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आतंक को पालने का अंजाम भोग रहा पाकिस्तान

पाकिस्तान को अपने गिरेबान में जरूर झांकना चाहिए

आतंक को पालने का अंजाम भोग रहा पाकिस्तान
नई दिल्ली. पाकिस्तान ने क्वेटा आतंकी हमले के लिए अफगानिस्तान को जिम्मेदार ठहराकर जल्दबाजी दिखाई है। इस दौरान वह भूल गया है कि 32 से ज्यादा आतंकी गुट उसकी सरजमीं से ही ऑपरेट हो रहे हैं। पाक के बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा में पुलिस प्रशिक्षण केंद्र पर आत्मघाती आतंकी हमले में 60 जवान मारे गए हैं और 118 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। अभी बीते अगस्त में बलूचिस्तान में एक अस्पताल व वकीलों पर किए गए आतंकी हमले में 88 लोगों की मौत हो गई थी। ताजा आतंकी हमले ने पाकिस्तान को बड़ा नुकसान पहुंचाया है और उसके शक्ति केंद्र पर हमला कर उसे एहसास भी कराया है कि वह आतंकियों के टारगेट से कहीं महफूज नहीं है। यह आतंकी हमला निंदनीय है।
भारत इसकी कड़ी निंदा करता है। दुनिया में कहीं भी आतंकी हमले हों, भारत ने हमेशा इसे कायराना हरकत करार देते हुए इनकी भर्त्सना की है। लेकिन अफगानिस्तान पर उंगली उठाने से पहले पाकिस्तान को अपने गिरेबान में जरूर झांकना चाहिए था। क्योंकि पाकिस्तान में अब तक जितने भी आतंकी हमले हुए हैं, सभी में पाक के ही आतंकी गुटों का हाथ रहा है। उल्टे भारत और अफगानिस्तान में पाक के आतंकी गुट हमले करवाते रहे हैं। पठानकोट और उरी हमले में भी पाक स्थित आतंकी गुटों के हाथ होने के सबूत मिले हैं। पाक उरी हमले में हाथ होने से इनकार करता रहा है। लेकिन पाक के गुजरांवाला में मिले पोस्टर में लश्करे तैयबा ने उरी हमले की जिम्मेदारी ली है। मुंबई हमले, ताज हमले व संसद हमले में भी पाक के ही हाथ होने के सबूत मिले।
पाक के ही शहर पेशावर के सैनिक स्कूल में हुए आतंकी हमले में भी तहरीके तालिबान पाकिस्तान का हाथ था, जिसका ठिकाना पख्तूनवा क्षेत्र में है। पाक के बलूचिस्तान में हक्कानी नेटवर्क सक्रिय है, जो अफगानिस्तान व पश्चिम पाकिस्तान में आतंकी हमलों को अंजाम देते रहते हैं। पिछले साल बाचाखान यूनिवर्सिटी में भी पाक आतंकी गुटों ने ही हमले करवाए थे। पाक में पिछले दस साल में तकरीबन एक हजार से ज्यादा छोटे-बड़े आतंकी हमले उसके ही देश स्थित आतंकी गुटों ने किए हैं। फिर भी पाकिस्तान सबक लेने को तैयार नहीं है। क्वेटा आतंकी हमला पाकिस्तान के अपने कुकर्मों का ही फल है। किसी भी तरह का आतंकवाद, किसी भी देश के लिए अच्छा नहीं है। पाकिस्तान इस बात को नहीं समझता है। वह भारत के खिलाफ आतंकवाद को पाल रहा है और उसका इस्तेमाल कर रहा है। जबकि भारत ने लगातार कहा है कि पाक अपने यहां के आतंकी नेटवर्क को खत्म करे।
अमेरिका समेत विश्व के अधिकांश देशों ने भी पाक से उसके आतंकी गुटों को समाप्त करने को कहा है। अब ग्लोबल दबावों के बाद पाक ने आतंकियों के पांच हजार खाते फ्रीज किए हैं। हालांकि खाते फ्रीज करने से आतंकी गुटों की सेहत पर अधिक फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि आतंकी नेटवर्क कैश पर रन करते हैं। लेकिन खाते फ्रीज करने से यह जरूर साफ हो जाता है कि पाकिस्तान अपने यहां के आतंकी गुटों के बारे में अच्छी तरह पता है। पाक फौज पर बलूचिस्तान के नागरिकों पर जुल्म करने करने के आरोप भी लगते रहे हैं। अभी हाल में आतंकवाद के आधार पर ही पाक में होने वाले सार्क सम्मेलन को रद किया गया है। आतंकवाद को नीति के रूप में बढ़ावा देने के चलते ही वह इस समय विश्व में अलग-थलग पड़ता जा रहा है। यह वक्त पाकिस्तान के लिए आत्ममंथन का है। वह खुद तय करे कि उसे अपने देश से आतंकी नेटवकरें का सफाया करना है या दुनिया में आतंकवाद की पनाहगाह देश बने रहना है।
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