Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस: भगवा आतंक के पैंतरे पर घिर गई कांग्रेस

आतंकवाद को लेकर भारत की जंग और नीयत पर पड़ौसी देश पाकिस्तान सहित कई दूसरे देशों ने भी प्रश्न खड़े करने शुरू कर दिए थे।

मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस:  भगवा आतंक के पैंतरे पर घिर गई कांग्रेस
X

ग्यारह साल पहले हैदराबाद की जानी-मानी मक्का मस्जिद में हुए विस्फोट मामले में सोमवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी की विशेष अदालत द्वारा स्वामी असीमानंद सहित पांच आरोपियों को बरी किए जाने के बाद तत्कालीन यूपीए सरकार की भारत में भगवा आतंकवाद की थ्येरी गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। उस समय के गृह मंत्री पी चिदंबरम ने एक कार्यक्रम में जब भगवा आतंकवाद के खतरे की बात कही थी, तब कांग्रेस के भीतर ही इसे लेकर तीखे मतभेद महसूस किए गए थे।

उस वक्त सोनिया गांधी के करीबी माने जाने वाले जर्नादन द्विवेदी ने यह कहते हुए चिदंबरम को सचेत किया था कि आतंकवाद आतंकवाद होता है। उसका कोई न भगवा रंग होता है और न हरा रंग। लेकिन असीमानंद सहित कई लोगों को पुलिस और सीबीआई ने इस मामले में न केवल अंदर कर दिया बल्कि उन पर कथित आरोपियों को टार्चर कर बम विस्फोट में हाथ होने की बात जोर-जबरदस्ती कबूलवाने के आरोप भी लगे।

मई 2007 में हुए उस विस्फोट में नौ लोग मारे गए थे, जबकि 58 अन्य घायल हो गए थे। कुछ लोग विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई में भी मारे गए थे। केन्द्र में डा. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार थी और आतंकवाद सहित कई मुद्दों पर कांग्रेस के भीतर तीखे मतभेद जब-तब उभरते हुए देखे जा रहे थे। पी चिंदंबरम, सलमान खुर्शीद और दिग्विजय सिंह से लेकर कुछ और नेता आतंकवाद की घटनाओं पर विवादास्पद बयानबाजी के लिए खासे चर्चा में रहते थे।

बटाला हाउस मुठभेड़ कांड पर भी सलमान खुर्शीद और दिग्विजय सिंह का दृष्टिकोण अपनी ही सरकार के गृहमंत्री चिदंबरम के खिलाफ था परंतु मक्का मस्जिद और समझौता एक्सप्रेस बम विस्फोट को लेकर ये सब एक राय दिखाई देते थे। जिस तरह कांग्रेस का एक धड़ा भगवा आतंकवाद का राग अलाप रहा था और आरएसएस पर पाबंदी के संकेत देने लगा था, उससे कई तरह के सवाल खड़े हो रहे थे।

आतंकवाद को लेकर भारत की जंग और नीयत पर पड़ौसी देश पाकिस्तान सहित कई दूसरे देशों ने भी प्रश्न खड़े करने शुरू कर दिए थे। पहली बार भारत को पड़ौसी से खरी-खोटी सुनने को मिल रही थी। सीमा पार से प्रमुखता से बार-बार यह मांग उठने लगी थी कि भारत सरकार पहले समझौता एक्सप्रेस बम विस्फोटों और मक्का मस्जिद बम ब्लास्ट के दोषी हिंदू आतंकवादियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करे।

पी चंदंबरम की भगवा आतंकवाद की थ्येरी से बैठे बिठाए उस पार से होने वाले खून खराबे के लिए जैसे वहां की सेना, आईएसआई और उग्रपंथी जमातों को लाइसैंस मिल गया था। कई वैश्विक मंचों पर भारत को इसके चलते असहज स्थितियों का सामना तक करना पड़ा था। अब एनआईए कोर्ट के इस फैसले से साफ हो गया है कि चिदंबरम की वह थ्येरी पूरी तरह आधारहीन थी।

ऐसा लगता है कि बिना सोचे-विचारे अल्पसंख्यक वोटों को लुभाने की मंशा से वह गिरफ्तारियां कराई गई थी, क्योंकि लंबी सुनवाई और दो सौ से अधिक गवाहियों के बावजूद जांच एजेंसियां यह सिद्ध नहीं कर सकीं कि स्वामी असीमानंद और बाकी आरोपियों की मक्का मस्जिद बम विस्फोटों में किसी भी तरह की कोई भूमिका थी। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस गुजरात के बाद अब कर्नाटक में हिंदू मतदाताओं पर डोरे डालने की कवायद में लगी है।

राहुल गांधी गुजरात की तरह कर्नाटक में भी मंदिरों और मठों की परिक्रमा लगा रहे हैं। इस फैसले के बाद अब निश्चित तौर पर कर्नाटक के चुनाव अभियान में विरोधी दल, खासकर भाजपा की ओर से उसकी कुछ समय पहले तक की तुष्टिकरण नीति को लेकर सवाल उठाए जाएंगे और राहुल गांधी को उसके जवाब देने होंगे। जाहिर है, कांग्रेस इसे लेकर गहरे दबाव में आ गई है।

हालांकि गुलाम नबी आजाद के बयान से लग रहा है कि जो अंतर्विरोध उस समय थे, वही कांग्रेस के भीतर आज भी हैं। और यही इस पार्टी के राजनीतिक संकट की मूल वजह है।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story