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डॉ. घनश्याम बादल का लेख : आओ सेट का करें स्वागत

सेट के आने से अब अभ्यर्थियों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी कम हो जाएगा क्योंकि अब उन्हें अहर्ता परीक्षा के लिए कई कई परीक्षाएं नहीं देनी पड़ेगी। साथ ही साथ एक ही परीक्षा के माध्यम से वे कर्मचारी चयन आयोग, बैंक एवं रेलवे की विभिन्न नौकरियों के लिए क्वालीफाई हो जाएंगे। वैसे इसका मतलब यह भी नहीं है कि एक ही परीक्षा पास कर लेने से वह इन विभागों की हर स्तर की नौकरियों के लिए वांछनीयता प्राप्त कर लेंगे

डॉ. घनश्याम बादल का लेख : आओ सेट का करें स्वागत
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डॉ. घनश्याम बादल

युवाओं के लिए केंद्रीय सेवाओं में भर्ती हेतु सेट यानी सेंट्रल एलेजीबिलिटी टेस्ट का आना स्वागत योग्य कदम कहा जा सकता है। इस टेस्ट के आने से अब रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे एवं बैंकिंग सेवाओं के लिए अलग-अलग से अहर्ता परीक्षाएं नहीं देनी पड़ेंगी।

यदि वर्तमान व्यवस्था पर नजर डालें तो शिक्षा के क्षेत्र में सीटीईटी यानी सेंट्रल टीचिंग एलिजिबिलिटी टेस्ट और राज्यों के लिए यूकेटेक, यूपीटेट जैसी अनेक परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। इंजीनियरिंग एवं स्वास्थ्य क्षेत्र की सेवाओं के लिए भी अलग से टेस्ट देना होता है। यह व्यवस्था विभागों द्वारा अपने स्तर पर की जाती है और कई बार अलग-अलग विभाग कुछ अन्य एजेंसियों जैसे सीबीएसई एनसीईआरटी अथवा निजी कंपनियों तक से यह परीक्षाएं आयोजित करवाते हैं तो तो इनमें घपले की काफी संभावना बढ़ जाती है। इतना ही नहीं इन परीक्षाओं पर होने वाला खर्च भी काफी अधिक हो जाता है।

अमूमन देखने में आता है कि बेरोजगार युवा चारों तरफ हाथ पैर मारना चाहता है वह कोई भी अवसर गंवाना नहीं चाहता। इस प्रवृत्ति के चलते कभी वह एक की अहर्ता परीक्षा देता था तो कभी दूसरे की और हर परीक्षा एवं आने-जाने का खर्च उठाते उठाते वह स्वयं एवं उसका परिवार आर्थिक दिक्कतों का तो सामना करता ही था, निराशा के गर्त में भी डूब जाता था।

व्यक्ति की मौलिक आवश्यकताओं में आज के संदर्भ में केवल रोटी, कपड़ा एवं मकान से ही काम नहीं चल पाता बल्कि उसके लिए अच्छे रोजगार का होना भी बेहद जरूरी होता है। यदि व्यक्ति के पास उसके सपनों, क्षमता तथा योग्यता के अनुरूप रोजगार होता है तो वह न केवल अपना व्यक्तिगत जीवन अच्छे से निर्वाह कर पाता है अपितु अपने राष्ट्र, समाज एवं परिवार के लिए भी उत्कृष्ट योगदान दे पाता है। जब ऐसा होता है तो व्यक्ति के साथ-साथ समाज, परिवार एवं राष्ट्र नामक इकाइयां स्वत: विकसित होती चली जाती है। यही सच्चा राष्ट्रवाद भी है कि हर नागरिक को योग्यता, क्षमता, दक्षता एवं कुशलता के अनुरूप कार्य एवं कार्य करने की परिस्थितियां उपलब्ध हों।

सेट के आने से अब अभ्यर्थियों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी कम हो जाएगा क्योंकि अब उन्हें अहर्ता परीक्षा के लिए कई कई परीक्षाएं नहीं देनी पड़ेगी। साथ ही साथ एक ही परीक्षा के माध्यम से वे कर्मचारी चयन आयोग, बैंक एवं रेलवे की विभिन्न नौकरियों के लिए क्वालीफाई हो जाएंगे। वैसे इसका मतलब यह भी नहीं है कि एक ही परीक्षा पास कर लेने से वह इन विभागों की हर स्तर की नौकरियों के लिए वांछनीयता प्राप्त कर लेंगे बल्कि कैटेगरी के अनुसार कुछ सीमित नौकरियों के लिए ही उनकी अहर्ता नापने का काम सेट करेगा और अलग-अलग पदों के लिए अलग-अलग कठिनाई के स्तर की परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी उदाहरण के लिए क्लर्क के लिए अलग डिफिकल्टी लेवल का टेस्ट होगा तो प्रशासनिक अधिकारी पदों के लिए अलग प्रकार का टेस्ट होगा।

इतना ही नहीं सरकार ने सेट के माध्यम से यह भी तय किया है कि अब अभ्यर्थी केवल दसवीं कक्षा पास करने के बाद ही सेट में परीक्षा देने के योग्य समझा जाएगा तथा 12वीं, स्नातक या फिर परास्नातक वांछनीय योग्यता वाले पदों के लिए वह समान स्तर पर एक ही वरीयता टेस्ट द्वारा 3 साल के लिए योग्य घोषित किया जाएगा इसका सीधा सा अर्थ यह हुआ कि यदि 2021 में सेट की एक खास स्तर की परीक्षा पास कर लेते हैं तो उसी स्तर के पदों की मुख्य परीक्षा में बैठने के लिए 2024 तक आप क्वालीफाई हो जाएंगे। जहां आवश्यक नहीं होगा वहां सीधी भर्ती द्वारा नियुक्ति पत्र दे दिए जाएंगे।

सेट के आने से क्षेत्रीय भाषाई इलाकों में रहने वाले अभ्यर्थियों को विशेष लाभ होगा। अभी तक इस प्रकार की परीक्षाएं देशभर में केवल अंग्रेजी या हिंदी भाषाई इलाकों में हिंदी अथवा अंग्रेजी माध्यम से ही आयोजित की जाती थी जबकि अब केंद्रीय अनुवर्ती सूची में दर्ज भाषाओं में यह परीक्षाएं देने की छूट मिलेगी। इससे अभ्यर्थियों को प्रश्नों को समझने में भी आसानी होगी और जब चयन के बाद ही अभ्यर्थी अपने क्षेत्रों में नियुक्ति पाएंगे।

सेट के आने से युवाओं में उत्साह के साथ-साथ आशा एवं अपेक्षाओं का भी सपना जागेगा। सरकार का दायित्व है की इन सपनों एवं अपेक्षा को पूरा करने में भी वह खरी उतरे। एक और जहां कोरोना संक्रमण के चलते देशभर में एक करोड़ लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं। अतः सरकार को निकट भविष्य में बड़े पैमाने पर सरकारी पदों हेतु भारी संख्या में नए पदों का सृजन करना होगा तथा निजी क्षेत्र को भी इस बात के लिए प्रोत्साहित करना होगा कि वह अच्छे वेतन के साथ नए रोजगार सृजन के लिए आगे आएं। अन्यथा ऐसी स्थिति में कहीं ऐसा न हो कि सेट क्वालीफाई किए हुए अभ्यर्थी कई वर्ष अपनी नियुक्ति की राह ही देखते रह जाएं। वैसे भी एक नया कदम उठाया गया है समय आने पर उसकी त्रुटियां एवं कमियां भी पता चलेंगी तथा उन्हें दूर भी किया जाएगा इसलिए अभी तो इस कदम का स्वागत ही किया जाना चाहिए।

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