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हरिभूमि संपादकीय लेख: जरूरी था देशभर में लॉकडाउन बढ़ाना

देशभर में ऐसे जिलों की संख्या 319 है, जबकि 130 जिले रेड और 284 ऑरेंज जोन में हैं। सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है कि देशवासियों को संक्रमण से बचाते हुए औद्योगिक व कारोबारी गतिविधियों को शुरू किया जाए, ताकि विकास जो पहिया लॉकडाउन के चलते ठहर गया है उसे चलाया जा सके।

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जो जरूरी था, वही किया। केंद्र सरकार ने देशभर में लॉकडाउन 17 मई तक बढ़ा दिया है। जिस उद्देश्य से 22 मार्च को जनता कर्फ्यू और फिर 24 मार्च से लॉकडाउन लगाया गया था, वो अभी पूरा नहीं हुआ है। सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है कि देशवासियों को कोरोना से बचाकर रखा जाए और वायरस की चेन को तोड़ा जाए, लेकिन अभी ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह लगे कि कोरोना की चेन टूट रही है या वो कमजोर पड़ रहा है।

घातक कोरोना वायरस का कहर बढ़ता जा रहा है। देश में कोविड-19 संक्रमण के 35,043 मामले आ चुके हैं। इस बीमारी से 8889 लोग ठीक हो गए हैं या उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। संक्रमण 1147 लोगों की जान ले चुका है। सबसे ज्यादा 10498 केस महाराष्ट्र में हैं, देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना के 3,515 मरीज मिले हैं और 59 की हुई मौत हो चुकी है। ये हालात तब है जब पूरा देश अपने घरों में दुबका हुआ है। बसें-रेलगाड़ियां बंद हैं, पब, मॉल, सिनेमा हॉल पर ताले लटके हुए हैं, स्कूल-कॉलेज की छुट्टियां कर दी गई हैं। इसके बावजूद कोरोना संक्रमण के केस हर 11 दिनों में दोगुना हो रहे हैं। विचार करें कि अगर लॉकडाउन नहीं होता तो ये आंकड़ा क्या होता।

इन हालात के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हाईलेवल मीटिंग बुलाई थी। जिसमें गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ विपिन रावत, रेल मंत्री पीयूष गोयल समेत सचिव स्तर के कई अन्य अफसरों के साथ उन्होंने करीब ढाई घंटे तक मंथन किया और इसके बाद शाम को गृह मंत्रालय ने लॉकडाउन बढ़ाने का ऐलान कर दिया। इस घोषणा से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश में जगह-जगह फंसे प्रवासी मजदूरों, पर्यटकों और विद्यार्थियों को अपने घर जाने की इजाजत देते हुए विशेष रेलगाड़ियां चलाकर उन्हें व उनके परिजनों को भारी राहत दी है। इस फैसले से लॉकडाउन में फंसा एक बड़ा पेच सुलझ गया।

22 मार्च जनता कर्फ्यू के दिन से ही प्रवासी मजदूरों की परेशानियों ने सरकार के लिए उलझनें खड़ी कर दी थीं। पहले दिल्ली और फिर मुंबई में ये मजदूर सड़क पर उतर आए। कहीं से पैदल, साइकिल से इन प्रवासी मजदूरों के घर जाने की खबरें लगातार आती रहीं। अब सरकार देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे 40 लाख लोगों को जांच के बाद घर तक पहुंचाएगी। इसके अलावा गृह मंत्रालय ने पूरे देश को रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन में बांटकर कोराबारी गतिविधियां चलाने की इजाजत भी दे दी है। ये छूट ग्रीन और ऑरेंज जोन में दी गई हैं, जहां 21 दिनों से कोरोना संक्रमण का कोई नया केस नहीं आया है।

देशभर में ऐसे जिलों की संख्या 319 है, जबकि 130 जिले रेड और 284 ऑरेंज जोन में हैं। सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है कि देशवासियों को संक्रमण से बचाते हुए औद्योगिक व कारोबारी गतिविधियों को शुरू किया जाए, ताकि विकास जो पहिया लॉकडाउन के चलते ठहर गया है उसे चलाया जा सके। इसके अलावा शुक्रवार को तीनों सेना प्रमुखों के साथ चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ विपिन रावत ने कहा कि कोरोना योद्धाओं का सम्मान करने के इरादे से एयरफोर्स जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से केरल के त्रिवेंद्रम तक और असम के डिब्रूगढ़ से गुजरात के कच्छ तक फ्लाई पास्ट करेगी। देशभर के उन अस्पतालों पर हेलिकॉप्टर से फूल बरसाए जाएंगे, जो कोरोना वायरस का इलाज कर रहे हैं। नौसेना भी कोरोना वॉरियर्स के सम्मान में अपने जंगी जहाजों पर रोशनी करेगी। यह अपने आप में अनोखा प्रयास होगा। इससे न केवल कोरोना योद्धाओं का हौसला बढ़ेगा बल्कि उनमें नए जोश का भी संचार होगा।

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