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हरिभूमि संपादकीय लेख: आपदा में वैश्विक नेता बनकर उभरे मोदी

मोदी ने अमेरिका समेत तमाम देशों को जरूरी दवा उपलब्ध कराकर जो बड़प्पन दिखाया, उसने भ्ाी दुनिया को उनका मुरीद बना दिया।

पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की विश्वभर में चर्चा, डब्ल्यूएचओ की कमान अगले महीने संभालेगा भारत

महामारी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैश्विक नेता के रूप में उभरे हैं। जब आपको आपदा घेर ले तो उससे उबारने के लिए दूरदर्शी और निर्णायक नेतृत्व की दरकार होती है। इस भूमिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी तरह खरे साबित हो रहे हैं। यह उनके आह्वान का ही असर था कि देश के हर आम जनमानस ने पहले जनता कर्फ्यू के दिन ताली-थाली बजाकर और फिर पांच अप्रैल को मोमबत्ती-दीया जलाकर कोरोना योद्धाओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ एकजुटता का भी प्रदर्शन किया।

दूसरी ओर मोदी ने अमेरिका समेत तमाम देशों को जरूरी दवा उपलब्ध कराकर जो बड़प्पन दिखाया, उसने दुनिया को उनका मुरीद बना दिया। दवा देने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब मोदी की तारीफ करते हुए ट्वीटर पर लिखा कि हम इसे कभी नहीं भूलेंगे तो प्रधानमंत्री ने इसका जवाब दिया कि आपदा दोस्तों को और करीब लाती है। नरेंद्र मोदी की वैश्विक भूमिका को देखते हुए ही व्हाइट हाउस ने ट्वीटर पर उन्हें फ्लो करना शुरू किया। मोदी विश्व के पहले नेता हैं जिन्हें व्हाइट हाउस फॉलो कर रहा है। इसी कड़ी के तहत स्विट्जरलैंड में लेजर से तिरंगा बनाकर सद्भाव लिखा गया। यह पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। संक्रमण के शुरुआती काल में ही मोदी ने अपनी नेतृत्व कुशलता का परिचय देते हुए पहले सार्क देशों और फिर जी-20 की बैठक का आह्वान किया, जहां मिलकर महामारी से निपटने पर चर्चा की गई।

आपदा में नरेंद्र मोदी की कार्यप्रणाली पर माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर के बिल गेट्स ने उन्हें एक पत्र भी लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि आपके प्रयासों से भारत में कोविड-19 संक्रमण की दर को बढ़ने से रोकने में कामयाबी मिली है। यह देखकर अच्छा लग रहा है कि आप सभी भारतीयों की सामाजिक सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा कर रहे हैं। कोविड-19 से लड़ाई में डिजिटल क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल हो रहा है। आरोग्य सेतू डिजिटल ऐप इसका अच्छा उदाहरण है। अब आईएएनएस-सी वोटर ने यह बात प्रमािणत कर दी है। एजेंसी के सर्वे के मुताबिक जब मोदी ने 25 मार्च को लॉकडाउन का ऐलान किया था, तब देश के 76.8 प्रतिशत लोगों को उन पर भरोसा था, जो 21 अप्रैल को बढ़कर 93.5 प्रतिशत हो गया है। सर्वे के दौरान लोगों ने कहा कि उन्हें लगता है कि सरकार कोरोनावायरस से अच्छी तरह से निपट रही है। सर्वे के अनुसार कोरोना से चल रही इस जंग में केंद्र सरकार के हर सख्त फैसले को लोगों ने सही ठहराया है। देश में अब तक कोरोना संक्रमण के 21660 केस सामने आ चुके हैं।

कड़वा सच यह भी है कि यदि तबलीगी जमात जैसे तबके लापरवाही नहीं दिखाते तो हमारी स्थिति कहीं बेहतर होती। फिर भी 130 करोड़ आबादी में संक्रमितों की इतनी कम हिस्सेदारी बहुत बड़ी उपलब्धि है। वह भी तब जब हमारी 3,488 किलोमीटर की सीमा उस चीन से लगती है जहां से इस बीमारी ने पनपकर पूरी दुनिया में कहर बरपा दिया। वास्तव में किसी महामारी को रोकना केवल बेहतरीन मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर के बूते की बात नहीं। अव्वल दर्जे की स्वास्थ्य सुविधाएं होने के बावजूद विश्व शक्ति अमेरिका में 47 हजार 684 की मौत हो चुकी हैं और संक्रमितों की संख्या 8 लाख 84 हजार 092 से भी ज्यादा हो गई है।

यही हाल इटली, स्पेन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन का है। भारत इससे बचा रहा है तो इसका सबसे बड़ा कारण नरेंद्र मोदी सरकार की सजगता और राजनीतिक इच्छाशक्ति है। इसके बावजूद कांग्रेस व अन्य विपक्षी दल सरकार पर तरह-तरह के लांछन लगाने से बाज नहीं आ रहे। होना तो यह चाहिए कि आपदा के समय में विपक्ष सरकार के साथ खड़ा हो, लेकिन कांग्रेस संकट में भी राजनीति से बाज नहीं अा ही। यही कारण है कि देश को आजादी दिलवाने वाली पार्टी को देशवासी अब गले लगाने को तैयार नहीं हैं।

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