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भ्रष्टाचारियों पर शिकंजा कसने में जुटी मोदी सरकार

एजेंसी ने 47 लाख रुपये जब्त किए। लगातार दो दिनों से चल रही इस छापेमारी को देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि मोदी सरकार किसी भी सूरत में भ्रष्टाचार की कमर तोड़ने की तैयारी में है।

भ्रष्टाचारियों पर शिकंजा कसने में जुटी मोदी सरकारModi Government Take Strong Action On Corrupt Officers

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार-2 ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी मुहिम को तेज कर दिया है। मंगलवार को केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई द्वारा देशभर में 110 स्थानों पर छापेमारी के बाद बुधवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में डीएम आईएएस अभय सिंह के घर को खंगाला गया। डीएम साहब के घर मिली नकदी को देखकर जांच अधिकारी भी हैरान रह गए। नोट गिनने के लिए मशीन मंगवानी पड़ी। एजेंसी ने 47 लाख रुपये जब्त किए। लगातार दो दिनों से चल रही इस छापेमारी को देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि मोदी सरकार किसी भी सूरत में भ्रष्टाचार की कमर तोड़ने की तैयारी में है। मोदी सरकार-1 को भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान में खासी कामयाबी मिली थी। सरकार ने 70,000 करोड़ रुपये से अधिक का काला धन जब्त किया था।

इसके अलावा कर चोरी कर, विदेशी खातों में जमा किए गए काले धन को वापस लाने के लिए सरकार ने स्विट्जरलैंड, सिंगापुर, मॉरीशस और पनामा जैसे टैक्स हेवन देशों के साथ संधि की। आधार और पैन के साथ बैंक खातों को जोड़ने की योजना शुरू की गई। इससे फर्जी या बेनामी खातों को पकड़ने में आयकर विभाग को बड़ी सफलता मिली। बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन अधिनियम, 2016 को लागू किया गया। इसके तहत कई बेनामी संपत्तियों का पता लगाने में कामयाबी मिली। सरकार ने शेल कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए दो लाख से अधिक कंपनियों के पंजीकरण को रद कर दिया। इसके अलावा रसोई गैस, राशन वितरण प्रणाली और सब्सिडी को आधार कार्ड से जोड़कर काला बाजारी पर नकेल कसी गई।

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि इन प्रयासों से सरकार को प्रतिवर्ष 90 हजार करोड़ रुपये की बचत हुई। इस धनराशि को देश के विकास पर खर्च किया गया। अब मोदी 2.0 ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई को और तेज कर दिया है। सरकार गठन के चंद दिनों बाद ही 43 अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत्ति से साफ हो गया कि लालफीताशाही और भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में सहन नहीं होगा। इससे नौकरशाही में दो टूक पैगाम गया और केंद्र सरकार के दफ्तरों में कर्मचारियों के कामकाज में अधिक अनुशासन देखने को मिलने लगा है, यह आम अनुभव है। डीएम जैसे उच्च अधिकारियों पर छापे पड़ने से साफ है कि सरकार भ्रष्टाचार के मामले में किसी को भी रियासत देने को तैयार नहीं है।

कौन नहीं जानता कि देश में भ्रष्टाचार की जड़े बहुत गहरी हैं। यूपीए-2 के दौरान हुए एक के बाद एक घोटालों ने भ्रष्टाचार की जड़ों को ओर भी गहरा करने का काम किया। यहां तक कि वे लोग भी बेईमानी के दलदल में फंसे नजर आए जिन पर भ्रष्टाचार रोकने का दारोमदार था। चौतरफा चल रहे कमीशन के खेल के कारण आम आदमी का लोकतंत्र से भी भरोसा उठने लगा था। प्रधानमंत्री बनने के बाद जब नरेंद्र मोदी ने 'न खाऊंगा, न खाने दूंगा का संकल्प जताया तो उससे देश में भरोसे का माहौल बना। अच्छी बात है कि उस भरोसे को बरकरार रखने की दिशा में मोदी सरकार ने कई कड़े उठाए। सबसे पहले उन्होंने राजनीतिक भ्रष्टाचार पर लगाम कसने का काम किया। यही कारण रहा कि उनकी पांच साल की सरकार में रतीभर घालमेल भी सामने नहीं आया।

देश के पास राष्ट्रीय संसाधनों का अंबार है, लेकिन भ्रष्टाचार के कारण इन संसाधनों का लाभ आम आदमी तक नहीं पहुंच पा रहा। अगर देश को विकसित राष्ट्रों की क्षेणी में खड़ा करना है तो भ्रष्टाचार पर नकेल कसनी बहुत जरूरी है। अगर बेईमानी, कमीशनखोरी खत्म होती हैं तो कोई ताकत हमें विश्वशक्ति बनने से नहीं रोक सकती। अब नरेंद्र मोदी 2.0 सरकार इसी मूल मंत्र पर आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय संसाधनों के आवंटन में कमीशनखोरी पर नकेल कसी गई है। नौकरशाही से भ्रष्टाचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। अगर सरकार अपने इस अभियान में कामयाब होती है तो देश के करोड़ों लोगों की जिंदगी बेहतर बनाई जा सकेगी, जिसे नरेंद्र मोदी ने अपना लक्ष्य बताया था।

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