Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

भ्रष्टाचार के खिलाफ कुछ करके दिखाएं केजरीवाल

केंद्र के साथ नूराकुश्ती से आगे नहीं बढ़ पा रहे केजरी

भ्रष्टाचार के खिलाफ कुछ करके दिखाएं केजरीवाल

भ्रष्टाचार के खिलाफ 'हल्ला बोल' के वादे के साथ सत्ता में आई आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार का दामन भी दागदार होने से नहीं बचा। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने आप के मुखिया सीएम अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेन्द्र कुमार समेत पांच लोगों को 50 लाख रुपये के घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किया है। 1989 बैच के आईएएस अफसर राजेंद्र कुमार पर अपने पद का दुरुपयोग कर अपने से संबंधित कंपनी को ठेका देने का लाभ पहुंचाने का आरोप लगा है।

खास बात यह है कि राजेंद्र कुमार केजरीवाल के नजदीकी माने जाते हैं। जब केजरीवाल दोबारा सत्ता में आए, तब उन्होंने राजेंद्र कुमार को अपना प्रधान सचिव बनाया। कुमार भी केजरी की तरह ही आईआईटी के छात्र रह चुके हैं। इस मायने में कुमार पर करप्शन का आरोप लगना केजरीवाल की राजनीति को कटघरे में खड़ा करता है।

देश के जनमानस को वर्ष 2012 के वो दिन बखूबी याद होंगे, जब केजरीवाल समाजसेवी अण्णा हजारे के साथ मिलकर भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा आंदोलन कर रहे थे। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में इससे पहले भ्रष्टाचार के खिलाफ इतना बड़ा आंदोलन कभी नहीं हुआ था। देश के करोड़ों युवा इस आंदोलन के साथ खड़े थे। अरविंद केजरीवाल और अण्णा हजारे की जोड़ी कदाचार के खिलाफ मसीहाई इंकलाबी चेहरा बन गई थी।

लग रहा था जैसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सैलाब आ गया हो। केजरीवाल बड़े-बड़े वादे कर रहे थे। परिवारवाद, भाई-भतीजावाद, जातिवाद, सांप्रदायिकता और भ्रष्टाचार में जकड़ी राजनीति को साफ-सुथरा पारदर्शी बनाने का संकल्प ले रहे थे। कदाचार में आकंठ डूबी नौकरशाही में बदलाव लाने की बात कह रहे थे। भ्रष्ट शासनतंत्र से त्रस्त जनता को उनपर भरोसा जम रहा था। खुद केजरीवाल ने समाजसेवी अरुणा राय के साथ मिलकर आरटीआई (सूचना के अधिकार) के लिए आवाज बुलंद की थी, जिसके बाद देश में आरटीआई कानून लागू हुआ।

भ्रष्टाचार के खिलाफ आरटीआई कानून जनता को बड़ा हथियार मिला था। इस नाते लोगों में उम्मीद जगी कि केजरीवाल देश से भ्रष्टाचार का खात्मा कर सकते हैं। अरविंद ने भी अपने पक्ष में तैयार जनमानस को भुनाने के मकसद से राजनीति में उतरने का सोचा-समझा फैसला किया। इस तरह आंदोलन की कोख से आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ। तब अण्णा हजारे ने केजरी का साथ छोड़ दिया।

पूर्व सरकारों के भ्रष्टाचार से त्रस्त दिल्ली की जनता ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता आप को सौंप दी। लेकिन अरविंद केजरीवाल सत्ता संभालने के पहले दिन से ही केंद्र के साथ टकराव में उलझने लगे। उनके कई मंत्रियों पर तरह-तरह के आरोप लगे। कई आप विधायक संगीन आपराधिक मामलों में लिप्त पाए गए। जो केजरीवाल भ्रष्टाचार मिटाने की बात करते थे, वही सीएम बनने के बाद नियमों को ताक पर रखकर अपने 21 विधायकों को ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का लाभ दिया।

एंटी करप्शन ब्यूरो ने आप सरकार के मंत्री कपिल मिर्शा से पूछताछ की है। अब सीएम केजरीवाल के प्रधान सचिव गिरफ्तार किए गए हैं। इन सभी उदाहरणों को देख कर कहा जा सकता है कि केजरीवाल की सरकार भी पूर्व की सरकारों की तरह ही निकली। केजरी के सभी वादे भी 'डींगें' ही साबित हो रहे हैं। वे केंद्र के साथ नूराकुश्ती से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। अपनी हर नाकामी के लिए पीएम मोदी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, जबकि उन्हें दिल्ली में सुशासन का मॉडल स्थापित करना चाहिए था, ताकि जनता खुद को छला हुआ महसूस नहीं करे। आगे पंजाब और गोवा में तभी सफलता मिलेगी, जब लोग दिल्ली में आप सरकार के कामकाज के चलते बदलाव देखेगा।

Next Story
Top