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डाॅ. एल. एस. यादव का लेख : विक्रांत से मजबूत होगी नौसेना

स्वदेश निर्मित पहला विमानवाहक युद्धपोत आईएनएस विक्रांत सामुद्रिक परीक्षणों के लिए चार अगस्त को समुद्र की लहरों पर उतार दिया गया। इस युद्धपोत को सर्वश्रेष्ठ आॅटोमेटेड मशीनों, ऑपरेशन, शिप नैविगेशन एवं सुरक्षा प्रणालियों से लैस किया गया है। आईएनएस विक्रांत की लंबाई 860 फुट, इसकी बीम 203 फुट, गहराई 84 फुट और चौड़ाई 203 फुट है। इस विमानवाहक पोत का कुल क्षेत्रफल 2.5 एकड़ का है। यह 52 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से समुद्र की लहरों को चीरता हुआ तेजी से आगे बढ़ने की क्षमता रखता है। समुद्र में निकलने पर यह एक बार में 15000 किलोमीटर की यात्रा कर सकता है।

डाॅ. एल. एस. यादव का लेख : विक्रांत से मजबूत होगी नौसेना
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डाॅ. एलएस यादव 

डाॅ. एल. एस. यादव

भारत का स्वदेश निर्मित पहला सबसे बड़ा विमानवाहक युद्धपोत आईएनएस विक्रांत सामुद्रिक परीक्षणों के लिए चार अगस्त को समुद्र की लहरों पर उतार दिया गया है। यह सफलता रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर भारत की एक विशेष एवं प्रमुख उपलब्धि है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय नौसेना एवं कोचीन शिपयार्ड को बधाई देते हुए कहा कि यह एक ऐतिहासिक मौका है और नया विमानवाहक युद्धपोत नौसैनिक इतिहास को बदल देगा। कोचीन शिपयार्ड में तैयार किए गए नौसेना के इस भारी भरकम विमानवाहक युद्धपोत के निर्माण में लगभग 75 प्रतिशत स्वदेशी उपकरणों का प्रयोग किया गया है। आज से 50 साल पहले पाकिस्तान के साथ लड़े गए 1971 के युद्ध में इसी नाम के पुराने युद्धपोत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए शत्रु के दांत खट्टे कर दिए थे। जलावतरण के बाद अब छह महीने तक इस पोत के सामुद्रिक परीक्षण किए जाएंगे। इन परीक्षणों में सफल रहने पर इसे अगले वर्ष भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा। नौसेना में शामिल होने के बाद विमानवाहक युद्धपोत आईएनएस विक्रांत रूस से लिए गए विमानवाहक युद्धपोत आईएनएस विक्रमादित्य के साथ यौद्धिक अभियानों के संचालन में प्रमुख भूमिका अदा करेगा।

भारतीय नौसेना एवं देश के लिए यह अवसर गौरवान्वित करने वाला दिन था, क्योंकि इस उपलब्धि के साथ ही भारत उन चुनिन्दा देशों में शामिल हो गया है जिसके पास स्वदेश में डिजाइन करने, निर्माण करने एवं अत्याधुनिक विमानवाहक पोत तैयार करने की विशिष्ट क्षमता है। भारतीय नौसेना के प्रवक्ता कमांडर विवेक मधवाल कहते हैं कि यह दिन ऐतिहासिक इसलिए बन गया क्योंकि 1971 की भारत-पाकिस्तान की लड़ाई में विजय की अहम भूमिका निभाने वाले अपने शानदार पूर्ववर्ती जहाज के 50वें साल में यह पोत शुरुआती परीक्षणों के लिए रवाना हुआ है। उन्होंने कहा कि यह भारत में सबसे बड़ा और विशालकाय युद्धपोत है। नौसेना अध्यक्ष एडमिरल करमवीर सिंह का कहना है कि आईएनएस विक्रांत को अभियान संचालन में पूरी तरह से पारंगत होने में लगभग एक साल का समय लग जाएगा, इसलिए इसे अगले वर्ष अगस्त महीने में नौसेना में शामिल किया जाना है। तब तक नौसेना आईएनएस विक्रांत को लेकर अलग-अलग जगहों पर भिन्न प्रकार के परीक्षण करेगी, ताकि नौसेना अपने परीक्षणों में यह देख सके कि यह पोत कितना ताकतवर, टिकाऊ, मजबूत और भरोसेमंद है। इसके अलावा इसकी मारक क्षमता भी देखी जाएगी।

आईएनएस विक्रांत भारत का पहला स्टेट-आफ-द-आर्ट विमानवाहक पोत है। इस युद्धपोत को बनाने में तकरीबन 23000 करोड़ रुपये की लागत आई है। इस विमानवाहक पोत के काॅम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम को टाटा पावर स्ट्रैटेजिक इंजीनियर डिविजन ने रूस की वैपन एंड इलेक्ट्राॅनिक्स सिस्टम इंजीनियरिंग और मार्स के साथ मिलकर बनाया है। कमांडर विवेक मधवाल ने बताया कि इसे बनाने में कोचीन शिपयार्ड के साथ-साथ 550 भारतीय कंपनियों ने मदद की है। इसके अलावा इसके निर्माण में 100 एमएसएमई कंपनियां भी शामिल थीं। इस युद्धपोत के अलग-अलग हिस्सों को अलग-अलग कंपनियों ने बनाया है। यह मेक इन इंडिया का एक बेहतरीन उदाहरण है। इस पर तैनात होने वाले लड़ाकू विमानों का लेकर भी काफी चिंतन और मनन किया गया। पहले इस पर हल्के तेजस लड़ाकू विमानों को तैनात किए जाने की बात निश्चित हुई थी, परंतु यह निर्णय इसके करियर के हिसाब से भारी हो रहा था। इसके बाद रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एक प्लान बनाकर हिन्दुस्तान एयरोनाॅटिक्स लिमिटेड को दे दिया, जिसके तहत अब वह ट्विन इंजन डेक बेस्ड फाइटर विकसित कर रहा है। तब तक के लिए इस पर मिग-29 के श्रेणी के लड़ाकू विमानों को तैनात किया जाएगा।

अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस विक्रांत का इस्पात नगरी से भी गहरा नाता है। यह सेल के ध्वजवाहक भिलाई इस्पात संयंत्र के फौलाद से बना है। इस संयंत्र ने युद्धपोत के लिए विशेष क्वालिटी की प्लेट आपूर्ति की है। इससे पूर्व ये प्लेटें रूस से मंगाई जाती रही हैं। अब देश की आत्मनिर्भर योजना के तहत यह संभव हो सका है। विक्रांत के लिए इस संयंत्र ने 21500 टन डीएमआर 249ए युद्धपोत ग्रेड प्लेटों की आपूर्ति की है। उल्लेखनीय है कि यह संयंत्र एंटी सबमरीन युद्धपोत, आईएनएस किलतान युद्धपोत, आईएनएस कमोर्ता युद्धपोत एवं आईएनएस कदमत युद्धपोत के लिए भी मजबूत प्लेटों की आपूर्ति कर चुका है। उच्च गुणवत्ता वाली प्लेटों से बना यह स्वदेशी युद्धपोत विश्व के समक्ष भारत के इंजीनियरिंग कौशल का बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहा है। यह इस्पात नगरी के लिए भी गौरव की बात है कि उसकी प्लेटों से निर्मित स्वदेशी युद्धपोत समुद्र की गहराई नापेगा और भविष्य में शत्रु सेना के दांत खट्टे करेगा। इस विमानवाहक पोत की फ्लाइट डेक काफी बड़ी अर्थात 1.10 लाख वर्ग फुट एरिया वाली है जिस पर से बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान आराम से टेक-आफ व लैंडिंग कर सकते हैं। इस पर एक बार में 36 से लेकर 40 की संख्या में लड़ाकू विमान तैनात किए जा सकते हैं। अभी की योजना के मुताबिक इस पर 26 मिग-29 के और 10 लड़ाकू विमानों में कामोव केए-31, वेस्टलैंड सी किंग या बहुउद्देश्यीय भूमिका वाले ध्रुव हेलीकाॅप्टर तैनात किए जा सकते हैं। नौसेना के इस विमानवाहक पोत की स्ट्राइक फोर्स की रेंज 1500 किलोमीटर तक की है। इस पर जमीन से हवा में मार करने में सक्षम 64 बराक मिसाइलें लगी होंगी। आईएनएस विक्रांत में जनरल इलेक्िट्रक के ताकतवर टरबाइन लगे हैं जो इसको 1.10 लाख हाॅर्स पावर की ताकत देंगे। इस तरह यह काफी ताकत वाला विमानवाहक पोत है।

इस विमानवाहक युद्धपोत को सर्वश्रेष्ठ आटोमेटेड मशीनों, ऑपरेशन, शिप नैविगेशन एवं सुरक्षा प्रणालियों से लैस किया गया है। आईएनएस विक्रांत की लंबाई 860 फुट, इसकी बीम 203 फुट, गहराई 84 फुट और चौड़ाई 203 फुट है। इस विमानवाहक पोत का कुल क्षेत्रफल 2.5 एकड़ का है। यह 52 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से समुद्र की लहरों को चीरता हुआ तेजी से आगे बढ़ने की क्षमता रखता है। समुद्र में निकलने पर यह एक बार में 15000 किलोमीटर की यात्रा कर सकता है। इसमें बड़ी संख्या में नौसेना के जवान तैनात रह सकते हैं। इसमें एक बार में 196 नौसेना अधिकारी, 1149 सेलर्स व एयरक्रू रह सकते हैं। इसमें चार आटोब्रेडा 76 मिलीमीटर की ड्यूल पर्पज कैनन लगे होंगे। इसके अलावा चार एके-630 प्वाइंट डिफेंस सिस्टम गन लगी होंगी। उपर्युक्त विवेचन यह स्पष्ट करता है कि हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों के मद्देनजर विमानवाहक युद्धपोत आईएनएस विक्रांत भारतीय नौसेना की ताकत काफी बढ़ा देगा।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)- लेख पर अपनी प्रतिक्रिया edit@haribhoomi.com पर दे सकते हैं।

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