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जानिए कौन बन रहा है भारत के विकास में रोड़ा

कौन हैं, जिन्होंने संसद नहीं चलने दी। जिन्होंने नए कानून नहीं बनने दिए। जो योजनाओं में बाधा पहुंचा रहे हैं। कौन हैं, जो सड़कों पर जाम लगा रहे हैं। पुतले फूंक रहे हैं। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कौन लोग हैं, जो विकास कार्यों में रोड़ा अटका कर विकास का मार्ग अवरूद्ध करने पर आमादा हैं।

जानिए कौन बन रहा है भारत के विकास में रोड़ा

कौन हैं, जिन्होंने संसद नहीं चलने दी। जिन्होंने नए कानून नहीं बनने दिए। जो योजनाओं में बाधा पहुंचा रहे हैं। कौन हैं, जो सड़कों पर जाम लगा रहे हैं। पुतले फूंक रहे हैं। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कौन लोग हैं, जो विकास कार्यों में रोड़ा अटका कर विकास का मार्ग अवरूद्ध करने पर आमादा हैं। कौन हैं, जो गरीब को गरीबी से बाहर लाने के लिए किए जा रहे प्रयासों में पलीता लगाने की चेष्टा कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संसद सत्र को बाधित होते हुए देखते रहे। कुछ नहीं बोले। पूरे चौबीस दिन तक विरोधी दलों ने दोनों सदनों में काम काज नहीं होने दिया। सिर्फ चार विधेयक पारित हो सके। आमतौर पर विधायी कार्यों में विपक्ष भी कभी बाधक नहीं बनता है परंतु इस सत्र में ऐसा हुआ। इसी की पीड़ा कहीं न कहीं मंगलवार को बिहार के मोतीहारी में प्रधानमंत्री ने जाहिर करते हुए विपक्ष के रवैये पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए देश के सामने कुछ सवाल रखे हैं।

महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह के सौ साल पूरे होने पर मोतिहारी में एक कार्यक्रम किया गया था, जिसमें प्रधानमंत्री के अलावा बिहार के राज्यपाल सत्यपाल मलिक और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित केन्द्र के कई मंत्री मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कई योजनाओं की शुरुआत की। कुछ की नींव रखी और खासतौर से स्वच्छ अभियान पर फोकस करते हुए देश का आह्वान किया कि गांधी जी के स्वच्छ भारत के स्वप्न को साकार करने के लिए एकजुट प्रयास करें।

प्रधानमंत्री हाल की घटनाओं से दुखी नजर आए। जिस तरह दलितों को मुद्दा बनाकर कुछ विरोधी दलों ने कई राज्यों में भारत बंद का आयोजन कर हिंसा की, उसकी कड़ी निंदा करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी सरकार जिस तरह के बदलाव देश में लाने के प्रति प्रतिबद्धता से काम कर रही है, उससे विरोधी दलों को दिक्कतें हो रही हैं। वो इस बदलाव को पचा नहीं कर पा रहे हैं। गरीब को सशक्त होते नहीं देख पा रहे हैं। उन्हें लगता है कि गरीब अगर मजबूत हो गया तो झूठ नहीं बोल पाएंगे।

इसलिए सड़क से लेकर संसद तक सरकार के काम में रोड़े अटकाए जा रहे हैं। दरअसल, पिछले कुछ वर्षों के घटनाक्रम को देखें तो साफ पता लगता है कि विपक्ष, खासकर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अब तेलुगू देशम और एआईडीएमके के निशाने पर सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं। जिस तरह एक के बाद एक राज्यों में भाजपा की सरकारें बनती जा रही हैं, उससे विरोधी दलों में हड़कंप की स्थिति है।

पश्चिम बंगाल, तमिलनाड़ु, केरल, उड़ीसा जैसे उन राज्यों में भी भाजपा का जनाधार बढ़ रहा है, जहां कुछ साल पहले तक उसका कोई प्रभाव नहीं था। पूर्वोत्तर के सात में से छह राज्यों पर उसका अथवा उसके सहयोगियों का कब्जा है। कांग्रेस केवल पंजाब, पांडुचेरी, मिजोरम और कर्नाटक तक सिमट कर रह गई है। कर्नाटक में चुनावी रणभेरी बज चुकी है। यही कारण है कि राहुल गांधी दलितों के कथित उत्पीड़न को लेकर प्रधानमंत्री पर आक्रमण कर रहे हैं।

वहां लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने का दांव भी कांग्रेस ने खेला है। सुप्रीम कोर्ट ने दलित एक्ट पर टिप्पणी की है परंतु कांग्रेस के निशाने पर वह मोदी सरकार है, जिसने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और व्यवस्था से असहमति जाहिर की है। साफ है कि राजनीतिक फायदे के लिए जानबूझकर ऐसे टकराव के हालात पैदा किए जा रहे हैं,

जिससे विभिन्न जातियों के बीच भी टकराव की नौबत पैदा हो रही है। इससे न केवल शांति भंग हो रही है, बल्कि कानून और व्यवस्था भी सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। जब ऐसे हालात बना दिए जाते हैं, तब विकास कार्य भी प्रभावित होते हैं। यही बात प्रधानमंत्री ने मोतीहारी की सभा में कही है कि विपक्ष जान बूझकर विकास कार्यों में रोड़ा अटकाने का काम कर रहा है।

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