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कानून के शासन की अवहेलना मान्य नहीं

रामपाल के पास अपनी हथियारबद्ध रक्षक हैं। जब पुलिस कार्रवाई कर रही थी तब देखा गया कि आश्रम की छत पर बड़ी मात्रा में पत्थर, लाठी और हथियार लेकर उनके समर्थक तैनात थे।

कानून के शासन की अवहेलना मान्य नहीं
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नई दिल्‍ली. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हरियाणा के बरवाला स्थिति सतलोक आश्रम के रामपाल की गिरफ्तारी के लिए पुलिस के पास कड़ी कार्रवाई करना ही प्रमुख रास्ता बचा था। हाईकोर्ट बीते दिनों दो बार रामपाल के अदालत में उपस्थित नहीं होने पर अपनी नाराजगी जाता चुका था। बार-बार नोटिस के बाद भी वे अदालत के आदेश की अवमानना कर रहे थे। कुछ दिनों से पुलिस, प्रशासन और राज्य सरकार इस प्रयास में जुटी थी कि गिरफ्तारी के दौरान किसी तरह के टकराव की स्थिति पैदा न हो। इसके लिए पुलिस ने वह सारे कदम उठाए-जैसे आश्रम की बिजली, पानी का कनेक्शन काटने, राशन की आवाजाही रोकने से लेकर लोगों को आश्रम खाली करने के लिए समझाने तक।

उम्मीद की जा रही थी कि रामपाल बाहर आ जाएंगे और पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर देंगे, लेकिन इसके बावजूद भी हालात जस के तस बने रहे। मीडिया में आई खबरों में यह बात साफ हुई है कि आश्रम में रामपाल और उनके समर्थक बड़ी संख्या में लोगों को जबरन रोके हुए हैं। इस तरह रामपाल गिरफ्तारी से बचने के लिए महिलाओं और बच्चों को ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। रामपाल के पास अपनी हथियारबद्ध रक्षक हैं। जब पुलिस कार्रवाई कर रही थी तब देखा गया कि आश्रम की छत पर बड़ी मात्रा में पत्थर, लाठी और हथियार लेकर उनके समर्थक तैनात थे। पुलिस को देखते ही वे पत्थर और पेट्रोल बम से हमला करने लगे। यहां तक कि पुलिस पर गोली चलाई जाने की बात भी सामने आई है।

इस तरह टकराव की शुरुआत रामपाल के समर्थकों की ओर से हुई। उन्होंने ऐसे हालात पैदा किए कि टकराव की स्थिति बन गई। जहां हजारों की संख्या में लोग हों। खासकर जहां आस्था के नाम पर ऐसा जमावड़ा हो वहां इस तरह की कोई कार्रवाई आसान नहीं होती। बरवाला आश्रम में जो हालात पैदा हुए, उसके लिए पूरी तरह रामपाल का रवैया जिम्मेदार है। अलग-अलग अदालतें उनको 40 बार से अधिक पेश होने का नोटिस जारी कर चुकी हैं। वे हर बार अदालत के आदेश की अवहेलना करते रहे हैं। वे कानून और न्यायपालिका का एक तरह से माखौल उड़ा रहे हैं। कुछ हथियारबद्ध समर्थकों के दम पर यह दिखा रहे हैं वे देश के संविधान से ऊपर हैं। अंतत: मजबूर होकर पुलिस को ऐसी कार्रवाई करनी पड़ी है।

वहीं मीडिया के साथ जो कुछ हुआ है वह दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे हालात से बचा जा सकता है। पुलिस, प्रशासन को सही तरीके से ब्रीफिंग की जाए कि आॅपरेशन के समय मीडिया को बचा कर रखा जाए। मीडिया अपना दायित्व निभा रहा है, उसे रोकना या पीटना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। मीडिया का भी दायित्व बनता है कि ऐसे हालात में वो आॅपरेशन क्षेत्र से दूरी बनाकर काम करे। पुलिस में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो ऐसी स्थिति में अपना आपा खो देंं।

इससे बचाने के लिए पुलिस को टेÑनिंग देने की जरूरत होती है। अधिकांश देशों की पुलिस को इस तरह का प्रशिक्षण दिया जाता है। वहां बड़े आॅपरेशन के दौरान कम से कम क्षति होती है। दो साल पहले लंदन में दंगा हुआ था। वहां की पुलिस ने बिना किसी क्षति के हालात पर काबू पा लिया था। भारत में भी पुलिस को वैसा प्रशिक्षण मिलना चाहिए।

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