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विकेश कुमार बडोला का लेख : सभी में हों राष्ट्रीयता की जीवंत चेतना

वैसे राष्ट्र के संवेदनशील लोगों को प्रधानमंत्री से आशा थी कि इस बार वे अपने संबोधन में जनसंख्या नियंत्रण और समान नागरिक संहिता का राष्ट्रीय नियम बनाने की बात उठाएंगे, परन्तु उन्होंने इन महत्वपूर्ण कार्यों को अभी अपने प्रमुख राष्ट्रीय कार्यकारी कर्तव्यों में समाहित नहीं किया है, जबकि स्वास्थ्य, शिक्षा, जीविका, खाद्यान्न-पोषाहार जैसे मूलभूत राष्ट्रीय दायित्वों का निर्वहन तब ही संभव हो सकता है, जब जनसंख्या पर नियंत्रण की नीति बनाई और युद्ध स्तर पर क्रियान्वित की जाए। हालांकि विगत स्वाधीनता समारोह में प्रधानमंत्री के संभाषण का मुख्य विषय स्वेच्छापूर्वक जनसंख्या नियंत्रण करना था।

तिरंगा
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फाइल फोटो

विकेश कुमार बडोला

चौहत्तरवें स्वाधीनता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से ध्वजारोहण करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन पूर्णरूपेण राष्ट्रीय संबोधन होता है। यदि राष्ट्र और इसकी संपूर्ण गतिविधियों के प्रति इसका प्रत्येक नागरिक गंभीर आत्मचिंतन करे तो उसे ज्ञात होगा कि स्वाधीनता दिवस समारोह पर प्रधानमंत्री जिन-जिन बिंदुओं पर भारतीय नागरिकों को संबोधित करते हैं, वही बिंदु राष्ट्र के विगत और भावी विस्तृत जनकार्यों की नींव होते हैं। इस बार लाल किले से प्रधानमंत्री ने अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर भारतीय नागरिकों से विमर्श किया। उन्होंने कोरोना महामारी के साथ प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की भारतीय शासन की सक्रियता, समर्पण पर विस्तार से बताया। कोरोना को पराजित करने के लिए तीन-तीन टीकों के परीक्षणों पर चर्चा की।

उन्होंने बताया कि कैसे इस देश के वैज्ञानिक ऋषि-मुनियों की तरह कोरोना का प्रभावशाली टीका बनाने के लिए दिन-रात अपने दायित्वों का निर्वाह कर रह हैं। उनके अनुसार भारत शीघ्र ही कोरोना की औषधि बनाने में सफल होगा और देश के हर नागरिक तक यह औषधि पहुंचाने की कार्यकारी रूपरेखा भी बना ली गई है। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री ने एक राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य अभियान चलाने की इच्छा जताई है। इसके लिए भी शासकीय कार्यनीति तैयार हो चुकी है। इस अभियान के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को स्वास्थ्य पहचान पत्र मिलेगा, जो चिकित्सा सेवाओं तक सभी की पहुंच को सुगम बनाएगा। नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन (एनडीएचएम) अभियान में जो पहचान-पत्र बनेगा उसमें प्रत्येक नागरिक की चिकित्सा जानकारी होगी। इसमें नए-पुराने रोग, रोग की जांच, चिकित्सा, चिकित्सक, रोग निवारण की निर्धारित औषधि, प्रमुख रोग, अन्य रोगों, उनकी जांच, निदान और निदानकर्ता चिकित्सक का पूरा विवरण होगा। इसके अतिरिक्त स्त्रियों के लिए मात्र एक रुपये के मूल्य पर सैनेटरी पैड उपलब्ध कराने की घोषणा भी मोदी द्वारा राष्ट्र कल्याण के लिए निर्धारित संभावित नीतियों में प्रमुख नीति है।

वैसे राष्ट्र के संवेदनशील लोगों को प्रधानमंत्री से आशा थी कि इस बार वे अपने संबोधन में जनसंख्या नियंत्रण और समान नागरिक संहिता का राष्ट्रीय नियम बनाने की बात उठाएंगे, परन्तु उन्होंने इन महत्वपूर्ण कार्यों को अभी अपने प्रमुख राष्ट्रीय कार्यकारी कर्तव्यों में समाहित नहीं किया है, जबकि स्वास्थ्य, शिक्षा, जीविका, खाद्यान्न-पोषाहार जैसे मूलभूत राष्ट्रीय दायित्वों का निर्वहन तब ही संभव हो सकता है, जब जनसंख्या पर नियंत्रण की नीति बनाई और युद्ध स्तर पर क्रियान्वित की जाए। हालांकि विगत स्वाधीनता समारोह में प्रधानमंत्री के संभाषण का मुख्य विषय स्वेच्छापूर्वक जनसंख्या नियंत्रण करना था। इस बारे में उन्होंने कहा था कि परिवार सीमित और छोटा रखना भी राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रसेवा है, लेकिन उनकी इस अपील का प्रभाव उस वर्ग पर बिल्कुल नहीं हुआ, जिसे इंगित करते हुए उन्होंने स्वेच्छापूर्वक जनसंख्या सीमित करने की बात कही थी। इसके विपरीत यह तथाकथित वर्ग विगत एक वर्ष में भी अपनी जनसंख्या में बहुत अधिक वृद्धि कर चुका है। जहां तक हिन्दू परिवारों की बात है, तो अधिसंख्य हिन्दू परिवार एक या दो बच्चों तक ही सीमित हो चुके हैं। इसमें धनी और निर्धन दोनों श्रेणियों के हिन्दू सम्मिलित हैं, जबकि देखने में आ रहा है कि मुसलिम परिवार कितना ही धनी अथवा निर्धन क्यों न हों, उनमें एकाधिक विवाह और पत्नियों का प्रचलन तथा उस आधार पर न्यूनतम तीन-चार एवं अधिकतम दस से अधिक बच्चे पैदा करने का प्रचलन अनवरत चल रहा है। मोदी सरकार को इस दिशा में गंभीरता पूर्वक विचार करते हुए शीघ्रातिशीघ्र जनसंख्या नीति और समान नागरिक संहिता बनानी चाहिए।

74वें स्वतंत्रता समारोह आयोजन में मोदी ने राष्ट्रवासियों को सेना, किसान, राष्ट्र को सशक्त करने, राष्ट्र की संप्रभुता को अक्षुण्ण रखने, पंचायतों की प्रौद्योगिकीय समृद्धि बढ़ाने, शिक्षा नीति को आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के अनुरूप बनाने, स्वास्थ्य और पोषाहार-खाद्यान्न नीति को अंतिम व्यक्ति तक सुगमतापूर्वक पहुंचाने तथा शत्रु राष्ट्रों चीन और पाकिस्तान को उनकी धूर्तता के लिए कठोर प्रतिघात देने के संबंध में जो वक्तव्य दिया, संदेह नहीं कि वह कोरा और अनुपयोगी वक्तव्य है। इस वक्तव्य के पृष्ठभाग में मोदी शासन की समर्पित कार्यनीति है, जो इष्टतम विशेषज्ञता के साथ निरंतर संपन्न हो रही है।

इसका ज्ञान नागरिकों को तब ही हो पाता है जब वे अपनी स्वतंत्र, सजग और जागरूक अंतर्दृष्टि से देश में विभिन्न समयावधियों में सत्तारूढ़ अलग-अलग राजनीतिक दलों के कार्यों और खटकर्मों का आकलन करने में समर्थ होते हैं। इस हेतु सभी को राष्ट्र की जीवंत चेतना से जुड़ना होगा। आज के नेताओं, नागरिकों और बच्चों को उपहार में मिले स्वाधीन राष्ट्र के संबंध में अपना स्वतंत्र विवेकवान विचार रखना चाहिए। ऐसा विचार करते हुए जब वे इस सत्य से परिचित होंगे कि स्वाधीन राष्ट्र के व्रत को साधने कितने महापुरुषों ने अपना जीवन न्योछावर कर दिया, कितने ही तत्कालीन ब्रिटिश शासन के कठोर अत्याचारों से पीड़ित-प्रताड़ित हुए, कितनों ने अपना सामान्य जीवन और घर-परिवार स्वाधीनता की बलिवेदी पर अर्पित कर दिया और कितनों ने अपने व अपने संबंधियों के जीवन से मोह रखने के बदले भावी पीढ़ियों यानी हमारे व हमारे जीवन के बारे में सोचते हुए स्वाधीनता के संग्राम में अपना सर्वस्व होम कर दिया, तो हमें गहराई तक अनुभव होगा कि एक संवेदनशील व्यक्ति के जीवन में राष्ट्र का अत्यधिक महत्व है। यह अनुभव हमें राष्ट्र के प्रति सत्यनिष्ठा से समर्पित करेगा और एक नागरिक के रूप में अपने कार्यकारी कर्तव्यों को सर्वश्रेष्ठ तरीके व सज्जनतापूर्वक पूरा करने के लिए कर्मनिष्ठ करेगा।

अतः राष्ट्र के दो राष्ट्रीय पर्वों 15 अगस्त को अनुसूचित स्वाधीनता दिवस और 26 जनवरी को निर्धारित गणतंत्र दिवस के प्रति राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक को अपने हृदय में निर्मल भावनाएं रखते हुए प्रधानमंत्री तथा राष्ट्रपति द्वारा इस अवसर पर उद्धृत विचारों को आत्मसात करना चाहिए और राष्ट्र की प्रगति एवं गौरव के लिए यथासंभव योगदान देना चाहिए। जब हम प्रतिक्षण स्वयं को तन-मन-धन से राष्ट्रीय भावना के साथ खड़ा पाएंगे तो आसानी से यह भी पता लगा लेंगे कि लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए शासक राष्ट्र को उचित प्रकार से संचालित कर पा रहे हैं अथवा नहीं। इसके बाद हमारे पास आम चुनाव में ऐसे शासन को बदलने का अवसर भी होता है। अतः देश के किसी भी विध उपकार हेतु हम में राष्ट्रीयता का बोध अवश्य होना-बना रहना चाहिए।

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