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मौसम की जानकारी : वर्षा चक्र में सुधार के लिए पर्यावरण संरक्षण जरूरी

मानसून का इंतजार समूचा देश कर रहा है, लेकिन प्री-मानसून बारिश में रिकार्ड कमी के चलते देशभर में प्रचंड गर्मी का प्रकोप बढ़ गया है। देश के अधिकांश हिस्से हीटवेव की चपेट में हैं। अत्यधिक गर्मी व लू के चलते अब तक 30 लोगों की मौत हो गई है। करोड़ों लोग बेहाल हैं। मौसम विभाग के मुताबिक इस वर्ष 65 साल में दूसरा सबसे बड़ा प्री-मानसून सूखा पड़ा है।

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मानसून का इंतजार समूचा देश कर रहा है, लेकिन प्री-मानसून बारिश में रिकार्ड कमी के चलते देशभर में प्रचंड गर्मी का प्रकोप बढ़ गया है। देश के अधिकांश हिस्से हीटवेव की चपेट में हैं। अत्यधिक गर्मी व लू के चलते अब तक 30 लोगों की मौत हो गई है। करोड़ों लोग बेहाल हैं। मौसम विभाग के मुताबिक इस वर्ष 65 साल में दूसरा सबसे बड़ा प्री-मानसून सूखा पड़ा है।

1954 के बाद से ऐसा दूसरी बार हुआ है, जब प्री-मॉनसून में इतनी कम वर्षा हुई हो। तब देश में 93.9 मिलीमीटर बारिश रेकॉर्ड की गई थी। इसके बाद 2009 में मार्च, अप्रैल और मई के दौरान 99 मिलीमीटर बारिश हुई थी। फिर 2012 में यह आंकड़ा 90.5 मिलीमीटर का था और अब 2019 में 99 मिलीमीटर बारिश हुई है।

महाराष्ट्र के मध्य क्षेत्र, मराठवाड़ा और विदर्भ इलाके में सबसे कम औसत वर्षा हुई है। कोंकण-गोवा, गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ इलाके में भी यही स्थिति है। तटीय कर्नाटक, तमिलनाडु और पुदुचेरी जैसे इलाकों में भी प्री-मॉनसून बारिश कम हुई।

जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम उत्तर प्रदेश, उत्तर कर्नाटक, तेलंगाना और रायलसीमा में भी कम वर्षा हुई है। अभी राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, जम्मू, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा आदि राज्यों में भीषण गर्मी व लू पड़ रही है।

मौसम विभाग ने कहा है कि शोध के मुताबिक पिछली सदी में पश्चिमी भारत में प्री-मॉनसून बारिश में काफी तेजी से गिरावट आई है। खासतौर पर महाराष्ट्र में यह समस्या और बढ़ी है। हालांकि अब तक पूरे देश में इस तरह का ट्रेंड देखने को नहीं मिला है। यह एक तरह से मॉनसून सीजन में बदलाव का पैटर्न है।

मौसम विभाग की मानें तो असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम समेत समूचे पूर्वोत्तर भारत में बारिश से जल्द राहत मिलने की संभावना है, लेकिन उत्तर भारत को अभी कुछ औऱ दिनों तक मौसम से राहत नहीं मिलने वाली है।

दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार और अन्य राज्यों में अभी दो से 4 दिनों तक भीषण गर्मी पड़ने वाली है। इन राज्यों में लू के थपेड़े भी झेलने पड़ेंगे। गत शनिवार को पश्चिमी राजस्थान में पारा 51 डिग्री के करीब था, तो उत्तर प्रदेश के बांदा में यह 48 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया।

यहां तक कि अपेक्षाकृत ठंडे माने जाने वाले जम्मू का तापमान भी 44 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया था। यह सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक था। राजस्थान में अगले दो दिनों में तापमान 52 से 53 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

मौसम विभाग ने पहले अनुमान लगाया था कि मानसून 1 से 3 जून के बीच आएगा, पर अब विभाग ने कहा है कि केरल में 6 जून को मानसून दस्तक देगा। यानी मानसून देरी से आएगा। मॉनसून आने के शुरुआती 10 दिनों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है।

दरअसल, देश में मानसून केरल से ही शुरू होता है, फिर 15-20 दिन में पूरे देश में फैलता है। यह संकेत है कि इस बार मानसून की देरी खरीफ फसल पर भारी पड़ेगी। देश भर में धान की बुआई पर असर पड़ेगा। अभी हमारी 60 फीसदी खेती सिंचाई के लिए प्राकृतिक वर्षा पर ही निर्भर है।

गर्मी बढ़ने से स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। प्री-मानसून कम वर्षा और देरी से मानसून जलवायु परिवर्तन के संकेत दे रहे हैं। क्लाइमेट चेंज के वैश्विक तापमान तेजी से बढ़ रहा है। यह विश्व के लिए ठीक नहीं है। ग्लेशियर के पिघलने का खतरा है।

मानसून के जोर पकड़ने के लिए यह जरूरी है कि पश्चिमी हवाएं दक्षिण पूर्व अरब सागर में डिवेलप हों जो अभी तक नहीं हो रहा है। भूगर्भ जलस्तर, कृषि और क्लाइमेट के लिए जरूरी है कि सभी स्तर पर पर्याप्त वर्षा हो।

हमें अपने पर्यावरण के संरक्षण पर अत्यधिक ध्यान देना चाहिए, ताकि भविष्य में वर्षा चक्र प्रभावित न हो। आगे 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस है, इस मौके पर विश्व स्तर पर पर्यावरण में सुधार लाने का संकल्प लिया जाना चाहिए।

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