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कांग्रेस की राजनीति और मुसलमानों का खून

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हमेशा ही मुस्लिम भाईचारे की बात करते हैं, लेकिन उन्हें कांग्रेस का खूनी इतिहास भी नहीं भूलना चाहिए।

कांग्रेस की राजनीति और मुसलमानों का खून
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हमेशा ही मुस्लिम भाईचारे की बात करते हैं, लेकिन उन्हें कांग्रेस का खूनी इतिहास भी नहीं भूलना चाहिए। कांग्रेस के शासनकाल में सबसे ज्यादा दंगे हुए तो वहीं दूसरी तरफ मुस्लिमों की हत्या भी इनके कार्यकाल में सबसे ज्यादा हुई। साथ ही कांग्रेस की पोल खोलते आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस ने मुस्लिमों के विकास के लिए कितना काम किया है।

इस कड़वे सच को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी स्वीकार किया है कि सबसे ज्यादा नुकसान मुसलमानों को कांग्रेस की वजह से हुआ। हाल ही में सलमान खुर्शीद ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एमएमयू) में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि उनकी पार्टी और उनके दामन पर मुसलमानों के खून के धब्बे लगे हैं, ऐसे में कांग्रेस और राहुल गांधी इस बात को कैसे झुठला सकते हैं।

1947 के बाद हाशिमपुरा, मलियाना, मेरठ, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, भागलपुर, अलीगढ़ आदि जगहों पर मुसलमानों का नरसंहार हुआ। इसके अलावा बाबरी मस्जिद के विवाद को हवा देने का काम कांग्रेस ने ही किया था।

अब अगर केवल दंगों की बात करें तो कांग्रेस के शासनकाल में करीब पांच हजार दंगे हुए। मतलब इससे साफ जाहिर होता है कि कांग्रेस ने दंगों की आड़ में अपनी राजनीति को बचाए रखा। और बेबस जनता को डरा कर राजनीति करती रही। इससे पता चलता है कि कांग्रेस कितनी दूध की धुली है।

आज भले ही पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम अपने अध्यक्ष राहुल गांधी को 'नाबालिग' नेता बताकर सीख दंगे और तमाम लांछनों से बचा लें लेकिन इस खूनी इतिहास का दर्द देश कभी नहीं भूल पाएगा और देश की जनता उन्हें माफ नहीं करेगी।

खैर, राहुल गांधी उस वक्त बच्चे थे लेकिन आज बड़े हो गए हैं, पार्टी की कमान उनके हाथ में है। फिर उनकी पार्टी तीन तलाक, हलाला जैसे विधेयक पर पीछे क्यों हटी। इससे साफ दिख रहा है कि राहुल भी पुराने ढर्रे पर ही चल रहे हैं।

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जब देश को पता है कि कांग्रेस ने मुसलमानों के लिए ना के बराबर भी काम नहीं किया है। वहीं दंगा-फसाद कराने में अव्वल रहे हैं। ऐसे में क्या देश इन पर भरोसा करेगा?

भारतीय जनता पार्टी को जन-विरोधी, दलित विरोधी, मुस्लिम विरोधी बताने वाले कांग्रेस और राहुल गांधी को यह नहीं भूलना चाहिए कि मुसलमानों के हित के लिए मोदी सरकार ने जो कदम उठाए हैं वे वाकई सराहनीय हैं। इसके लिए देश के जागरूक मुसलमान उनके साथ खड़ा है।

2019 लोकसभा चुनाव के लिए खुद को प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर प्रोजेक्ट करने वाले राहुल को पहले पार्टी का इतिहास जानना चाहिए। विपक्ष पर हमला बोलना जरूरी है। उससे पहले कांग्रेस को अपने पाप धोनें होंगे। वरना गुनाहों के देवता से फरियादी जनता क्या उम्मीद करेगी।

बेहतर होगा कि राहुल कांग्रेस के गुनाहों को स्वीकार करें और बातों से मुसलमानों को गुमराह करने के बजाय कोई ठोस कदम उठाएं।

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