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चिंतन: चॉपर डील पर कांग्रेस का सच सामने आना जरूरी

3600 करोड़ में 12 वीवीआइपी हेलीकॉप्टरों की इस डील में भारत में 120 से 125 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई: कोर्ट

चिंतन: चॉपर डील पर कांग्रेस का सच सामने आना जरूरी
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इशरत जहां केस में हलफनामा बदलने को लेकर पहले से ही बैकफुट पर चल रही कांग्रेस के लिए अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर डील पर इटली की कोर्ट का फैसला नई मुसीबत खड़ा कर सकता है। इटली की मिलान कोर्ट ऑफ अपील ने माना है कि चॉपर डील में करप्शन हुआ और भारत में रिश्वत दी गई। आठ अप्रैल को ही यह फैसला आया थी। कोर्ट ने कहा कि 3600 करोड़ में 12 वीवीआईपी हेलिकॉप्टरों की इस डील में भारत में 120 से 125 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई।
यह डील छह साल पहले 2010 में कांग्रेस सरकार के समय हुई थी और उस वक्त रक्षा मंत्री एके एंटनी थे। एंटनी ने ही 2013 में खुलासा किया था कि चॉपर डील में करप्शन हुआ और पैसे का लेनदेन किया गया। इटली की कोर्ट ने अपने फैसले में भारतीय नेता-सिग्नोरा गांधी, डा. मनमोहन सिंह, अहमद पटेल और ऑस्कर फर्नांडीस का नाम लिया है, पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन का जिक्र किया है और भारतीय वायुसेना के पूर्व चीफ एसपी त्यागी को दोषी माना है।
हालांकि त्यागी ने कहा है कि मैं दोषी तो पूरी सरकार दोषी। वे पहले से ही खुद को बेगुनाह बताते रहे हैं। वे इटली की कोर्ट में पेश भी नहीं हुए थे। 2005-07 के दौरान त्यागी वायु सेना के प्रमुख थे और तभी इटली के साथ चॉपर डील हुई थी। कहा जाता है कि इस डील में कांग्रेस सरकार तीन-चार मंत्री भी शामिल थे। यहां सिग्नोरा गांधी से सोनिया गांधी के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि भारत में सिग्नोरा गांधी कौन है, इसके बारे में खास पता नहीं है। इटली की अदालत ने 225 पेज में जजमेंट दिया है।
इनमें 17 पन्नों में पूर्व एयरफोर्स चीफ एसपी त्यागी की भूमिका का जिक्र है। त्यागी पर आरोप है कि बतौर एयरफोर्स चीफ उन्होंने वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों की मैक्सिमम फ्लाइंग हाइट 6,000 मीटर से घटाकर 4,500 मीटर करने की परमिशन दी थी। कहा जाता है कि अगस्ता वेस्टलैंड को हेलीकॉप्टर कॉन्ट्रैक्ट दिलाने के मकसद से ही डेढ़ हजार मीटर की फ्लाइंग हाइट कम की गई थी। इसका उस समय काफी विरोध हुआ था। कोर्ट ने फिनमैकेनिका के प्रमुख और अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी के मुखिया ऊर्सी को घूस देने का दोषी माना है।
इस खुलासे के बाद केंद्र सरकार सजग हो गई है। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने अब रोम में भारतीय दूतावास से कोर्ट के फैसले की जानकारी मांगी है। उसके बाद रक्षा मंत्रालय पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी के आधिकारिक सरकारी समारोहों में शामिल होने को लेकर एडवाइजरी कर सकता है। भारत में अभी इस डील की जांच सीबीआई और ईडी कर रही है। दोनों को जांच में तेजी लानी चाहिए। इतालवी कोर्ट के फैसले के बाद इतना तो स्पष्ट हो गया है कि चॉपर डील में करप्शन हुआ है और वह भी कांग्रेस सरकार के समय हुआ है।
बोफोर्स तोप सौदे में भी कांग्रेस पर आरोप लग चुकी है। ऐसे में कांग्रेस को देश को जवाब देना ही चाहिए। घपले-घोटालों के आरोपों के चलते ही कांग्रेस के हाथ से 2014 में केंद्र की सत्ता गई थी। उत्तराखंड पर लगातार संसद नहीं चलने देने वाली कांग्रेस को घेरने के लिए अब भाजपा के पास मजबूत हथियार मिल गया है।
लग रहा है कि अब इस पर जमकर सियासत देखने को मिलेगी। लेकिन आशंका है कि भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी नूराकुश्ती में संसद का बजट सत्र न बेकार चला जाए। कई अहम बिल पास होने हैं। अभी केंद्र की एनडीए सरकार को चाहिए कि इस चॉपर डील की तेजी से जांच करवाए और अपने कानून के तहत दोषियों को सजा दिलावाए।
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