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पीएम मोदी का मास्टर-स्ट्रोक ''कोविंद'', 2019 में मिलेगी जीत!

कानपुर देहात में पहली अक्तूबर 1945 में एक दलित परिवार में जन्में कोविंद दो बार राज्यसभा सदस्य रहे हैं।

पीएम मोदी का मास्टर-स्ट्रोक
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बिहार के बहत्तर वर्षीय राज्यपाल रामनाथ कोविंद का चौदहवां राष्ट्रपति बनना लगभग तय है। भाजपा-राजग के पास इतने वोट हैं कि कोविंद को आसानी से जिता सकें। कानपुर देहात में पहली अक्तूबर 1945 में एक दलित परिवार में जन्में कोविंद दो बार राज्यसभा सदस्य रहे हैं। भाजपा में कई पदों पर काम कर चुके हैं और उससे पहले कई वर्ष उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में सेवाएं दी हैं। कानपुर विश्वविद्यालय से बी कॉम और एलएलबी की डिग्री हासिल करने वाले कोविंद संविधान और कानून के अच्छे ज्ञाता माने जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने फैसलों से सबको चौंकाते रहे हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। पिछले कई दिन से हवा में कई नाम चल रहे थे परन्तु किसी को कोविंद को उम्मीदवार बनाए जाने की कानो-कान भनक तक नहीं थी। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, केन्द्रीय मंत्री सुषमा स्वराज, वैंकैंया नायडु से लेकर झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू तक के नाम देश के सर्वोच्च पद के संभावी प्रत्याशियों के रूप में लिये जा रहे थे परन्तु रामनाथ कोविंद का नाम दूर-दूर तक नहीं था। लुटियन जोन के वह पत्रकार भी अंतिम समय तक पता लगाने में नाकाम रहे कि भाजपा राजग का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार कौन होने जा रहा है। इस बात के कयास जरूर थे कि चौबीस जून को अमेरिका की यात्रा पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राजग के प्रत्याशी का नामांकन दाखिल जरूर करवाना चाहेंगे। इसी क्रम में सोमवार को भाजपा संसदीय बोर्ड की अहम बैठक भाजपा मुख्यालय अशोक रोड़ पर आहूत की गई, जिसकी अध्यक्षता स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने की। कोविंद के नाम पर फैसला करने से पहले भाजपा की इस बाबत बनाई गई तीन सदस्यीय समिति ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, जनता दल नेता शरद यादव और कुछ दूसरे प्रमुख नेताओं से विचार विमर्श कर उनकी राय जानने की कोशिश की थी। गुलाम नबी आजाद, मायावती और सीताराम येचुरी को रामनाथ कोविंद के नाम के ऐलान के बाद भी यही शिकायत है कि उन्हें भरोसे में लेने के बजाय भाजपा ने एकतरफा उनके नाम की घोषणा कर दी। अब विपक्षी दलों के नेता 22 जून को बैठकर आगे की रणनीति तैयार करेंगे। हालांकि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने घोषणा कर दी है कि उनकी पार्टी भाजपा उम्मीदवार कोविंद को समर्थन देगी। मायावती ने इसलिए उन्हें समर्थन के संकेत दिए हैं क्योंकि वह दलित वर्ग से आते हैं। लगे हाथ उन्होंने यूपीए को यह हिदायत भी दी है कि वह दलित समुदाय का प्रत्याशी लेकर आएं तो वह उसे समर्थन दे देंगी। दरअसल, रामनाथ कोविंद को चौदहवें राष्ट्रपति के रूप में अपना प्रत्याशी बनाने के पीछे प्रधानमंत्री मोदी की सोची विचारी रणनीति है। उनकी निगाह 2019 के आम चुनाव पर हैं, जो अब दो वर्ष दूर रह गए हैं। कोविंद उत्तर प्रदेश से आते हैं। इस राज्य ने देश को भले ही सात-आठ प्रधानमंत्री दिए हैं परन्तु अभी तक राज्य से कोई राष्ट्रपति नहीं बन सका है। कोविंद दलित समुदाय से हैं और भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष व कोली समाज से जुड़े संगठन के प्रमुख रह चुके हैं। ऐसा अनुमान है कि देश में चौबीस प्रतिशत के करीब दलित हैं। अकेले यूपी में 22 प्रतिशत दलित हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में अकेले यूपी से भाजपा को 71 सीटें हासिल हुई थीं। मोदी चाहते हैं कि 2019 में इस सबसे बड़े सूबे से उन्हें इससे कम सीटें नहीं मिलें। कोविंद के नाम के ऐलान के बाद प्रधानमंत्री ने उम्मीद जाहिर की है कि संविधान और कानून के ज्ञाता के नाते श्री कोविंद को देश के अनुभव का लाभ मिलेगा। जिस तरह के आंकड़े भाजपा-राजग के पास हैं, उसके मद्देनजर किसी को इस पर शक नहीं रह गया है कि रामनाथ कोविंद ही देश के अगले राष्ट्रपति बनना अब तय हैं। विपक्ष 22 जून को चाहे जो फैसला ले।

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