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चिंतन : अंकों की चिंता छोड़ कर परीक्षा की सलाह उचित

अखबारों में छात्रों की स्यूसाइड की खबरें आती हैं।

चिंतन : अंकों की चिंता छोड़ कर परीक्षा की सलाह उचित
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आरक्षण सीबीएसई बोर्ड की दसवीं और बारहवीं की एक मार्च से शुरू हो रही परीक्षाओं से दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'मन की बात' में छात्रों का आत्मविश्वास जगा गए। पीएम को पता है कि बोर्ड एग्जाम से पहले छात्र हमेशा टेंशन में रहते हैं। इसलिए उन्होंने अपने मन की बात कार्यक्रम की 17 वीं कड़ी में छात्रों को चिंतामुक्त रहने के टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि 'परीक्षा को अंकों का खेल मत मानिए, एक बहुत बड़े उद्देश्य को लेकर चलिए। परीक्षा को देखने का तरीका बदल दें। हम दूसरों से स्पर्धा करने में अपना समय क्यों बर्बाद करें? हम खुद से ही स्पर्धा क्यों न करें।'
परीक्षा देने जा रहे छात्रों के लिए पीएम के मन की ये बातें काफी महत्वपूर्ण हैं। दरअसल हमारी परीक्षा प्रणाली ऐसी है, जिसमें अंकों की होड़ है। अंक ही सफलता और असफलता तय करता है। कम अंक आने का मतलब आप पिछड़ गए, कभी कभी तो कम अंक आना अभिशाप तक बन जाता है। छात्र आत्महत्या जैसा कदम उठा लेता है। एग्जाम के रिजल्ट के बाद अक्सर टीवी अखबारों में छात्रों की स्यूसाइड की खबरें आती हैं। इस मायने में छात्रों को पीएम का परीक्षा के प्रति सोच व नजरिये में बदलाव लाकर चिंतामुक्त रहने का संदेश देना अहम है।
यह संदेश उन्होंने अकेले नहीं दिया, बल्कि इस बार क्रिकेट के महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर, दिमाग का खेल शतरंज के बाजीगर विश्वनाथन आनंद, आध्यात्मिक गुरु मोरारी बापू और वैज्ञानिक सीएनआर राव ने भी छात्रों से उनके साथ 'मन की बात' की। खेल, आध्यात्म व विज्ञान क्षेत्र के इन दिग्गजों के साथ छात्रों को एग्जाम में भयमुक्त रहने की बात कह कर पीएम ने एक गूढ़ संदेश भी दिया है। वह यह कि सफलता का पैमाना सर्वाधिक अंक लाना नहीं है। सबको पता है कि सचिन छात्र अच्छे नहीं रहे हैं, लेकिन महान क्रिकेटर बने।
उन्हें भारत रत्न से नवाजा गया। अकेले सचिन ही नहीं, आइंसटीन, बिल गेट्स, वारेन बफे, मार्क जकरबर्ग, जैक मा जैसे सैकड़ों सफल लोग हैं, जो अपने स्कूली दिनों में अच्छे अंक पाने वाले छात्र नहीं थे। कहने का तात्पर्य कि सफलता अधिक से अधिक अंक पाकर ही नहीं अजिर्त की जा सकती है, बल्कि कम अंक आने के बावजूद सकारात्मक सोच व असफलता से डरे बिना रचनात्मक कार्य के जरिये भी जीवन में सफलता पाई जा सकती है। सचिन ने भी छात्रों से यही कहा, 'अपनी सोच पॉजिटिव रखें।' आनंद ने कहा, 'शांत रहें और खुद पर दबाव न डालें।' मोरारी बापू ने कहा, 'सफलता के पीछे न भागें।' राव ने कहा, 'चिंतामुक्त होकर अपना बेहतरीन दें।'
सभी ने छात्रों को प्रैक्टिकल, पॉजीटिव सोच और मजबूत आत्मविश्वास के साथ एग्जाम देने के लिए प्रेरित किया। उम्मीद है परीक्षार्थी पीएम समेत इन सफल लोगों की बातों पर जरूर गौर करेंगे। अभिभावकों को भी अपने बच्चों पर अधिक से अधिक अंक लाने का अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए। इसी के साथ यहां यह भी जिक्र करना जरूरी है कि सरकार को अपनी शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाना चाहिए। जापान की व्यावहारिक व कौशल विकास पर आधारित शिक्षा प्रणाली से सीख लेकर हमें अपने लिए एक मॉडल तैयार करना चाहिए। बजट को लेकर पीएम ने कहा कि 'सवा सौ करोड़ देशवासी मेरा एग्जाम लेंगे, लेकिन मैं आत्मविश्वास से भरा हुआ हूं।' ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए कि देश को बढ़िया बजट मिलेगा।
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