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घुसपैठियों को रोकने के लिए बनाई गई अदृश्य दीवार

केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उद्घाटन किया। कांप्रिहेंसिव इंटीग्रेटेड बार्डर मैनेजमेंट सिस्टम के अन्तर्गत सीमा पर बाड़ लगाने की दो परियोजनाओं को लांच करने के बाद उन्होंने कहा कि सीमा की सुरक्षा सर्वोपरि है और सीमा के संवेदनशील क्षेत्रों और खाली स्थानों की पहचान कर ली गई है।

घुसपैठियों को रोकने के लिए बनाई गई अदृश्य दीवार
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17 सितंबर को पलौरा स्थित सीमा सुरक्षा बल के मुख्यालय में देश की पहली स्मार्ट फेंसिंग की पायलट परियोजना का केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उद्घाटन किया। कांप्रिहेंसिव इंटीग्रेटेड बार्डर मैनेजमेंट सिस्टम के अन्तर्गत सीमा पर बाड़ लगाने की दो परियोजनाओं को लांच करने के बाद उन्होंने कहा कि सीमा की सुरक्षा सर्वोपरि है और सीमा के संवेदनशील क्षेत्रों और खाली स्थानों की पहचान कर ली गई है।

इस फेंसिंग से सुरक्षा बलों में हताहतों की संख्या में कमी आएगी और उनका तनाव भी कम होगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस साल के अन्त में असम में भी ऐसी ही परियोजना लागू की जाएगी। इन दोनों परियोजनाओं से सीमा सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी। गृहमंत्री के मुताबिक इन परियोजनाओं की सफलता के बाद मौजूदा आधुनिक सीमा रक्षक प्रणाली को और बेहतर बनाने की दिशा में काम होगा।

स्मार्ट फेंस से मिलने वाली फीड बैक के आधार पर इसे और अधिक बेहतर बनाने के कई कदम उठाए जाएंगे। विदित हो कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तेल अवीव यात्रा के बाद इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भारत यात्रा के दौरान हाईटेक स्मार्ट फेंसिंग के लिए दोनों मुल्कों में करार हुआ था। इसी के तहत यह नया सिस्टम विकसित किया गया है।

सीआईबीएमएस के अन्तर्गत की ये दोनों परियोजनाएं जम्मू में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास साढ़े पांच किलोमीटर के विस्तार को कवर करती हैं। सीमा सुरक्षा बल इस पायलट परियोजना के तहत जम्मू, सांबा एवं कठुआ जिलों में पाक से लगती सीमा पर यह फेंसिंग लगाएगा। यह अपनी तरह की पहली उच्च प्रौद्योगिकी वाली निगरानी प्रणाली है।

यह फेंसिंग जल, थल एवं वायु में अदृश्य इलेक्ट्राॅनिक बाधक की तरह काम करेगी जिससे सीमा सुरक्षा बल के जवानों को सबसे मुश्किल इलाकों में घुसपैठ रोकने में मदद मिलेगी। इस पायलट परियोजना के सफल होने पर इसका अगला विस्तार 198 किलोमीटर लम्बी नियन्त्रण रेखा पर लखनपुर से अखनूर तक किया जाएगा।

इस कार्यप्रणाली के समुचित निगरानी करने के बाद इस फेंंिसंग को 2026 किलोमीटर के अति संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में भी लगाया जाएगा। यह उच्च प्रौद्योगिकी सीमा की रक्षा करने वाले जवानों के हताहतों की संख्या को कम करने के साथ-साथ सीमा पर लगातार कई घंटों तक काम करने वाली ड्यूटी के दौरान तनाव कम करेगी।

पाकिस्तान से लगने वाली सीमा पर लगाई जाने वाली इस फेंसिंग के हाईटेक सर्विलांस सिस्टम की सहायता से जमीन, पानी व हवा में एक अदृश्य दीवार खड़ी होगी जो घुसपैठ की पहचान करने व उसको रोकने में मदद करेगी। इस नवीनतम तकनीक से जवानों की गश्त करने की निर्भरता भी कम होगी। इस इलेक्ट्राॅनिक फेंसिंग में थर्मल इमेजर, भूमिगत सेंसर, फाइबर आॅप्टिकल सेंसर राडार लगे हुए हैं।

इसके दायरे में जो कोई आएगा उसकी सूचना तुरन्त कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी और इसके तुरन्त बाद सीसीटीवी फीड सीमा सुरक्षा बल की उस चौकी तक पहंुचेंगे। इस फेंसिंग के नीचे कोई सुरंग बनाना संभव नहीं होगा। फेंस में लगे सेंसर कदमों की आहट से लेकर हल्के से हल्के स्पर्श को पहचानने में सक्षम हैं। स्मार्ट फेंस यह पता लगा लेगी कि दीवार का स्पर्श इंसान या जानवर में से किसने किया हैं।

इस तकनीक में सुरंग, राडार और सोनार सिस्टम से सीमा पर नदी के किनारों को सुरक्षित किया जा सकेगा। इसके कमाण्ड व कंट्रोल सिस्टम सभी सर्विलांस उपकरणों से डाटा को रियल टाइम में रिसीव करेंगे। इसका इन्फ्रारेड और लेजर बेस्ड इंट्रूजन डिटेक्टर्स जमीन तथा नदी के आसपास के क्षेत्रों में एक ऐसी दीवार खड़ी करेेगा जो दिखाई नहीं देगी।

वहीं दूसरी तरफ सोनार सिस्टम नदी के रास्ते होने वाली घुसपैठ के प्रयासों को पकड़ लेगा। इसके अतिरिक्त इसकी एयरोस्टेट तकनीक आसमान में होने वाली किसी भी हरकत पर नजर रखेगी। इसी तरह सुरंग के रास्ते होने वाली घुसपैठ को रोकने के लिए भूमिगत सेंसर लगातार निगरानी करेंगे। इसके संवेदनशील सेंसर जमीन के उपर व अंदर के किसी भी प्रकार के कम्पन को महसूस कर सूचना दे देंगे।

भारत जिस तरह से पाक प्रायोजित आतंकवादी घुसपैठ से जूझ रहा है उसके लिए इस तरह की अत्याधुनिक स्मार्ट फेंस की वर्तमान में महती आवश्यकता है क्योंकि पाकिस्तान की सीमा पर जितनी सुरक्षा जितनी मजबूत हो उतना ही हमारे लिए बेहतर होगा। विदित हो कि पाकिस्तान से लगने वाली सीमा पर नदियों में बाड़ लगाना संभव नहीं है।

इसी का फायदा उठाकर आतंकवादी घुसपैठ करके कई हमलों को अंजाम दे चुके हैं। सांबा, गुरदासपुर और पठानकोट में हमला इन्हीं रास्तों से आए आतंकवादियों ने किया था। इसीलिए सरकार ने इन इलाकों की सीमा को पूरी तरह से अभेद्य बनाने का निर्णय लिया है। सरकार ने यह फैसला किया है कि जिन स्थानों पर बाड़ लगाना संभव नहीं है वहां पर स्मार्ट फेंस की दीवार खड़ी की जाए।

सीमा पर पाक आधारित आतंकी समूहों की घुसपैठ को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए पंजाब सीमा स्थित सभी नदी पट्टियां इस प्रौद्योगिकी से लैस की जाएंगी। इस प्रयास में पाक सीमा रेखा पर अनेक संवेदनशील एवं असुरक्शित जगहों की पहचान कर ली गई है जहां बाड़ नहीं होने के कारण आतंकवादी घुसपैठ करने में सफल हो जाते हैं।

सीआईबीएमएस के तहत जमीन पर आॅप्टिकल फाइबर सिस्टम, पानी के रास्तों पर सेंसर युक्त सोनार सिस्टम और हवा में हाई रेजोल्यूशन व एयरोस्टेट कैमरा दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर रखेंगे और किसी भी खतरे की स्थिति में क्विक रिएक्शन टीम मौके पर पहुंच जाएगी। इस तरह की अत्याधुनिक हाईटेक निगहबानी का इस्तेमाल अमेरिका, इजराइल, सउदी अरब, बुल्गारिया, हंगरी मोरक्को जैसे देश कर रहे हैं।

अब भारत में इसके लगने से सीमाएं और अधिक सुरक्षित हो जाएंगी। इस्राइल और सिंगापुर जैसे देशों में भी सीमा सुरक्षा के लिए ऐसी ही तकनीक प्रयोग में लाई जा रही है। सीमाओं की निगरानी करने और घुसपैठ रोकने के लिए लेजर किरणों का इस्तेमाल सीमावर्ती क्षेत्रों में बाड़ की तरह किया जाता है।

अब इस नई योजना से सीमा पर आतंकी घुसपैठ होने का खतरा कम हो जाएगा। वर्तमान में केवल जम्मू-कश्मीर में ही अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा व वास्तविक नियन्त्रण रेखा पर सेंध नहीं लगती बल्कि पूर्वोत्तर के कई राज्यों एवं पश्चिम बंगाल की सीमाओं पर घुसपैठ होती रहती है। अब इस सफलता के बाद इन सीमाओं पर घुसपैठ रोकना आसान हो जाएगा।

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