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बेदाग नेताओं को क्यों सता रहा जांच का डर

भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी ही चाहिए। इसमें सरकार को पक्षपात नहीं करना चाहिए।

बेदाग नेताओं को क्यों सता रहा जांच का डर

अगर किसी को लगता है कि उसका दामन पाक-साफ है, उन्होंने सरकारी पदों पर रहते हुए कुछ भी गलत नहीं किया है, तो उन्हें जांच का सामना करने में डर क्यों लगता है? सीबीआई और आयकर विभाग के छापे को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम और लालू प्रसाद यादव जिस तरह स्यापा कर रहे हैं और मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं, उससे वे खुद सवालों के घेरे में आ रहे हैं।

दोनों ही नेताओं को लगता है कि अगर उन्होंने यूपीए सरकार में पद पर रहते हुए कुछ भ्रष्टाचार नहीं किया है, तो उनको डरने की जरूरत ही नहीं है। सरकारी एजेंसी को अपना काम करने देना चाहिए। वैसे बिना आग धुआं तो उठती नहीं है। लालू यादव 800 करोड़ का चारा घोटाला में जेल की हवा खा चुके हैं, ताजा ताजा उन पर जेल में बंद शहाबुद्दीन से कनेक्शन के आरोप लगे हैं।

चिदंबरम और उनके बेटे कार्ती चिदंबरम पर आईएनएस मीडिया व एयरसेल-मैक्सिस सौदे में लाभ लेने के आरोप लगते रहे हैं। इसलिए आज अगर छापे पड़े हैं, तो लालू व चिदंबरम के लिए अच्छा है कि जांच में देश को पता चल जाएगा कि उन्होंने कुछ गलत किया है या नहीं? दरअसल मोदी सरकार भ्रष्टाचार मुक्त शासन के संकल्प के साथ सत्ता में आई है।

2014 में प्रधानमंत्री पद संभालते ही नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले कालाधन के खिलाफ एसआईटी गठित की थी। तबसे सरकार भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ लगातार कदम उठा रही है। कानून और नियमों में बदलाव कर रही है। जनधन योजना शुरू करना, डीबीटी को व्यापक स्तर पर लागू करना, और सरकारी कामकाज में डिजिटल प्रयोग पर जोर देना भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान थे।

विमुद्रीकरण और नकदी रहित लेनदेन को बढ़ावा भी भ्रष्टाचार और काला धन के खिलाफ सरकार के कदम थे। सरकार की कोशिश है कि देश से भ्रष्टाचार के दीमक का सफाया हो। सरकार कालाधन मुक्त अर्थव्यवस्था के निर्माण की कोशिश कर रही है। इसी मंशा के साथ सरकार नियमों और कानूनों में भी बदलाव कर रही है और भ्रष्टाचार के संदेह में आने वाले लोगों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा रही है।

चाहे लालू प्रसाद यादव, उनके बेटी दामाद और उनके करीबी पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रेमचंद गुप्ता हों, या पी चिदंबरम व उनके बेटे कार्ती चिदंबरम, दोनों ही नेताओं से संबंधित ठिकानों पर सीबआई व आयकर विभाग के छापे भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम हैं। लालू के पास 1000 करोड़ की बेनामी संपत्ति का शक है। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम व उनके बेटे पर आईएनएक्स मीडिया को दी गई मंजूरी में धांधली का आरोप है।

आईएनएक्स मीडिया के मुखिया कभी पीटर मुखर्जी हुआ करते थे जो शीना बोरा मर्डर केस में आरोपी हैं। कार्ती चिदंबरम पर एयरसेल-मैक्सिस डील में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। उनके दफ्तरों पर पहले भी छापे पड़ चुके हैं। सवाल है कि लालू के पास एक हजार करोड़ की बेनामी संपत्ति कहां से आई है? इस संपत्ति का अर्जन लालू के रेलमंत्री के समय का बताया जा रहा है।

उनके बेटे मंत्री तेज प्रताप पर भी बिहार में भूमि घोटाले का आरोप लगा है। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से भी सीबीआई व ईडी ने भ्रष्टाचार मामले में हाल में पूछताछ की है। कांग्रेस नेता सुरेश कलमाड़ी, अशोक चव्हाण, वीरभद्र सिंह, द्रमुक नेता ए राजा, सपा नेता मुलायम सिंह यादव, बसपा मुखिया मायावती पर कदाचार के आरोप लग चुके हैं।

सवाल है कि नेता कब तक अपने पद का फायदा उठाकर भ्रष्टाचार करते रहेंगे? वे कब तक जनता के विश्वास का गला घोंटते रहेंगे? ऐसा कब तक चलेगा? भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी ही चाहिए। इसमें सरकार को पक्षपात नहीं करना चाहिए। सत्ताधारी नेता भी अगर कदाचार में लिप्त पाए जाते हैं, तो सरकार को उनके खिलाफ जांच का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।

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