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मोदी की विदेश यात्रा: खाड़ी और पश्चिम एशिया में भारत की आर्थिक व कूटनीतिक स्थिति मजबूत होगी

भारत के कूटनीतिक, आर्थिक व सामरिक रिश्तों को लगातार मजबूती प्रदान कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों- ​फिलिस्तीन, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान की यात्रा का मौजूदा हालात में बड़ा रणनीतिक महत्व है।

मोदी की विदेश यात्रा: खाड़ी और पश्चिम एशिया में भारत की आर्थिक व कूटनीतिक स्थिति मजबूत होगी
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भारत के कूटनीतिक, आर्थिक व सामरिक रिश्तों को लगातार मजबूती प्रदान कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों- ​फिलिस्तीन, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान की यात्रा का मौजूदा हालात में बड़ा रणनीतिक महत्व है। तीनों के साथ भारत का व्यापार बेहतर है। इस यात्रा से खाड़ी और पश्चिम एशिया में भारत की आर्थिक व कूटनीतिक स्थिति मजबूत होगी।

यात्रा पर रवाना होने से पहले पीएम ने कहा भी है कि मैं अपनी यात्रा के जरिए भारत के पश्चिम एशिया तथा खाड़ी क्षेत्र के साथ बढ़ते और महत्वपूर्ण संबंध को और मजबूत बनाने को लेकर प्रतिबद्ध हूं। 2015 के बाद खाड़ी और पश्चिमी एशिया क्षेत्र की उनकी यह पांचवीं यात्रा है। मोदी पहली बार फिलिस्तीन गए हैं और वहां जाने वाले पहले भारतीय पीएम बन गए हैं।

इससे साफ है कि भारत फिलिस्तीन को काफी महत्व दे रहा है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेजामिन नेतन्याहू की छह दिवसीय भारत यात्रा और उससे पहले पीएम मोदी की इजराइल यात्रा व उस दौरान उनके फिलिस्तीन नहीं जाने से दुनिया में संदेश गया कि भारत और इजराइल के रिश्तों में तेजी से गर्माहट आ रही है और वह फिलिस्तीन को नजरअंदाज कर रहा है।

जबकि हकीकत ऐसा नहीं है। भारत इजराइल के साथ-साथ फिलिस्तीन के साथ भी अपने मजबूत संबंधों को बनाए रखना चाहता है। इजराइल से नजदीकी के चलते भारत फिलिस्तीन संबंधों को लेकर किसी प्रकार की गलतफहमी पैदा नहीं होने देना चाहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फिलिस्तीन यात्रा से गलतफहमी दूर होगी। फिलिस्तीन के बनने के समय से यासिर आराफात के साथ भारत के अच्छे संबंध रहे हैं।

यरूशलम को इजराइल की राजधानी के रूप में मान्यता दिए जाने के सवाल पर भारत ने कूटनीतिक परिपक्वता दिखाई थी और संयुक्त राष्ट्र में मान्यता देने के खिलाफ मत दिया था। इसका भी स्पष्ट संदेश था कि भारत को फिलिस्तीन के हितों की चिंता है। भारत वर्षों से पाक प्रायोजित आतंकवाद से जूझ रहा है। पश्चिम एशिया भी आतंकवाद से पीड़ित है।

भारत पश्चिम एशिया के देशों के साथ मिलकर आतंकवाद के खात्मे की दिशा में काम करना चाहता है। भारत के इस मकसद में फिलिस्तीन, यूएई व ओमान का सहयोग मददगार होगा। अपने कार्यकाल के दौरान मोदी यूएई दूसरी बार जाएंगे। वहां एक मंदिर की आधारशिला रखेंगे। एक मुस्लिम देश में मंदिर का निर्माण दर्शाता है कि भारत और यूएई केवल दो साझीदार देश ही नहीं है, बल्कि दोनों सांस्कृतिक रूप से भी करीब हैं।

मोदी ने अपनी पिछली यात्रा के दौरान यूएई से मंदिर निर्माण पर चर्चा की थी। भारत यूएई के साथ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी तथा सुरक्षा समेत सभी बड़े क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहा है। यूएई ने भारत में 25 अरब डॉलर के नए निवेश की बात भी की है। भारत और यूएई के बीच होने वाले व्यापार को 2020 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके लिए आपसी ट्रेड का बढ़ना जरूरी है।

भारत की योजना है कि वह न सिर्फ खाड़ी के तेल उत्पादक देशों को यहां तेल भंडारण की सुविधा उपलब्ध कराए, बल्कि इन देशों की कंपनियों के साथ मिलकर दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी तेल भंडारण के लिए बुनियादी ढांचा स्थापित करवाए। इसको लेकर पीएम मोदी की इस यात्रा में भारत और यूएई की कंपनियों के बीच इस बारे में अहम समझौता भी होगा।

भारत में तीन भंडारण क्षमता का काम पूरा हो चुका है। 11 को ही ओमान के सुल्तान के साथ बैठक करेंगे और 12 को ओमान के उद्योगपतियों से मिलेंगे। भारत और ओमान के मजबूत व्यापारिक रिश्ते हैं। भारत ओमान से कच्चा तेल और प्राकतिक गैस आयात करता है। खाड़ी के देशों में करीब 90 लाख से ज्यादा भारतीय रहते हैं जो सालाना भारत को 35 अरब डॉलर की राशि भेजते हैं।

मोदी की कोशिश पश्चिम एशिया व खाड़ी देशों में भारत की दमदार उपस्थिति दर्ज कराकर वहां चीन के असर को कम करना है और भारत के ट्रेड को बढ़ाना है। वन बेल्ट व वन रोड के जरिये चीन पश्चिम एशिया के संसाधनों का दोहन करना चाहता है। मुस्लिम देशों के साथ अच्छे संबंध पाक को हाशिये पर रखने के लिए भी जरूरी है। इससे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज सऊदी अरब की यात्रा पर गई थीं और जल्द ही ईरान के राष्ट्रपति भारत आएंगे। ये कोशिशें खाड़ी व पश्चिम एशिया में भारत को मजबूत बनाने व शक्ति संतुलन कायम करने की हैं।

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