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कश्मीर में अशांति के मंसूबे सफल नहीं होंगे

एशिया की सबसे बड़ी सुरंग को जब प्रधानमंत्री जनता को समर्पित कर रहे थे, ठीक उसी दौरान आतंकियों ने श्रीनगर के नौहट्टा के पुलिस थाने पर हमला कर दिया।

कश्मीर में अशांति के मंसूबे सफल नहीं होंगे
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सरकार की तरफ से कश्मीर में जब भी विकास की बात होती है या शांति की पहल की जाती है, तब ध्यान भटकाने के लिए आतंकी हमले किए जाते हैं।

एक दिन पहले रविवार को जम्मू और कश्मीर को जोड़ने वाली राजमार्ग पर देश ही नहीं एशिया की सबसे बड़ी सुरंग को जब प्रधानमंत्री जनता को समर्पित कर रहे थे, ठीक उसी दौरान आतंकियों ने श्रीनगर के नौहट्टा के पुलिस थाने पर हमला कर दिया।

इसमें एक पुलिस जवान शहीद हो गया। सोमवार को भी श्रीनगर में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमला हुआ। इसमें एक महिला के अलावा 6 सीआरपीएफ जवान घायल हो गए। ये काफिला शहर के पंथा चौक से गुजर रहा था, तभी आतंकियों ने हमला बोल दिया।

ये जवान चुनावी सामग्री लेकर जा रहे थे। इसका मतलब है कि श्रीनगर में होने वाले उप चुनावों में खलल डालने के लिए आतंकियों ने हमला किया है। पहली बार नहीं है जब आतंकियों ने कश्मीर में चुनावों के दौरान सुरक्षा बलों पर हमला किया हो।

वहां चाहे विधानसभा के चुनाव हों या लोकसभा के आतंकी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जरूर बाधा डालते हैं। कश्मीर में आतंकी हर पल जताने की कोशिश करते हैं कि हालात खराब हैं, सब कुछ ठीक नहीं हैं, लेकिन वहां चुनाव भी सफलतापूर्वक होते हैं, सरकार का गठन भी होता है और विकास योजनाएं भी सुचारू रूप से चलती रहती हैं।

कश्मीर में अधिकतर लोग अमन चाहते हैं, लेकिन भाड़े के चंद लोग हैं, घाटी में अशांति फैलाते हैं। अब तो कई रपटों में खुलासा हो चुका है कि पत्थरबाजी भाड़े के लोग ही कर रहे हैं। सीमा पार में बैठे आतंकी गुटों के इशारों पर वे कश्मीर में पत्थरबाजी करते हैं। उधमपुर रैली में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा भी कि कश्मीरी युवाओं को तय करना है कि उन्हें टूरिज्म चुनना है या टेररिज्म।

कश्मीर में ही कुछ भटके नौजवान पत्थरबाजी में लगे हुए हैं तो अधिकांश नौजवान सुरंग बनाने जैसी विकास योजनाओं को अंजाम दे रहे हैं। दरअसल हिज्बुल आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कश्मीर के पर्यटन पर विपरीत असर पड़ा है। पिछले करीब छह माह में घाटी में पर्यटन को तीन हजार करोड़ से अधिक की चपत लगी है।

इसमें कोई दोराय नहीं कि कश्मीर को अशांत बनाए रखने के पीछे बाहरी ताकतों का हाथ है। पाकिस्तान के अलावा मध्य एशिया और पर्दे के पीछे चीन बाहरी ताकतें हैं। पाकिस्तान कभी नहीं चाहता है कि कश्मीर में आतंक की धार कुंद हो। वह इसके लिए आतंकी गुट लश्कर और जैश को पाल रहा है।

हालांकि कश्मीर में लगातार हिंसा फैलाने व उपद्रव कराने के बावजूद वहां विकास की गति, अमन की कोशिशों व सुरक्षा बलों के मनोबलों को नहीं तोड़ पाने के चलते पाक से ऑपरेट कर रहे आतंकी गुटों में हताशा भी बढ़ रही है। लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद और कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी के बीच अनबन होने की बात सामने आ रही है।

लश्कर नहीं चाहता है कि कश्मीर के आतंकी हमले में उसका नाम आए। कश्मीर के किसी बड़े अलगाववादी नेता की हत्या करवा कर लश्कर वहां अशांति को और भड़काने की फिराक में है। भारत लगातार सतर्क है और आतंकियों के मंसूबों को सफल नहीं होने दे रहा है।

कश्मीर के हालात पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सभी उच्च स्तरीय बैठक भी हुई है। इससे साफ है कि भारत कश्मीर में शांति बहाली की पुरजोर कोशिश कर रहा है। भारत वहां हर हाल में आतंकी हिंसा का खात्मा चाहता है। ऐसे में भटके कश्मीरी युवाओं को सोचना चाहिए कि वे हिंसा से कुछ भी हासिल नहीं कर सकेंगे।

उन्हें पाक अधिकृत कश्मीर की दुर्दशा देखकर भी पाकिस्तान के नापाक मंसूबों का शिकार नहीं बनना चाहिए। कश्मीर को अशांत करने की कोशिश में लगे सभी आतंकी गुटों व बाहरी ताकतों को समझ लेनी चाहिए कि भारत कभी भी उनके हिंसा व अशांति फैलाने मंसूबों को सफल नहीं होने देगा।

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