Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

ब्रिटेन में हुए हमले से उठे गंभीर सवाल

युक्त राजशाही ब्रिटेन में यह कोई पहला आतंकवादी हमला नहीं है।

ब्रिटेन में हुए हमले से उठे गंभीर सवाल

युक्त राजशाही ब्रिटेन में यह कोई पहला आतंकवादी हमला नहीं है। 1974 से वहां हमले हो रहे हैं। शुरुआत आयरिश रिपब्लिकन आर्मी (आईआरए) ने की थी। मकसद था आयरलैंड की आजादी। आईआरए अभी भी सक्रिय है।

कुछ ही साल पहले उसके आतंकियों ने दो ब्रिटिश सैनिकों की हत्या कर उनके हथियार छीन लिये थे। आईआरए के अलावा ब्रिटेन और दूसरे यूरोपीय देश इस्लामिक स्टेट (आईएस) और अलकायदा से लेकर दूसरे आतंकवादी संगठनों के निशाने पर भी रहे हैं।

2005 के उस हमले को कौन भूल सकता है, जब पूरा लंदन धमाकों से दहल उठा था। आतंकियों ने तीन ट्यूब रूट्स (भूमिगत मेट्रो) को तो निशाना बनाया ही था। डबल डेकर बस और दूसरी जगहों पर भी धमाके किए थे।

इंग्लिश पुलिस और दूसरी सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों को दुनिया की श्रेष्ठ पुलिस और एजेंसियों में माना जाता है। फिर वह इस तरह की वारदातों को रोक पाने में सफल क्यों नहीं हो पा रही है? उसके आतंक से निपटने के लिए विशेष तैयारियों, प्रशिक्षण और गोपनीय सूचनाएं एकत्र करने के दावे क्यों खोखले साबित होते नजर आ रहे हैं?

मैनचेस्टर शहर के जिस स्टेडियम में एक अमेरिकी पॉप स्टार के कन्सर्ट के दौरान हुए धमाके क्या सिद्ध करते हैं? यूरोप के इस सबसे बड़े अरीना की क्षमता पच्चीस हजार बताई जाती है। यहां आए दिन बड़े खेल, संगीत और दूसरी तरह के आयोजन होते ही रहते हैं।

इस समय जिस तरह का माहौल है। जिस तरह की वारदातें अतीत में ब्रिटेन में होती रही हैं। जैसे हमले फ्रांस से लेकर जर्मनी तक में हुए हैं, उसके मद्देनजर क्या संयुक्त राजशाही पुलिस और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों की वैसी तैयारियां थीं, जिसकी ऐसे आयोजनों के समय अपेक्षा रहती है?

पच्चीस हजार की भीड़ में कम उम्र के नौजवान, बच्चे और बच्चियां ज्यादा संख्या में थे, क्योंकि जिस अमेरिकी गायिका आरियाना ग्रांडे का यह शो था, उसकी दीवानगी बच्चों और नौजवानों में ज्यादा है। बच्चों के माता-पिता भी साथ आए थे।

बहुत से माता-पिता स्टेडियम के बाहर शो खत्म होने का इंतजार कर रहे थे। ऐसे में इतनी बड़ी सुरक्षा चूक गंभीर सवाल खड़े करती है। ब्रिटिश, फ्रांस और जर्मनी जैसे विकसित देशों की पुलिस भी अगर इस तरह के धमाके रोकने में नाकाम रहती है तो सोचना पड़ेगा कि खून खराबे पर उतारू आतंकवादी संगठनों की तैयारियां किस स्तर की हैं।

इन धमाकों में बीस से अधिक व्यक्तियों के मारे जाने और पचास से अधिक के घायल होने की सूचना आ रही है। चूंकि अमेरिकी पॉप स्टार के कन्सर्ट को आतंकियों ने निशाना बनाया है जहां दर्शकों में नौजवानों और बच्चों की संख्या ज्यादा थी,

इसलिए यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि इसके पीछे दरअसल, आतंकी संगठनों की मंशा क्या रही है। वो यूरोप की आने वाली पीढ़ी के मन में दहशत बैठाना चाहते हैं। दुनियाभर में इस हमले की कड़ी निंदा हो रही है। होनी भी चाहिए,

क्योंकि ऐसे लोगों को निशाना बनाया गया है, जो मासूम और निर्दोष हैं। इस तरह की वारदातों को मानवता के खिलाफ हमलों के रूप में लिया जाना चाहिए। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उन राष्ट्र प्रमुखों में शामिल हैं, जिन्होंने इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है।

उम्मीद की जानी चाहिए कि मैनचेस्टर की इस शर्मनाक वारदात के बाद नए सिरे से आतंकवाद के खिलाफ सभी देश एकजुट होकर साझा मुहिम के लिए प्रतिबद्धता दिखाएंगे। खुद ब्रिटेन को भी इसका अहसास होगा कि आतंकवाद आतंकवाद ही होता है।

उसके दिए जख्म बहुत गहरे होते हैं। भारत की पीड़ा रही है कि बहुत लंबे समय तक ब्रिटिश सरकारें भारत पर होने वाले आतंकी हमलों को कानून व्यवस्था से जुड़ी वारदातें बताकर उसे हल्के में लेती रहीं। अब जाकर उसके स्वर बदले हैं।

भारत हमेशा से कहता आया है कि आतंकवाद में फर्क नहीं होना चाहिए। वह चाहे यहां हो या वहां। इसे मिलजुलकर जड़ से उखाड़ना होगा। आतंकियों को शह देने और पाल पोसकर विभिन्न देशों के खिलाफ छद्म युद्ध की तरह उनका प्रयोग करने वालों को भी अलग-थलग करना होगा।

Next Story
Top