Top

लोकसभा चुनाव 2019 विश्लेषण : अयोध्या मामले पर जल्द फैसला सबके हित में

नरेंद्र सांवरिया | UPDATED Mar 14 2019 12:11PM IST
लोकसभा चुनाव 2019 विश्लेषण : अयोध्या मामले पर जल्द फैसला सबके हित में

आयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में एक बार फिर तय हो गया है कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद  मध्यस्थता की ओर जा रहा है। इससे पहले 26 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने अपनी निगरानी में मध्यस्थ के जरिए विवाद का समाधान निकालने पर सहमति जताई थी। 6 मार्च की सुनवाई में उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या के राम मंदिर-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा जाए या नहीं, इस पर फैसला हालांकि सुरक्षित रख लिया और सभी पक्षकारों को मध्यस्थ के नाम देने को कहा, लेकिन रास्ता मध्यस्थता की ओर जाता दिखा।

यूं तो सभी पक्षों ने मध्यस्थों के नाम अदालत को दे दिए, लेकिन पहले जहां मुस्लिम पक्ष मध्यस्थ के नाम देने को राजी था, वहीं हिंदू महासभा ने तर्क दिया कि क्योंकि ये हमारी जमीन है इसलिए हम मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं हैं। इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट को फैसला देना चाहिए। निर्मोही अखाड़ा ने भी कहा अगर मध्यस्थता होती है सभी पक्षों को साथ आना होगा।

काफी हिस्सा अभी भी हमारे पास है, ऐसे में काफी समझौता करना पड़ेगा। रामलला की ओर से दलील दी गई कि अयोध्या राम की जन्मभूमि है, इसलिए ये एक आस्था का विषय है, इसलिए इसमें किसी तरह का समझौता नहीं हो सकता है। इसमें सिर्फ यही फैसला हो सकता है कि मस्जिद कहीं और बना सकते हैं, मध्यस्थता का कोई सवाल नहीं होता है।

बाद में हिंदू महासभा ने पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा, पूर्व सीजेआई जेएस खेहर और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एके पटनायक के नाम मध्यस्थता के लिए दिए तो निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज कुरियन जोसेफ, एके पटनायक और जीएस सिंघवी के नाम दिए। लेकिन वर्तमान में जरूरी बात यह है कि अयोध्या में मंदिर-मस्जिद विवाद का हल जल्द से जल्द निकाला जाना चाहिए।

यही सबके हित में है। देश का जनमानस इसे और घसीटने के मूड में नहीं है। दोनों पक्षों के बीच करीब चार दशक से यह विवाद लंबित है। अदालत में ही वर्षों से यह केस फैसले की बाट जोह रहा है। 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया था, जिसे निर्मोही अखाड़े और सुन्नी वक्फ बोर्ड ने नहीं माना और उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

2011 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी, तब से इस केस पर सर्वोच्च अदालत सुनवाई कर रही है। अब सुप्रीम कोर्ट पर देश की निगाहें हैं और शीर्ष अदालत में पांच जजों की बेंच ने कहा कि हमें मामले की गंभीरता पता है, हम अयोध्या मुद्दे पर जल्द फैसला देना चाहते हैं। यह सकारात्मक संकेत है।

हालांकि अगली सुनवाई की तिथि नहीं बताई गई है लेकिन उम्मीद बंधी है कि अब निकट भविष्य में मंदिर-मस्जिद विवाद का हल हो सकता है। खास बात है कि अभी सभी पक्ष इस विवाद का हल चाहते हैं। यह आस्था का मुद्दा होते हुए भी राजनीतिक रूप से अहम बना हुआ है। भाजपा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के वादे के साथ सत्ता में आई थी, इसलिए उस पर भारी दबाव है।

लेकिन चूंकि यह केस शीर्ष अदालत में है, इसलिए सरकार के हाथ-पैर बंधे हुए हैं। अहम बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि ये सिर्फ जमीन विवाद नहीं है, बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है। अयोध्या विवाद पर पहले भी कई बार मध्यस्थता की कोशिशें हो चुकी हैं, लेकिन हर बार नतीजा नहीं निकला। इस बार सुप्रीम कोर्ट ने कमान संभाली है, तो उम्मीद की जानी चाहिए कि अयोध्या का सर्वमान्य रास्ता मध्यस्थता के जरिए जरूर निकलेगा। 


ADS

ADS

(हमसे जुड़े रहने के लिए आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं )

ADS

मुख्य खबरें
Copyright @ 2017 Haribhoomi. All Right Reserved
Designed & Developed by 4C Plus Logo