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पाकिस्तान कश्मीर के बहाने भारत में फैला रहा है अशांति, पीएम मोदी ने बनाया ये मास्टर प्लान

पाकिस्तान कश्मीर को अशांत रखकर विश्व का ध्यान आकृष्ट करने की सतत कोशिश करता रहा है।

पाकिस्तान कश्मीर के बहाने भारत में फैला रहा है अशांति, पीएम मोदी ने बनाया ये मास्टर प्लान

पाकिस्तान कश्मीर को अशांत रखकर विश्व का ध्यान आकृष्ट करने की सतत कोशिश करता रहा है। उस समय ज्यादा जब भारत की ओर से शांति की पहल की जा रही हो, या जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुस्लिम देशों की यात्रा पर हों। तीन दिन में सुरक्षा बलों के कैंप पर पाक आतंकी गुट द्वारा दो हमले और पिछले सप्ताह चार दिनों तक लगातार पाक फौज द्वारा एलओसी पर संघर्षविराम का उल्लंघन पाकिस्तान के कश्मीर को अशांत रखने के ही प्रयास हैं।

आतंकवाद को पालने-पोसने के चलते पाकिस्तान विश्व स्तर पर इतना अलग-थलग पड़ गया है कि एक राष्ट्र के रूप वह अविश्वसनीय होता जा रहा है। अब विश्व का कोई भी राष्ट्र उसे महत्व नहीं दे रहा है। कश्मीर में सीजफायर उल्लंघन और आतंकी हमले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुस्लिम देशों की यात्रा से जोड़ कर देखा जा रहा है। पीएम मोदी ने जॉर्डन होते हुए फिलिस्तीन, यूएई और ओमान की चार दिवसीय यात्रा की है। ये चारों मुस्लिम मुल्क हैं।

पाकिस्तान की कुंठा यह है कि कश्मीर मसले पर उसे किसी मुस्लिम देश का भी साथ नहीं मिल रहा है। जॉर्डन में जिस तरह मोदी का स्वागत हुआ, फिलिस्तीन ने पीएम मोदी को अपना सर्वोच्च सम्मान दिया, कई अहम समझौते किए, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने मोदी को वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट का मुख्यातिथि बनाया, भारत के साथ 4000 करोड़ रुपये की सबसे बड़ी तेल डील की, यूएई में मंदिर निर्माण शुरू किया और ओमान ने भी मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया।

भारत के साथ कई समझौते किए, इसके साथ ही इस यात्रा के दौरान किसी भी मुस्लिम देश ने पाकिस्तान की सोच के मुताबिक भारत के सामने कश्मीर का मुद्दा नहीं उठाया, उसे देखकर पाकिस्तान का हताश होना लाजिमी है। पाकिस्तान को हमेशा वहम रहता है कि कश्मीर मसले पर मुस्लिम देश उसके साथ रहेंगे, लेकिन इसके उलट अधिकांश मुस्लिम देशों के भारत के साथ मधुर ताल्लुकात है।

यहां तक कि आतंकी अजहर मसूद के मुद्दे पर सदा पाक का साथ देने वाला दोस्त चीन भी कश्मीर मसले पर उसके साथ नहीं है। सऊदी अरब जो आतंकवाद के खात्मे के लिए 34 मुस्लिम देशों के गुट का नेतृत्व कर रहा है और जिसकी कमान पाक के पूर्व सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी संभाल रहे हैं, उसके भी भारत के साथ प्रगाढ़ संबंध हैं। पाकिस्तान को यही चिंता सताती रहती है।

संयुक्त राष्ट्र में भी कश्मीर मसले को लेकर पाकिस्तान को कभी तवज्जो नहीं मिलता है। यूएन के सभी सदस्य देशों को पता है कि कश्मीर पर पाक विश्व के सामने गलत तथ्य रखता है। उल्टे पाक कश्मीर के एक हिस्से पर अवैध कब्जा जमाया हुआ है और यूएन समझौते के मुताबिक वह पीओके भारत को नहीं लौटा रहा है। विश्व यह भी जानता है कि भारत ने कभी भी किसी मुल्क पर हमला नहीं किया है,

पाक ने ही चार बार भारत को जबरन युद्ध में घसीटा है और हर बार उसे भारत से हार मिली है। विश्व के सामने पाक का मुस्लिम तर्क भी नहीं काम करता है, क्योंकि भारत में पाकिस्तान से ज्यादा मुस्लिम आबादी है। इधर भारतीय सेना के ऑपरेशन ऑल आउट के चलते कश्मीर में जिस तेजी से आतंकियों का सफाया हो रहा है, इससे भी पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पिछले साल 200 से ज्यादा आतंकी मारे गए हैं।

हिज्बुल कमांडर बुरहान वानी के सेना के साथ मुठभेड़ में मारे जाने के बाद से करीब दो साल में 300 से ज्यादा आतंकी ढेर हुए हैं। इस साल भी अब तक करीब 18 आतंकी मौत के घाट उतारे जा चुके हैं। इससे पाकिस्तान के हौसले पस्त हैं। वह कश्मीर में अशांति, हिंसा, उपद्रव मचाने व आतंकी हमले करने की अपनी बची-खुची कोशिश कर रहा है। भारत की नीति स्पष्ट है कि पाकिस्तान पहले आतंकवाद का रास्ता छोड़े, फिर शांति वार्ता टकी मेज पर आए।

भारत इसकी पहल भी कर रहा है, पर पाक फौज व पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई की दिलचस्पी पाक सरकार को शांति वार्ता तक नहीं पहुंचने देने में है। संघर्ष विराम उल्लंघन व सैन्य कैंप पर आतंकी हमले इसी के नतीजे हैं। ये हमले पाकिस्तान की मुस्लिम मुल्क समेत विश्व बिरादरी का ध्यान कश्मीर की ओर खींचने की असफल कोशिश ही हैं।

भारत पाक से वार्ता के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन पहले पाकिस्तान सरकार को कश्मीर में अशांति फैलाना बंद करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ठीक ही कहा है कि जंग नहीं वार्ता से कश्मीर मसले हल होंगे। पाकिस्तान को यह बात समझनी होगी। उसे छद्म युद्ध बंद करना पड़ेगा। भारत तब तक पाक को मुंहतोड़ जवाब देता रहेगा।

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