Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

जम्मू-कश्मीर में सरकार जनादेश का सम्मान

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख मुफ्ती मोहम्मद सईद ने दूसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान संभाली है। इसके साथ ही पिछले 49 दिनों से चले आ रहे राष्ट्रपति शासन का भी अंत हो गया है।

जम्मू-कश्मीर में सरकार जनादेश का सम्मान

जम्मू-कश्मीर के लिए रविवार ऐतिहासिक दिन साबित हुआ। ऐतिहासिक इस मायने में कि भारतीय जनता पार्टी राज्य में पहली बार सरकार में शामिल हुई है और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख मुफ्ती मोहम्मद सईद ने दूसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान संभाली है। इसके साथ ही पिछले 49 दिनों से चले आ रहे राष्टÑपति शासन का भी अंत हो गया है। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में भाजपा और पीडीपी की गठबंधन सरकार बनी है।

बजट 2015:फिलहाल उम्मीद ही दी है

यह गठबंधन सरकार साझा न्यूनतम कार्यक्रम के तहत अगले छह साल तक काम करेगी। इसमें सभी विवादित मुद्दों जैसे अनुच्छेद-370 व अफ्सपा कानून आदि को किनारे कर विकास और सुशासन जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है। इस प्रकार इस सरकार का मुख्य एजेंडा राज्य में विकास और सुशासन स्थापित करना होगा। अगले छह साल तक मुफ्ती मोहम्मद सईद राज्य के मुख्यमंत्री होंगे और भाजपा के निर्मल सिंह उपमुख्यमंत्री। इस प्रकार मंत्रिमंडल में पीडीपी से बारह, भाजपा से ग्यारह और अलगाव का रास्ता छोड़ मुख्यधारा की राजनीति में आए पीपुल्स कॉन्फेंस के सज्जाद लोन को भी शामिल किया गया है।

अब तक का सबसे बड़ा रेल बजट, 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये होंगे खर्च

शपथ-ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा के सभी दिग्गज नेताओं का मौजूद रहना कई मायनों में अहम है। यह इस बात का संकेत है कि मुफ्ती मोहम्मद सईद को केंद्र सरकार और भाजपा का पूर्ण सहयोग है। बीते वर्ष 23 दिसंबर को जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे। किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। 28 विधायकों के साथ पीडीपी सबसे बड़ी और 25 विधायकों के साथ भाजपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी।

फिर से रफ्तार पकड़ रही है भारतीय अर्थव्यवस्था

गठबंधन सरकार चला चुकी नेशनल कॉन्फ्रेंस को 15 और कांग्रेस को 12 सीटें मिली थीं। इस प्रकार किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए जरूरी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। वहीं सामाजिक रूप से भी पूरा जम्मू-कश्मीर बंटा हुआ नजर आया था। जम्मू हिंदू बहुल इलाका है, वहां के लोगों ने भाजपा के पक्ष में जमकर मतदान किया था। वहीं कश्मीर घाटी मुस्लिम बहुल इलाका है, वहां लोगों ने पीडीपी के पक्ष में खुलकर मतदान किया था। न तो जम्मू में पीडीपी को कोई खास बढ़त मिली थी और न ही भाजपा को कश्मीर में एक भी सीट मिली थी।

सांप्रदायिक रूप से बंटे राज्य ने न सिर्फ प्रदेश, बल्कि देश के राजनीतिज्ञों की पेशानी पर बल डाल दिया था। हिंदू-मुस्लिम के बीच पैदा हुई इस असंतोष की खाई को पाटने का एक ही बेहतर उपाय था कि भाजपा और पीडीपी एक साथ आएं और राज्य में सरकार बनाएं, लेकिन इसमें कई अड़चनें थीं। कई सारे मुद्दों पर दोनों में राजनीतिक-वैचारिक मतभेद है।

हालांकि राज्य में सामाजिक समरसता को मजबूती देने के लिए दोनों दलों ने मतभेद वाले मुद्दों को ठंडे बस्ते में डाल राजनीतिक परिपक्वता व सूझबूझ का परिचय दिया है। स्वयं सईद ने इस गठबंधन को उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव का मिलन करार दिया है। इसका न सिर्फ जम्मू-कश्मीर की जनता, बल्कि समूचे देश पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि राज्य आने वाले दिनों में विकास की नई ऊंचाइयां छुएगा।

खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-

Next Story
Top