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कूटनीतिक मोर्चे पर करीब आते भारत-बांग्लादेश

संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में बुधवार को सर्वसम्मति से बांग्लादेश के साथ ऐतिहासिक जमीन समझौते से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पास हो गया।

कूटनीतिक मोर्चे पर करीब आते भारत-बांग्लादेश
संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में बुधवार को सर्वसम्मति से बांग्लादेश के साथ ऐतिहासिक जमीन समझौते से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पास हो गया। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों से मिले सहयोग को देखते हुए इस बात की पूरी उम्मीद है कि निम्न सदन यानी लोकसभा से भी यह आसानी से पारित हो जाएगा। उसके बाद भारत और बांग्लादेश के बीच चार दशक पहले हुए समझौते को अमलीजामा पहनाने का रास्ता साफ हो जाएगा। दरअसल, दो देशों के बीच जमीनों की अदला बदली होनी है, लिहाजा इसके लिए संविधान की प्रथम सूची, जिसमें प्रत्येक राज्य व संघशासित प्रदेश का क्षेत्र परिभाषित है, में संशोधन जरूरी है। दोनों देशों के बीच 1974 में ही इस पर समझौता हुआ था, लेकिन तब इस संधि की पुष्टि नहीं हो पाई थी। लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस की अगुआईवाली यूपीए सरकार के शासनकाल में 2011 में इस पर हस्ताक्षर हुए, लेकिन उसने इसको धरातल पर उतारने में बहुत ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई।
हालांकि दो साल बाद डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने राज्यसभा में 119वां संविधान संशोधन बिल 2013 पेश किया, लेकिन कांग्रेस तब विपक्ष में रही भाजपा, तृणमूल कांग्रेस और असम गण परिषद जैसे दलों की शंकाओं का समाधान करने में असफल रही परिणामस्वरूप विधेयक राज्यसभा में ही रुक रहा। पिछले साल मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद इस समझौते को लागू करने के लिए नए सिरे से कवायद शुरू हुई। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुआई वाली तृणमूल कांग्रेस को विश्वास में लिया गया। दरअसल, टीएमसी आने वाले लोगों के पुनर्वास का खर्च राज्य सरकार के सिर पड़ने को लेकर चिंतित थी। राजग सरकार ने इस विवाद के हल के लिए कहा है कि आने वाले लोगों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार को पैकेज दिया जाएगा। इस पूरे समझौते के तहत दोनों ओर से कुल 162 एनक्लेव की अदला बदली होनी है।
भारत के 111 एनक्लेव बांग्लादेश में हैं, जिसका क्षेत्रफल करीब 70 वर्ग किलोमीटर है। वहीं बांग्लादेश के 51 एनक्लेव भारत में हैं, जिसका क्षेत्रफल करीब 28 वर्ग किलोमीटर है। ये सारे एनक्लेव भारत के असम, पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा में हैं। आमतौर पर एनक्लेव के नाम से पुकारे जाने वाले जमीन के ऐसे टुकड़े हैं जो भारत के होने के बावजूद बांग्लादेश की सीमा से घिरे हैं। यही स्थिति बांग्लादेश के साथ है। एक बड़ा सवाल इनमें रहने वाले लोगों की नागरिकता को लेकर था। अब कहा गया है कि इन एनक्लेव में रहने वालों पर निर्भर करेगा कि वे किस देश की नागरिकता लेना चाहते हैं। यानी वे अपनी मर्जी से जहां चाहे जा सकते हैं। भारत में करीब 35 हजार लोगों के आने का अनुमान है। इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों को फायदा होगा। बांग्लादेश के साथ दशकों से सीमा विवाद की वजह से देश में अवैध घुसपैठ की समस्या बनी हुई है। अब उस पर लगाम लग सकेगा। वहीं इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को कई दैनिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वे भी अब दूर होंगी। कूटनीतिक लिहाज से भी इसका महत्व है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे।
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