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नरेंद्र सिंह तोमर का लेख : आत्मनिर्भरता की राह में मील का पत्थर

स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए इस बजट में किए गए प्रावधानों से इंगित होता है कि अब हम दुनिया की सबसे बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की ओर अग्रसर हैं। कोविड-19 के वैक्सीन में हमारी आत्मनिर्भरता ने जो आत्मविश्वास भरा है, वह गांव-गांव तक स्वास्थ्य की बुनियादी सुविधाओं को पहुंचाकर कई गुना बढ़ना सुनिश्चित है। इस बार के बजट में सरकार की नजर कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने व गांव, गरीब और किसान के कल्याण पर है। बजट आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की राह है, इस राह पर चल कर देश प्रगति के मंजिल तक पहुंचेगा।

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नरेंद्र सिंह तोमर

नरेंद्र सिंह तोमर

कोरोना संकटकाल के दौर से निकलकर विकास की नई गाथा लिखने को तैयार हमारे राष्ट्र के लिए वर्ष 2021-21 का केंद्रीय बजट बड़े बदलाव और आत्मनिभर्रता राह में मील का पत्थर साबित होगा। असाधारण परिस्थितियों में आया यह बजट सर्वस्पर्शी, सर्व-समावेशी और देश के जन-जन के सर्वांगीण कल्याण का एक ब्ल्यू प्रिंट है। स्वयं प्रधानमंत्री जी ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि इस बजट में यथार्थ का एहसास और विकास का विश्वास है। गांव, गरीब और किसान की चिंता मोदी सरकार की पहली प्राथमिकता रही है और यही भाव वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस बजट में भी पूर्ण रूप से परिलक्षित होती है।

स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए इस बजट में किए गए प्रावधानों से इंगित होता है कि अब हम दुनिया की सबसे बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की ओर अग्रसर हैं। कोविड-19 के वैक्सीन में हमारी आत्मनिर्भरता ने जो आत्मविश्वास भरा है, वह गांव-गांव तक स्वास्थ्य की बुनियादी सुविधाओं को पहुंचाकर कई गुना बढ़ना सुनिश्चित है। स्वास्थ्य का बजट इस बार 137 फीसदी बढ़ाया गया है। वित्त वर्ष 2021-22 में हेल्थ सेक्टर में 2,23,846 करोड़ रुपये का व्यय रखा गया है जबकि 2020-21 में यह 94,452 करोड़ रुपये था। स्वास्थ्य में हम तीन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं- निवारक, उपचारात्मक और सुधारात्मक। कोविड-19 टीकाकरण के लिए 35 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान करके यह सुनिश्चित किया गया है कि देश के हर जरूरतमंद नागरिक तक वैक्सीन पहुंचे। चाहे प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वास्थ्य भारत योजना के लिए 6 वर्ष में 64,180 करोड़ रुपये व्यय करने का विषय हो अथवा 17,788 ग्रामीण और 11 हजार शहरी स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र स्थापित करने का प्रावधान हो, हमारी सरकार स्वस्थ भारत के माध्यम से सशक्त भारत के निर्माण के लिए कटिबद्धता नजर आती है।

कृषि केंद्र की प्राथमिकता में

कोराना संकट काल में जब देश-दुनिया की अर्थव्यस्था लड़खड़ा गई थी तब देश का किसान ही सीना तान कर खड़ा रहा। किसानों के परिश्रम और भारत सरकार द्वारा कोविड काल में किसानों को कृषि कार्य में उपलब्ध कराई गई रियायतों-सुविधाओं का ही परिणाम रहा कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था ने देश को बड़ा संबल प्रदान किया। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास के लिए लगभग पौने दो लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज भी कृषि क्षेत्र में निजी निवेश के साथ ही समृद्धि लाने वाला है। वर्ष 2021-22 का बजट भी इसी श्रृखंला में एक नया अध्याय है। वित्तमंत्री ने अपने बजट भाषण में किसानों को एमएसपी के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को पुनःस्पष्ट किया है। स्वामीनाथन कमेटी की अनुशंसाओं के अनुसार लागत मूल्य से डेढ़ गुना एमएसपी प्रदान करने की सरकार की नई व्यवस्था बताती है कि हमारी सरकार किसानों को उनकी उपज के लाभकारी मूल्य दिलाने एवं खेती को मुनाफे का कार्य बनाने का कार्य कर रहे हैं। किसानों को पर्याप्त ऋण सुलभ कराने के लिए सरकार ने बजट में ऋण लक्ष्य को बढ़ा कर 16.5 लाख करोड़ कर दिया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में यह रकम 15 लाख करोड़ रुपये थी। कृषि के साथ-साथ इससे जुड़े क्षेत्र पशुपालन, डेयरी, मात्स्यिकी में भी हितग्राहियों को अधिक ऋण उपलब्ध करा कर उन्हें वित्तीय सहायता पहुंचाना सरकार का लक्ष्य है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013-14 में किसानों को ऋण उपलब्ध कराने के लिए सिर्फ सवा 7 लाख करोड़ रु. की धनराशि का प्रावधान किया गया था।

कृषि मंडियों का सशक्तिकरण

सरकार कृषि मंडियों (एपीएमसी) के सशक्तिकरण करने की दिशा में भी अग्रसर है। अभी देश में ई-नाम मंडियों के माध्यम से लगभग 1.68 करोड़ किसानों को पंजीकृत किया गया और 1.14 लाख करोड़ रुपये मूल्य का व्यापार किया गया है। एक हजार और मंडियों में पारदर्शिता, कामकाज में सुगमता लाने के लिए आगामी वर्ष में ई-नाम से जोड़ने का प्रावधान इस बजट में किया गया है। इसके साथ ही आत्मनिर्भर भारत पैकेज के अंतर्गत एक लाख करोड़ रुपये के कृषि अवंसरचना कोष से मिलने वाली सुविधा के लिए अब मंडियों को भी दायरे में लिया गयास है। इससे मंडियों में भी अत्याधुनिक एवं संसाधन युक्त अधोसंरचनाएं विकसित हो सकेंगी और वे भी कृषि क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले पाएंगी।

सिंचाई पर भी ध्यान

प्रधानमंत्री ने कृषि सिंचाई में जल संरक्षण के साथ ही अधिक उपज लेने के लिए प्रति बूंद-अधिक फसल (पर ड्रॉप मोर क्रॉप) का मूल मंत्र दिया है। माइक्रो इरिगेशन के माध्यम से हम उन्नत कृषि एवं जल की मितव्ययता की दिशा में कार्य कर रहे हैं। नाबार्ड के तहत स्थापित 5 हजार करोड़ के माइक्रो इरिगेशन फंड को दो गुना करते हुए इस बजट में दस हजार करोड़ का करने का प्रावधान किया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए भी सरकार ने 4000 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया है।

निर्यात को बढ़ावा

कृषि और संबद्ध उत्पादों के मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने और उसके निर्यात को बढ़ाने के लिए सरकार ऑपरेशन ग्रीन्स योजना संचालित कर रही है। अब तक इस योजना में केवल टमाटर, प्याज और आलू को की शामिल किया गया था। वर्ष 2021-22 के बजट में इसका दायरा बढ़ाकर जल्द खराब होने वाले 22 उत्पादों को शामिल करने का प्रावधान किया गया है। सरकार के इस प्रयास से बागवानी को तो बढ़ावा मिलेगा ही, किसान भाई परंपरागत कृषि छोड़ फल सब्जियों की खेती की ओर अग्रसर हो सकेंगे। वर्ष 2021-22 के बजट में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का बजट बढ़ा कर 16 हजार करोड़ रुपये किया गया है। यद्यपि फसल बीमा योजना को एच्छिक रखा गया है, किंतु हमारा ध्येय है कि अधिक से अधिक किसान अपनी फसल का बीमा करवाएं ताकि आपदा की घड़ी में फसल बीमा का कवर उनके लिए एक छत्र की तरह काम करे।

कृषक उत्पादक संगठन

यह एक स्थापित तथ्य है कि छोटे और मझौले किसानों को न तो उन्नत कृषि का लाभ मिल पाता है ना ही वे मूल्य संवर्धन के माध्यम से अपने उत्पादों के बेहतर लाभ प्राप्त कर पाते हैं। छोटे किसानों को इसका लाभ दिलाने के लिए सरकार देश में 10 हजार कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की स्थापना का कार्य कर रही है। 2021-22 के बजट में एफपीओ निर्माण और उनके संवर्धन के लिए 700 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया है।

स्वामित्व योजना

हमारा अटूट मत है कि समृद्ध देश की आधारशिला तभी रखी जा सकती है जबकि गांव समृद्ध और आत्मनिर्भर हो। आजादी के सात दशक बाद भी हमारे साढे़ 6 लाख गांवों में रहने वाले ग्रामीणों के पास उनके घरों का कोई मालिकाना हक नहीं था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने इस वर्ष स्वामित्व योजना प्रारंभ की है। जो कि अब तक छह राज्यों में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित थी। इस योजना के तहत अब तक 1241 गांवों के लगगभ 1.80 लाख ग्रामीण परिवारों को उनके मकान के अधिकार अभिलेख दिए जा चुके हैं। स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के लिए बजट में 200 करोड़ रु. की धनराशि का प्रावधान किया गया है। गांवों में अधोसंचरनाओं के निर्माण के लिए निर्मित ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष में अब तक 30 हजार करोड़ रुपए की धनराशि का प्रावधान था, इस बजट में इसे बढ़ाकर 40 हजार करोड़ रुपये कर दिया गया है।

मनरेगा का बजट बढ़ा

सरकार ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के बजट में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। वर्ष 2020-21 में ग्रामीण विकास मंत्रालय के लिए 132398.43 करोड़ रु. (122398.43 करोड़ रु.बजट प्रावधान और 10000 करोड़ रु. का गैर बजटीय प्रावधान) का प्रावधान किया गया था। 2021-22 में इसे बढ़ाकर 151556.50 करोड़ रुपये (133689.50 करोड़ रु. बजट प्रावधान और 17867 करोड़ रुपये का गैर बजटीय प्रावधान) किया गया है। यह विगत वर्ष से 14.47% ज्यादा है। मनरेगा के लिए वर्ष 2021-22 में 73 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है, जबकि 2020-21 में इसके लिए 61500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। कोविड महामारी के कारण प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के लिए अतिरिक्त 50000 करोड़ रु. का अतिरिक्त प्रावधान विगत वर्ष किया गया था।

आजीविका मिशन

ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं में आजीविका बढ़ाने एवं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार ने इस बार विशेष प्रावधान किए हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के लिए इस वर्ष 13677.61 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, जबकि वर्ष 2020-21 में इसके लिए 9210.04 करोड़ रुपये रखे गए थे। यह 48% ज्यादा है।

पीएमएवाई

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत 2022 तक सभी को आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य के लिए वर्ष 2021-22 में 37367 करोड़ रु. ( 19500 करोड़ रु. बजटीय प्रावधान और 17867 करोड़ का गैर बजटीय प्रावधान) का प्रावधान किया गया है। जबकि वर्ष 2020-21 में 29500 करोड़ रु. ( 19500 करोड़ रु. बजटीय प्रावधान और 10000 करोड़ का गैर बजटीय प्रावधान) का प्रावधान किया गया था। यह 26.66% ज्यादा है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बूस्टर डोज

यह बजट एक तरह से कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बूस्टर डोज़ प्रदान करने वाला है। एक तरह सरकार की नजर कृषि एवं ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को रफ्तार देने की है तो वहीं दूसरी तरफ हमारा ध्येय गांव, गरीब और किसान का कल्याण भी है। सरकार के इस समन्वित प्रयास के सकारात्मक परिणाम आगामी वर्ष में हमें देखने को मिलेंगे। यह बजट हमारी राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की राह के रूप में सामने आया है, इस राह पर चल कर देश का हर नागरिक प्रगति उस मंजिल तक पहुंचेगा जहां स्वस्थ, संपन्न और सशक्त समाज का निर्माण होता है।

(लेखक केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास पंचायती राज और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हैं।)

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