Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

कर्नाटक चुनाव 2018: प्रधानमंत्री पद की दावेदारी और जमीनी वास्तविकताएं- 10 बड़ी बातें

भारत एक लोकतांत्रिक देश है। यहां हर स्तर पर चुनाव की एक लोकतांत्रिक व्यवस्था एवं प्रणाली है। गांवों, पंचायतों, निकायों से लेकर विधानसभा, लोकसभा, विधान परिषदों, राज्यसभा और राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति तक के चुनाव की एक तय प्रक्रिया और व्यवस्था है। भारत के निर्वाचन आयोग में जो राजनीतिक दल पंजीकृत हैं, उनमें दल के अध्यक्ष और दूसरे पदाधिकारियों को चुनने की एक निश्चित प्रक्रिया है, जिसे पूरा करना होता है।

कर्नाटक चुनाव 2018: प्रधानमंत्री पद की दावेदारी और जमीनी वास्तविकताएं- 10 बड़ी बातें
X

भारत एक लोकतांत्रिक देश है। यहां हर स्तर पर चुनाव की एक लोकतांत्रिक व्यवस्था एवं प्रणाली है। गांवों, पंचायतों, निकायों से लेकर विधानसभा, लोकसभा, विधान परिषदों, राज्यसभा और राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति तक के चुनाव की एक तय प्रक्रिया और व्यवस्था है। भारत के निर्वाचन आयोग में जो राजनीतिक दल पंजीकृत हैं, उनमें दल के अध्यक्ष और दूसरे पदाधिकारियों को चुनने की एक निश्चित प्रक्रिया है, जिसे पूरा करना होता है।

हालांकि इन लोकतांत्रिक तौर तरीकों का अपने वर्चस्व को बनाए रखने के लिए देश के कुछ चुनींदा घराने और खानदान किस तरह तोड़-मरोड़कर इस्तेमाल करते आ रहे हैं, यह भी किसी से नहीं छिपा नहीं है। किसी परिवार विशेष के नेता को पहले से तय रणनीति के अनुसार किस प्रकार सर्वोच्च पदों पर आसीन कर दिया जाता है, यह सर्वविदित है।

आमतौर पर नेता चुनने की जो व्यवस्था चली आ रही है, वह यही है कि किसी राज्य में चुनाव के बाद जिस पार्टी को बहुमत मिलता है, उसके चुने हुए विधायक बैठक करते हैं और सर्वसम्मति अथवा वोटिंग से नेता का चुनाव करते हैं, जो मुख्यमंत्री पद की शपथ लेता है। यही प्रक्रिया आमतौर पर केन्द्र सरकार के लिए अपनायी जाती है।

कई बार राजनीतिक दल अथवा गठबंधन प्रधानमंत्री कौन होगा, इसकी घोषणा चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले कर देते हैं। कुछ नहीं करते हैं। दोनों ही स्थितियों में परिणाम आने के बाद चुनकर आने वाले सांसद बैठक करते हैं। अपना नेता चुनते हैं और जिस दल अथवा गठबंधन को बहुमत मिलने के उपरांत राष्ट्रपति सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं, उसका सांसदों द्वारा चुना गया नेता प्रधानमंत्री पद की शपथ लेता है।

चुनाव से पहले यदि कोई दल अथवा गठबंधन किसी नेता को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार नामित करता है, तब भी ऐसा करने की एक सामान्य सी प्रक्रिया है। उस दल के संसदीय बोर्ड की बैठक होती है। उसमें नेता के नाम पर मुहर लगती है। यदि गठबंधन भी है तो उसके सभी दल इकट्ठा बैठते हैं। वह भी उसे अपना नेता चुनते हैं।

सितंबर 2013 में पहले भाजपा ने और उसके बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने बाकायदा नरेन्द्र मोदी को लोकसभा चुनाव के लिए अपना नेता घोषित करते हुए भावी प्रधानमंत्री के तौर पर नामित किया था। इसके बावजूद वह पूरे चुनाव यही कहते रहे कि इस देश की महान जनता यदि उन्हें सेवा का अवसर देगी तो वह प्रधान सेवक के रूप में चौबीसों घंटे-दिन रात काम करके दिखाएंगे।

आमतौर पर चुना गया नेता यह दावा नहीं करता है कि आने वाले चुनाव में वही देश का प्रधानमंत्री बनने जा रहा है। ऐसे में तो बिल्कुल भी नहीं, जबकि न पार्टी के संसदीय बोर्ड ने उसे नामित किया हो और न गठबंधन के बाकी सहयोगी दलों ने परंतु यह सारी परिपाटियां, प्रक्रियाएं और व्यवस्थाएं लगता है, बदलते दौर में ध्वस्त होती जा रही हैं।

पदों को लेकर पाली जाने वाली महत्वाकांक्षाओं ने तय परंपराओं को भी धता बता दी है। कुछ ही समय पहले वंशवादी परंपरा के हिसाब से मां के बाद कांग्रेस ने उनके ही बेटे राहुल गांधी को पार्टी की कमान सौंपी है। कर्नाटक चुनाव प्रचार के दौरान मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने जिस तरह 2019 के आम चुनाव के बाद प्रधानमंत्री बनने का दावा किया है, उससे यह सवाल उठे हैं कि ऐसा दावा वह किस आधार पर कर रहे हैं।

पहली बात तो यह है कि अभी कांग्रेस ने भी औपचारिक रूप से उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। दूसरे, यपीए के सहयोगी दलों ने भी ऐसा कुछ नहीं कहा है। इसके बावजूद यदि वह कहते हैं कि कांग्रेस सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी तो वह प्रधानमंत्री बनेंगे तब सोचना पड़ता है कि पंद्रह साल से सक्रिय राजनीति में होने के बावजूद अभी तक भी उनमें वह परिपक्वता नहीं आई है,

जिसकी अपेक्षा राष्ट्रीय स्तर की राजनीति करने वाले किसी नेता से की जाती है। इसके अलावा वह इस जमीनी हकीकत को कैसे झुठला सकते हैं कि कांग्रेस ग्यारह राज्यों की सत्ता खो चुकी है और अब मात्र तीन छोटे राज्यों में सिमटकर रह गई है। वह बहुमत कहां से लाएंगे ?

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top