना चाहिए। साथ ही लोगों में और जागरूकता लाने के लिए देशव्यापी कार्यक्रम चलाने की जरूरत है, ताकि वे वाहन चलते समय लापरवाही छोड़ अतिरिक्त सावधानी बरतें। इन कोशिशों से तमाम असामयिक मौतों पर बहुत हद तक काबू पाया जा सकता है।
ब्रिटेन के राजघराने ने 1933 का वीडियो जारी करने पर निराशा जताई है जिसमें रानी एलिजाबेथ को नाजी तरीके से अभिवादन करते हुए दिखाया गया है। ब्रिटेन के द सन अखबार ने 17 सेकेंड की फिल्म को रिलीज किया है हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह किन परिस्थितियों में बनाई गई थी। इसमें मौजूदा रानी, उनकी मां, बहन और अंकल एडवर्ड अष्टम को दिखाया गया है। मौजूदा रानी उस समय सात साल की थीं और एडवर्ड बाद में ब्रिटेन के राजा बने। बकिंघम पैलेस ने कहा, हमें इस पर निराशा हुई कि आठ दशक पहले की फिल्म का इस्तेमाल किया गया। इस फिल्म में रानी की मां को नाजी तरीके से हाथ उठा कर अभिवादन करते हुए दिखाया गया। इसके बाद राजकुमारी एलिजाबेथ ने भी वैसा ही किया। बकिंघम पैलेस के सूत्र ने कहा, उम्मीद है कि ज्यादातर लोग इस फिल्म को सही संदर्भ में देखेंगे।

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