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प्रवासी हिंसा के जिम्मेदारों को बेनकाब करना जरूरी

अलग-अलग मौकों पर प्रवासियों के साथ मारपीट व हिंसा दुखद है। गुजरात में प्रवासी कामगारों के साथ जो कुछ भी हो रहा है, वह निंदनीय है। इससे पहले असम, बेंगलुरु, मुंबई में भी अप्रवासी बिहारियों के साथ बदसलूकी हुई है। भारतीय समाज में ‘बाहरी'' की कभी कोई अवधारणा नहीं रही है।

प्रवासी हिंसा के जिम्मेदारों को बेनकाब करना जरूरी

अलग-अलग मौकों पर प्रवासियों के साथ मारपीट व हिंसा दुखद है। गुजरात में प्रवासी कामगारों के साथ जो कुछ भी हो रहा है, वह निंदनीय है। इससे पहले असम, बेंगलुरु, मुंबई में भी अप्रवासी बिहारियों के साथ बदसलूकी हुई है। भारतीय समाज में ‘बाहरी' की कभी कोई अवधारणा नहीं रही है। हमारा समाज समावेशी रहा है, हालांकि हाल के वर्षों क्षेत्रवाद की राजनीति मुखर होने से प्रवासियों के प्रति वैमनष्यता बढ़ी है।

गुजरात में बीते 28 सितंबर को एक बच्ची के साथ बलात्कार बहुत ही घृणित है। इसके दोषी को कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए। अभी केस में आरोपित बिहार के एक युवक को गिरफ्तार किया गया है। आरोपित युवक दोषी है या नहीं, यह पुलिस जांच के बाद अदालत फैसला करेगी, लेकिन इस अपराध के कारण सभी बिहारी व यूपी के प्रवासी कामगारों को अपराधी मान लेना सही नहीं है।

जैसे एक आतंकी के पकड़े जाने के चलते समस्त मुस्लिम समुदाय को आतंकी मान लेना जायज नहीं है, ठीक ऐसे ही किसी प्रदेश के एक व्यक्ति के आरोपित होने पर उस प्रदेश के सभी लोगों को अपराधी समझना उचित नहीं है। किसी के अपराधी होने का उसके क्षेत्र, जाति, धर्म, प्रदेश से कोई संबंध नहीं होता है। अपराधी केवल अपराधी होता है। क्या गुजरात में रहने वाले स्थानीय लोगों में से कोई अपराधी नहीं है?

आज अगर इस रेपकांड में कोई गुजराती आरोपित होता तो तब क्या सभी गुजरातियों के साथ अपराधी जैसा सलूक किया जाता? गुजरात में ही प्रवासी मजदूर आज नए-नए तो काम नहीं कर रहे हैं, दशकों से काम कर रहे हैं। गुजरात के विकास में प्रवासियों की अहम भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। आज गुजरात के भी हजारों लोग दूसरे प्रदेश में काम कर रहे हैं।

आज देश की अर्थव्यवस्था ऐसी है, जिसमें सभी प्रदेशों के लोगों को एक से दूसरे प्रदेश में जाकर काम करना पड़ता है। यह एक-दूसरे के समाज व संस्कृति को समझने का अवसर भी प्रदान करता है। गुजरात से हजारों प्रवासियों के स्वप्रदेश लौटने से वहां की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। हालांकि गुजरात सरकार ने कहा है कि प्रवासियों की वापसी दशहरा-दिवाली- छठ पर्व के चलते हो रही है,

लेकिन इस पलायन को लेकर यही कहा जा रहा है कि कांग्रेस विधायक अल्पेश ठाकोर के संगठन ठाकोर सेना के कार्यकर्ताओं द्वारा बिहार व यूपी के प्रवासियों के साथ मारपीट व हिसा किए जाने के चलते हो रहा है। अल्पेश ठाकोर ने सफाई जरूर दी है कि वह हिंसा का समर्थन नहीं करते हैं, लेकिन गुजरात में प्रवासियों के साथ हिंसा हुई है, इसे झुठलाया नहीं जा सकता है।

ठाकोर सेना गुजरात का ही नुकसान कर रही है। प्रवासियों पर राजनीति करना खतरनाक प्रवृत्ति है। इससे देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंच सकता है। महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, झारखंड, दिल्ली, हैदराबाद, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई आदि जगहों पर प्रवासियों के दम पर ही अर्थव्यवस्था फल-फूल रही है। क्षेत्रवाद की राजनीति के चलते ही समाज व प्रदेश में विभाजन बढ़ा है। इस तरह की राजनीति के पीछे कौन लोग हैं, उन्हें बेनकाब करना जरूरी है।

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