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चिंतन: घाटी के हित में निर्णय लें पीडीपी और भाजपा

जेके भाजपा विधायकों ने कहा है वे मंगलवार को राज्यपाल से मिलेंगे।

चिंतन: घाटी के हित में निर्णय लें पीडीपी और भाजपा

जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक असमंजस बरकरार है। विस चुनाव में राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी पीडीपी सरकार बनाने पर फैसला नहीं कर पा रही है। जिसके चलते राज्य 10 महीने के बाद अचानक चुनी हुई सरकार विहीन है और राज्य में एक बार फिर राज्यपाल शासन है। दरअसल, पिछले दस महीने से पीडीपी और भाजपा गठबंधन की सरकार थी, लेकिन मुख्यमंत्री रहते हुए मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद पीडीपी की मुखिया महबूबा मुफ्ती भाजपा के साथ गठबंधन जारी रखने से कतरा रही हैं। जिसके चलते राज्य में सरकार गठन की प्रक्रिया लगातार लटकी हुई है। गठबंधन को लेकर भाजपा की तरफ से कभी कोई शर्त या नकारात्मक संदेश भी नहीं आया है, जिसके चलते पीडीपी पर कोई दबाव हो। फिर भी पीडीपी टालमटोल करती दिख रही है। विधानसभा चुनाव में पीडीपी 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी और भाजपा 25 सीटों के साथ दूसरी बड़ी पार्टी बनी थी और वैचारिक मतभेदों के बावजूद दोनों दलों ने एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम (सीएमपी) के तहत गठबंधन किया था, जिसमें पीडीपी के हिस्से में सीएम का पद और भाजपा के खाते डिप्टी सीएम की आया था। आतंकवाद के लिहाज से संवेदनशील राज्य जम्मू-कश्मीर में गठबंधन सरकार ठीक चल रही थी। पर बीच में ही सीएम मुफ्ती सईद का निधन हो गया और पीडीपी की कमान महबूबा मुफ्ती के हाथ आ गई। महबूबा ने पहले कहा कि चार दिनों के शोक के बाद वह सरकार बनाएंगी। चार दिन बीत गए, लेकिन सरकार नहीं बनाई। अब तीन हफ्ते बीत गए। फिर भी सरकार नहीं बनी। पीडीपी की कई बैठकें हुईं। पार्टी विधायकों ने महबूबा को फैसला लेने का अधिकार भी दे दिया। लेकिन महबूबा निर्णय नहीं ले पा रही हैं कि वह भाजपा के साथ गठबंधन जारी रखेगी या नहीं? वे गठबंधन तोड़ भी नहीं रही हैं। हां, पीडीपी से भाजपा के लिए सीएमपी से अलग शर्तें आने लगी हैं। वह पाक से वार्ता, विशेष पैकेज और बिजली प्रोजेक्ट देने पर भाजपा से अश्वासन चाहती है। शतरें को देखें तो इसमें भाजपा को कोई दिक्कत होगी, ऐसा लग नहीं रहा है, क्योंकि यह पार्टी भी विकास व पाक से शांति वार्ता की पक्षधर है। भाजपा के जेके कोर ग्रुप की भी बैठक हुई है, जिसमें पीडीपी के रुख सामने आने के बाद फैसला करने की बात है। इस बीच, राज्यपाल एनएन वोहरा ने पीडीपी व भाजपा को दो फरवरी मंगलवार तक का समय दिया है कि दोनों पार्टी अपना रुख साफ करें कि वे सरकार बनाएंगी या नहीं? इसके बाद जेके भाजपा विधायकों ने कहा है वे मंगलवार को राज्यपाल से मिलेंगे। जेके में देखा जाए तो जनादेश पीडीपी और भाजपा के पक्ष में है। इसलिए इन्हीं दोनों दलों की जिम्मेदारी बनती है कि वह सरकार बनाए। बड़ी पार्टी होने के नाते पीडीपी की पहली जिम्मेदारी है कि वह सरकार बनाए। लेकिन यदि नहीं बनाना चाहती है तो राज्यपाल से स्थिति स्पष्ट करे। पीडीपी के बाद भाजपा की जिम्मेदारी बनती है कि वह विकल्प पेश करे। फिलहाल तो राज्य के हित में बेहतर यही है कि पीडीपी और भाजपा गठबंधन जारी रखें और सरकार बनाएं। बेवजह राज्य को असमय चुनाव में नहीं धकेलें।

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