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क्या ट्रंप से ओबामा जैसे रिश्ते बना पाएंगे पीएम मोदी!

प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी का यह पांचवां अमेरिका दौरा है।

क्या ट्रंप से ओबामा जैसे रिश्ते बना पाएंगे पीएम मोदी!

मोदी नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा नई सोच, नई दृष्टि और नई उम्मीद के साथ शुरू हुई है। वैसे तो प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी का यह पांचवां अमेरिका दौरा है, लेकिन यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में यह पहला दौरा है।

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में भारत और अमेरिकी संबंधों को काफी मजबूती मिली। मोदी और बराक ओबामा के बीच अच्छी समझ विकसित हुई, जिसके चलते दोनों देश बड़े कूटनीतिक साझेदार के रूप में विश्व पटल पर मजबूती से उभरे। किन अब अमेरिका का निजाम बदला हुआ है।

ट्रंप राष्ट्रपति बनने के बाद से कई ऐसे फैसले कर चुके हैं, जो वैश्विक नजर से अमेरिकी साख को सूट नहीं करते हैं। छह मुस्लिम देशों के नागरिकों के अमेरिका प्रवेश पर रोक लगाना, ओबामा काल की अहम संधि टीपीपी को रद करना, क्लाइमेट चेंज पर पेरिस करार से बाहर आना और एच-1 बी वीजा को लेकर सख्ती बरतना आदि ऐसे फैसले हैं, जो ट्रंप की अलग सोच को दर्शाते हैं।

ऐसे में मोदी के सामने अमेरिका का ऐसा नया नेतृत्व होगा, जो विश्व में अमेरिका की विशिष्ट भूमिका के सम्मोहन पाश में कैद नहीं है। मोदी एक परिपक्व नेता हैं, जबकि ट्रंप के पास राजनीतिक अनुभव काफी कम है। इसके बावजूद ट्रंप ने जिस प्रकार मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया है और उन्हें सच्चा दोस्त बताया है, उससे इतना साफ है कि ट्रंप को अमेरिका के लिए भारत के अहम होने का महत्व पता है।

इस समय अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भारत जैसे बड़े बाजार की जरूरत है और भारत को नई पूंजी की आवश्यकता है। रक्षा, प्रौद्योगिकी, विज्ञान, अंतरिक्ष, असैन्य परमाणु, बिजली, बुनियादी ढांचा, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे कई क्षेत्र में दोनों देश दशकों से काम कर रहे हैं। सामरिक दृष्टि से चीन के विस्तार से अमेरिका और भारत दोनों चिंतित हैं। भारत के चीन से सीमा पर तनावपूर्ण रिश्ते हैं।

चीन पर दबाव बनाए रखने के लिए सामरिक कूटनीति में अमेरिका और भारत इस समय मजबूत सहयोगी हैं। एक साल पहले दोनों देशों में अहम रक्षा समझौते हुए हैं। अमेरिकी मदद से ही भारत को एमटीसीआर की सदस्यता मिली है। एनएसजी में चीन अड़ंगा बना हुआ है। ऐसे में कूटनीति, आर्थिक और सामरिक क्षेत्र में भारत और अमेरिका एक दूसरे की जरूरत हैं।

मोदी इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप से वार्ता करेंगे। वहां भारतीय समुदाय और गूगल-एपल समेत 21 दिग्गज अमेरिकी कंपनियों के प्रमुखों से मुलाकात के दौरान पीएम ने भारत की स्थिति और सोच को स्पष्ट भी कर दिया।

उन्होंने भारत में हो रहे आर्थिक सुधार व नीतिगत बदलाव से अवगत कराया। सर्जिकल स्ट्राइक, आतंकवाद, 7000 सुधार, जीएसटी और अमेरिकी कंपनियों को भारत में निवेश के अवसर का लाभ उठाने जैसी बातों से मोदी ने संकेत दे दिया है कि ट्रंप से वार्ता के दौरान रक्षा, निवेश और कूटनीति अहम मुद्दे रहेंगे।

वार्ता के दौरान भारत की ओर से 2008 के असैन्य परमाणु करार पर प्रगति, एच-1बी वीजा को सरल बनाना, पाकिस्तान को आर्थिक और सैन्य मदद बंद करने, आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई और अमेरिका पेरिस जलवायु परिवर्तन का पालन करने जैसे मुद्दे उठने की संभावना है।

इतना तय है कि ट्रेड, वीजा और पेरिस करार पर मतभेदों के बावजूद दोनों देश आपसी रिश्ते मजबूत करने व निवेश और सामरिक कूटनीति के मोर्चे पर बड़े समझौते को अंजाम देने में सफल होंगे।

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