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प्रभात कुमार रॉय का लेख : समुद्री सुरक्षा बने वैश्विक एजेंडा

समुद्रों पर आतंकवादियों और लुटेरों के कारनामे विश्व के समक्ष नई चुनौतियां प्रस्तुत कर रहे हैं। समुद्री रास्तों से हथियारों, नशीले पदार्थों और मानवों तस्करी, संगठित अपराधों के रूप में एक बड़ी सामुद्रिक सुरक्षा चुनौती रही है। वर्ष 2020 की वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक महामारी कोविड 19 के दौरान भी मादक द्रव्यों की तस्करी अनवरत रूप से जारी रही। समुद्री जलमार्गों की कड़ी सुरक्षा वस्तुतः अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अति आवश्यक शर्त है। अतः अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुचारू तौर पर संचालित बनाए रखने के लिए आतंकवादियों और समुद्री लुटेरों के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय कानूनों को अत्यंत कठोरता के साथ लागू करना होगा।

प्रभात कुमार रॉय का लेख : समुद्री सुरक्षा बने वैश्विक एजेंडा
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प्रभात कुमार रॉय 

प्रभात कुमार रॉय

अगस्त में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता भारत कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता करते हुए समुद्री सुरक्षा और वैश्विक आतंकवाद के ज्वलंत प्रश्न को केंद्र में रखकर भारत ने एक महत्वपूर्ण परिचर्चा बैठक की। यूं तो पहले भी समुद्री सुरक्षा और वैश्विक आतंकवाद के विकट प्रश्नों पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अनेक प्रस्ताव पारित कर चुकी है, किंतु सुरक्षा परिषद के इतिहास में यह प्रथम अवसर है, जब भारत के नेतृत्व में सुरक्षा परिषद ने समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के जटिल प्रश्न के निदान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। समुद्री सुरक्षा और वैश्विक आतंकवाद प्रश्नों पर प्रमुख तौर पर केंद्रित रही सुरक्षा परिषद की खुली परिचर्चा बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समस्त विश्व को संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के सामुद्रिक सुरक्षा दृष्टिकोण के पांच प्रमुख सिद्धांत पेश किए। अपने सारगर्भित संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक आतंकवाद को विस्तार देने के लिए और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाकर लूटमार करने के लिए समुद्रों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विश्वव्यापी समुद्र समस्त विश्व की साझा धरोहर है, अतः इस सामुद्रिक साझा धरोहर की हिफाजत करने के लिए दुनिया के देशों को प्रबल तौर पर परस्पर सहयोग स्थापित करना होगा। प्रत्येक देश द्वारा दूसरे देशों के नाविकों को सम्मान और व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए. विश्व को सामुद्रिक व्यापार में अवरोध उत्पन्न करने वाले समस्त व्यवधानों को निरस्त कर देना चाहिए। विभिन्न देशों के मध्य उत्पन्न सामुद्रिक विवादों का निदान शांतिपूर्ण बातचीत द्वारा किया जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि भारत ने बांग्लादेश के साथ बातचीत से अपने सामुद्रिक विवाद को निपटा लिया है। समुद्री सुरक्षा के लिए भारत की नौसेना वर्ष 2008 से ही सामुद्रिक व्यापार मार्गों पर लूटपाट रोकने के लिए निरंतर गश्त करती रही है। उल्लेखनीय है कि विश्व पटल पर साठ फीसदी व्यापार समुद्री मार्गों से ही किया जाता है। भारत का तो 90 फीसदी व्यापार समुद्री मार्गों से किया जाता है। समुद्री सुरक्षा पर भारत के वैश्विक नजरिए को नरेंद्र मोदी ने बखूबी बयान किया है। नरेंद्र मोदी ने वैश्विक आतंकवाद को समुद्री सुरक्षा से बाकायदा जोड़ते हुए, उसके विरुद्ध विश्वव्यापी संग्राम करने का पैगाम समूची दुनिया को दिया। समस्त विश्व को इंटरनेट के माध्यम से जोड़ने में समुद्रों की विशिष्ट भूमिका रही है। समुद्रों पर काबिज लुटेरे और आतंकवादी इंटरनेट व्यवस्था को भी तहस-नहस कर सकते हैं। समस्त विश्व को एकजुट होकर आतंकवादियों और सामुद्रिक लुटेरों का जल्द से जल्द सफाया कर देना चाहिए। समुद्रों पर आतंकवादियों और लुटेरों के कारनामे विश्व के समक्ष नई चुनौतियां प्रस्तुत कर रहे हैं। समुद्री रास्तों से हथियारों, नशीले पदार्थों और मानवों तस्करी, संगठित अपराधों के रूप में एक बड़ी सामुद्रिक सुरक्षा चुनौती रही है। वर्ष 2020 की वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक महामारी कोविड 19 के दौरान भी मादक द्रव्यों की तस्करी अनवरत रूप से जारी रही। लॉकडाउन के कारण स्थलीय सीमाओं पर होने वाला आवागमन प्रायः प्रतिबंधित रहा, किंतु कोविड 19 के हालात में भी मादक द्रव्यों और मानव तस्करी समुद्री मार्गों से जारी रखी गई। अरब सागर के समस्त इलाकों में सोमालियाई लुटेरों से व्यापारिक जहाज़ों को सदैव खतरा बना रहता है।

कोलाराडो स्थित वन अर्थ फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक समुद्री डकैतियों के कारण दुनियाभर के मुल्कों को सालाना करीब 12 अरब डॉलर का खर्च करना पड़ता है। इस रकम में सुमद्री लुटेरों को दी जाने वाली फिरौतियां, जहाजों का रास्ता बदलने के कारण हुआ खर्च, समुद्री लुटेरों से लड़ने के लिए अनेक देशों द्वारा नौसेना की तैनातियां का खर्च इस में शामिल हैं। महानगर मुंबई पर आतंकवादी हमला करने के लिए पाक़ प्रेरित और पोषित जेहादियों ने समुद्री मार्ग का इस्तेमाल किया था। दुनिया की साझा धरोहर समुद्र के प्रमुख विषय में निर्मित किए गए अंतरराष्ट्रीय कानून को चीन जैसा विस्तारवादी देश चुनौती पेश करता रहा है। दक्षिण चीन सागर में चीन के आधिपत्यवादी आक्रमक आचरण के विरुद्ध फिलीपीन द्वारा दायर की गई याचिका पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का निर्णय आ चुका है। इस निर्णय को स्वीकार करने से चीन ने स्पष्ट तौर पर इनकार कर दिया है। चीन के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के निर्णय को लागू करने के लिए सुरक्षा परिषद को कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए, क्योंकि चीन सुरक्षा परिषद का एक स्थायी सदस्य है, अतः चीन सुरक्षा परिषद के किसी भी प्रस्ताव को वीटो कर सकता है।

इसी कारण चीन के विस्तारवाद के विरुद्ध सुरक्षा परिषद कोई कार्यवाही नहीं कर सकती। विश्वशांति के लिए संयुक्त राष्ट्र के वर्तमान ढांचे में बुनियादी सुधारों की दरकार बनी हुई है। किसी क्षेत्र में विद्यमान सागर नाम किसी देश के नाम के साथ संबद्ध होने के कारण उस सागर पर उस देश का अधिकार स्वतः स्थापित नहीं हो जाता। समस्त हिंद महासागर पर भारत का कदाचित अधिकार कदाचित स्थापित नहीं हो सकता है, जैसा कि चीन का कोई कानूनी अधिकार दक्षिण चीन सागर पर स्थापित नहीं हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी समुद्र के केवल उतने ही हिस्से तक किसी देश का अधिकार स्वीकार किया गया है, जहां तक कि उसकी जमीन से तोप का गोला फेंका जा सकता है। समुद्र वस्तुतः खनिज संपदाओं, तेल और गैस आदि से परिपूर्ण हैं, अतः साम्राज्यवादी और विस्तारवादी फितरत के अनेक देश समुद्र पर अपना आधिपत्य स्थापित करने की फिराक में जुटे हुए हैं। सर्वविदित है कि हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र में स्िट्रंग ऑफ पर्ल्स की कुटिल रणनीति के तहत चीन द्वारा भारत को चारो तरफ घेर लेने की कोशिशों को निरंतर जारी रखा गया है। चीन द्वारा भारत की सरहदों के निकट निर्मित किए जा रहे बंदरगाहों ने समुद्र में भी तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न कर दी है। इस सामुद्रिक तनाव के कारण निकट भविष्य में भारत के लिए स्वतंत्र तौर पर नौवाहन अंजाम देना चुनौतीपूर्ण सिद्ध हो सकता है। थल की तरह जल में भी भारत और चीन का सैन्य टकराव संभव हो सकता है। दक्षिण चीन सागर में चीन की चुनौती से निपटने के लिए आस्ट्रेलिया, अमेरिका भारत और जापान द्वारा क्वाडिलेटरल डॉयलॉग (क्वाड) के प्रारूप में एक रणनीतिक मोर्चा गठित किया गया है। समुद्री जलमार्गों की कड़ी सुरक्षा वस्तुतः अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अति आवश्यक शर्त है। अतः अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुचारू तौर पर संचालित बनाए रखने के लिए आतंकवादियों और समुद्री लुटेरों के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय कानूनों को अत्यंत कठोरता के साथ लागू करना होगा। विश्व के समस्त देशों के मध्य सूचनाओं के आदान-प्रदान को बहुत बेहतर ढंग से लागू करना होगा।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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