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लोकसभा चुनाव 2019 : वैदिक युग के अटल प्रावधान, युवा संभालें बागडोर

प्रकृति का शाश्वत, चिरंतन और अटल प्रावधान रहा है कि सभी वक्त के आगे झुकते रहे हैं किसी के लिए वक्त रुकता नहीं है। ऋषियों ने पचास वर्ष की आयु के तत्पश्चात वानप्रस्थ और पिचहत्तर वर्ष की आयु के पश्चात संन्यास ग्रहण करने का निर्देश दिया था। वैदिक युग के धर्म- कर्म भले ही आज सार्थक नहीं रह गए है, किंतु प्रकृति के अटल नियम तो प्रत्येक युग में बने रहेंगे।

लोकसभा चुनाव 2019 : वैदिक युग के अटल प्रावधान, युवा संभालें बागडोर
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प्रकृति का शाश्वत, चिरंतन और अटल प्रावधान रहा है कि सभी वक्त के आगे झुकते रहे हैं किसी के लिए वक्त रुकता नहीं है। ऋषियों ने पचास वर्ष की आयु के तत्पश्चात वानप्रस्थ और पिचहत्तर वर्ष की आयु के पश्चात संन्यास ग्रहण करने का निर्देश दिया था। वैदिक युग के धर्म- कर्म भले ही आज सार्थक नहीं रह गए है, किंतु प्रकृति के अटल नियम तो प्रत्येक युग में बने रहेंगे।

आजादी के दौर में नेहरू युग समापन के पश्चात उभरे राजनेताओं का युग भी भाजपा नेता 91 वर्ष के लालकृष्ण अडवाणी के सक्रिय राजनीति से पृथक हो जाने के निर्णय के पश्चात अब समाप्त हो चला है। अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण अडवाणी ने एक ही दौर में भारतीय जनसंघ से राजनीतिक जीवन प्रारम्भ किया था।

पचास के दशक में राजस्थान में आरएसएस का संगठन कार्य छोड़कर लालकृष्ण अडवाणी ने जनसंघ के केंद्रीय कार्यालय में संगठन मंत्री के तौर पहला कदम रखा था। श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय, नानाजी देशमुख, बलराज मधोक और अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मिलकर भारतीय जनसंघ की बुनियाद रखने वाले लालकृष्ण अडवाणी वस्तुतः राजनीतिक जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव के बाद शिखर पर पंहुचे।

लालकृष्ण अडवाणी के राजनीतिक दौर के कुछ अन्य राजनेताओं 86 वर्ष के मुरली मनोहर जोशी और 85 वर्ष के शांता कुमार ने भी सक्रिय राजनीति से संन्यास की तरफ अपने कदम बढ़ा दिए हैं। 79 वर्ष के मुलायम सिंह यादव की सक्रिय राजनीति में गतिशील भूमिका समाप्ति की तरफ हैं। 79 वर्ष के शरद पंवार भी संन्यास की तरफ कदम बढ़ा चुके हैं।

शरद पंवार ने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया है। एनसीपी लीडर शरद पंवार महाराष्ट्र के अत्यंत ताकतवर राजनेता हैं, जिन्होंने सोनिया गांधी के विरोध में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का परित्याग करके नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी का गठन किया था। करुणानिधि और जयललिता के तत्पश्चात तमिलनाडु की राजनीति में भी नए पीढ़ी के लीडरों ने राजनीतिक नेतृत्व को बाकायदा संभाल लिया है।

करुणानिधि के पुत्र एमके स्टालिन डीएमके का शीर्ष लीडर बनकर उभर चुके हैं। सोनिया गांधी भले ही 2019 लोकसभा चुनाव में रायबरेली से कांग्रेस पार्टी की उम्मीदवार हैं, किंतु अब कांग्रेस के सर्वोच्च लीडर के पद पर राहुल गांधी विराजमान हो चुके हैं। राष्ट्रीय लोकदल के लीडर को तौर पर राजनीतिक फैसले 81 वर्ष के चौधरी अजीत सिंह के स्थान पर 41 वर्ष के जयंत चौधरी लेने लगे हैं।

2019 लोकसभा चुनाव में तकरीबन प्रत्येक राजनीतिक पार्टी की बागडोर पूर्णतः नए लीडरों के हाथों में आ चुकी है। भाजपा नेता नरेंद्र मोदी 69 वर्ष के हैं, डीएमके लीडर स्टालिन 66 वर्ष के हैं, कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव है सीताराम येचुरी 65 वर्ष है। कांग्रेस लीडर राहुल गांधी 49 वर्ष के हैं, एनसीपी लीडर सुप्रिया सूले 49 वर्ष की हैं और जयंत चौधरी 41 वर्ष के हैं।

चीन में सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना ने पिचहत्तर वर्ष की आयु से अधिक राजनीतिक लीडरों को राजसत्ता के सभी पदों से हटाने के लिए चीन के संविधान में संशोधन किया है, ताकि अगली पीढ़ी के लीडरों के राजसत्ता में शीर्ष पद उपलब्ध कराएं जा सकें।

भारत के संविधान में चीन सरीखा संवैधानिक प्रावधान विद्यमान नहीं है किंतु एक आयु के बाद राजनीति से रिटायर हो जाने का नैतिक दायित्व तो स्थापित किया जा सकता है ताकि अगली पीढी को स्थान प्राप्त हो सके।

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