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रहस्य के सागर में डूबा मलेशियन एयरलाइंस

बीजिंग के लिए उड़ा यह विमान एक घंटे के अंदर कहां लापता हो गया, किसी को समझ नहीं आ रहा है।

रहस्य के सागर में डूबा मलेशियन एयरलाइंस

नई दिल्‍ली. पांच् दिन बीत जाने के बाद भी लापता मलेशियन एयरलाइंस का विमान और उसमें सवार 239 लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। खोज के लिए चलाए जा रहे अभियान में 34 विमान, 40 पोत और दस देशों के दल लगे हुए हैं। शनिवार की रात को कुआलालंपुर से बीजिंग के लिए उड़ा यह विमान एक घंटे के अंदर कहां लापता हो गया, किसी को समझ नहीं आ रहा है। गुम होने से पूर्व यह विमान मलेशिया के पूर्वी तटीय शहर कोटा भारू और वियतनाम के दक्षिणी छोर के बीच 35 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था।

अभी तक विमान का मलबा तक नहीं मिलने की वजह से कोई यह पुख्ता तौर पर कहने की स्थिति में नहीं है कि यह विमान दुर्घटना का शिकार हुआ हैया किसी आतंकी साजिश की भेंट चढ़ा है। हालांकि इंटरपोल ने आतंकी साजिश की संभावना से इंकार किया है पर जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि विमान में दो यात्री चोरी के पासपोर्ट पर यात्रा कर रहे थे। ये दोनों ईरानी नागरिक थे और यह पासपोर्ट इटली के दो नागरिकों के थे। चोरी हुए पासपोर्ट का डेटाबेस इंटरपोल के पास है।

हालांकि पांच दिन गुजर जाने के बाद बाद भी गायब हुए मलेशियाई विमान का कोई सुराग नहीं मिल पाया है, ऐसे में फिलहाल दावे से कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन इस मामले में एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था में जो गंभीर चूक सामने आई है, उसे किसी भी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। मौजूदा तथ्यों के आधार पर कहा जा सकता है कि हवाईअड्डे पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने गंभीर लापरवाही का नमूना पेश किया है। करीब तेरह वर्ष पूर्व अमेरिका में 9/11 की घटना भी इसी चूक का परिणाम थी।

हवाईअड्डे पर सुरक्षा व्यवस्था के क्या मानक होने चाहिए इसके बारे में अकसर बातें होती रहती हैं, परंतु वे अमल में क्यों नहीं आ पाती हैं। जितने भी देश अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जुड़े हैं, उनमें सुरक्षा के ढेर सारे मानदंड अपनाए जाने चाहिए क्योंकि आतंकवाद के खतरे बने हुए हैं। देश में भी इस तरह के अलर्ट आते ही रहते हैं। भारत तो लंबे समय से आतंकवादियों के निशाने पर है। यहां भी सुरक्षा मानकों के साथ कई बार लापरवाही की बात उजागर होती रही है। जल्दबाजी में सुरक्षा जांच में भयंकर चूक के नतीजे हमने भी देखे हैं। कईलोगों को वीआईपी का दर्जा दे दिया गया है, जिनकी हवाईअड्डों पर जांच ही नहीं होती।

हवाईअड्डों पर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है। हालांकि आज पहले के मुकाबले हवाई यात्रा सुरक्षित हुई है। दुर्घटना की दरें भी कम हुई हैं। खासकर जो लंबी उड़ाने हैं और जिन विमानों को समुद्र के ऊपर से यात्रा पूरी करनी पड़ती है, वैसे विमानों का परीक्षण हाई लेवल के होने चाहिए। समय की मांग है कि तमाम अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे सुरक्षा मानकों के लिहाज से अंतरराष्ट्रीय निगरानी में लाए जाएं और हर जगह अचूक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित हो।

क्योंकि कोई भी आतंकी साजिश सुरक्षा व्यवस्था को भेदती है तो इसका नुकसान उस देश के नागरिकों तक सीमित नहीं रहता। वहीं जिन लोगों की जान ऐसे हादसों में चली जाती है उनके परिवार के लोगों पर क्या गुजरती है, इसकी सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है।

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