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जानिए बलात्कार के मामले में सजा का क्या है प्रावधान

भारत दुनिया के ऐसे देशों में शुमार है, जहां बालिकाओं के साथ भी बलात्कार की घटनाएं बहुत ज्यादा होती हैं और ऐसा नहीं है कि यह शर्मनाक वारदातें कोई दो चार साल में ही बढ़ी हों, बहुत लंबे समय से यह घिनौनी घटनाएं जारी हैं। दूर-दराज के इलाकों में होने के चलते अधिकांश घटनाओं की चर्चा ही नहीं हो पाती।

जानिए बलात्कार के मामले में सजा का क्या है प्रावधान
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भारत दुनिया के ऐसे देशों में शुमार है, जहां बालिकाओं के साथ भी बलात्कार की घटनाएं बहुत ज्यादा होती हैं और ऐसा नहीं है कि यह शर्मनाक वारदातें कोई दो चार साल में ही बढ़ी हों, बहुत लंबे समय से यह घिनौनी घटनाएं जारी हैं। दूर-दराज के इलाकों में होने के चलते अधिकांश घटनाओं की चर्चा ही नहीं हो पाती। बहुत सी वारदातों को इसलिए कानून के दायरे तक नहीं पहुंचने दिया जाता, क्योंकि उनमें कोई नजदीकी ही शामिल होता है अथवा कई बार लोभ लालच देकर पीड़ित परिवार का मुंह बंद कर दिया जाता है।

बलात्कार ऐसा जघन्य अपराध है, जो किसी मासूम के शरीर पर ही नहीं, मन मस्तिष्क पर भी बहुत गहरा असर छोड़ जाता है। चूंकि घटना किसी बालिका अथवा बालिग युवती के साथ होती है, इसलिए अक्सर समाज इसे दूसरा मोड़ देकर लड़की और उसके परिवार के साथ गलत व्यवहार करने लगता है, जबकि होना चाहिए इसके उलट। जिसने बलात्कार जैसी घिनौनी घटना को अंजाम दिया है, ऐसे व्यक्ति अथवा उसका बचाव करने वाले लोगों को शर्मिंदा किया जाना चाहिए ताकि आगे से बाकी लोगों को सबक मिले और वह ऐसी हरकतें करने से पहले सौ बार सोचें।

इस पर चर्चा के दौरान लोग कई तरह के तर्क-कुतर्क देने लगते हैं, परंतु बलात्कार जैसी जघन्य घटनाओं के कारणों में जाने से पहले, अच्छा होगा कि समाज लड़कियों को लेकर अपनी सोच बदले। यदि वह ऐसा कर पाता है तो इस समस्या से बाहर आने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। बहुत लंबे समय से मांग की जा रही थी कि मासूम बच्चियों के साथ बलात्कार करने वालों को सबसे सख्त सजा देने का कानून सरकार बनाए, परंतु बहुत से संगठन इसके विरोध में भी थे। उनका कहना था कि ऐसा कानून बनने पर बलात्कारी खुद को बचाने के लिए बलात्कार पीड़िता की जान लेने की कोशिश कर सकता है,

ताकि अदालत में वह गवाही देने के लिए रहे ही नहीं। बहुतों का कहना था कि कुछ दूसरे जघन्य अपराधों में फांसी दिए जाने का प्रावधान है, परंतु उससे वैसे अपराध कहां रुक पाए हैं। कई बार गवाह नहीं मिलते। कई बार वे बयान से मुकर जाते हैं। कई बार दूसरे कारणों से दोषियों को सजा नहीं हो पाती है। सबके अपने तर्क थे, परंतु कठुआ में हाल में बच्ची के साथ हुई इस अमानवीय घटना के बाद देशव्यापी मांग के बाद आखिरकार केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने अध्यादेश के जरिए इसे लागू करने का फैसला ले ही लिया है।

बारह साल से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार के मामलों में दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को मृत्युदंड सहित सख्त सजा देने संबंधी अध्यादेश को रविवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी मंजूरी दे दी। केंद्रीय कैबिनेट ने शनिवार को उस अध्यादेश को अपनी स्वीकृति दी थी, जिसके तहत बारह साल से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार करने के दोषी ठहराए गए व्यक्ति के लिए अदालत को मृत्युदंड की सजा की इजाजत दी गई है। अब आपराधिक कानून (संशोधन) अध्यादेश 2018 के अनुसार ऐसे मामलों से निपटने के लिए नई त्वरित अदालतें गठित की जाएंगी और सभी पुलिस थानों एवं अस्पतालों को बलात्कार मामलों की जांच के लिए विशेष फॉरेंसिक किट उपलब्ध कराई जाएगी।

इसमें 16 एवं 12 साल से कम उम्र की लड़कियों से बलात्कार के मामलों में दोषियों के लिए सख्त सजा की अनुमति है। बारह साल से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार के दोषियों को मौत की सजा देने की बात इस अध्यादेश में कही गई है। महिलाओं से बलात्कार मामले में न्यूनतम सजा सात साल से 10 साल सश्रम कारावास की गई जो अपराध की प्रवृत्ति को देखते हुए उम्रकैद तक भी बढ़ाया जा सकता है। 16 साल से कम उम्र की लड़कियों से सामूहिक बलात्कार के दोषी के लिए उम्रकैद की सजा का प्रावधान बरकरार रहेगा।

16 साल से कम उम्र की लड़कियों के बलात्कार मामले में न्यूनतम सजा 10 साल से बढ़ाकर 20 साल की गई और अपराध की प्रवृत्ति के आधार पर इसे बढ़ाकर जीवनपर्यंत कारावास की सजा भी किया जा सकता है। यानी दोषी को मृत्यु होने तक जेल की सजा काटनी होगी। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), साक्ष्य अधिनियम, आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और यौन अपराधों से बाल सुरक्षा (पोक्सो) अधिनियम को अब संशोधित माना जाएगा।

इस अध्यादेश में मामले की त्वरित जांच एवं सुनवाई की भी व्यवस्था है अधिकारियों ने बताया कि बलात्कार के सभी मामलों में सुनवाई पूरी करने की समय सीमा दो माह होगी। साथ ही 16 साल से कम उम्र की लड़कियों से बलात्कार या सामूहिक बलात्कार के आरोपी व्यक्ति को अंतरिम जमानत नहीं मिल सकेगी।

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