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संपादकीय लेख : देश में तीसरी लहर को आने से रोकना जरूरी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दोहराया है कि केवल वैक्सीन से ही महामारी नहीं रोकी जा सकेगी। देशों को इससे निपटने के लिए लगातार सावधानी रखनी होगी। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, डेल्टा वैरिएंट 111 से ज्यादा देशों में पहुंच चुका है। यह जल्द ही पूरी दुनिया में भी फैल सकता है। वायरस का अल्फा वैरिएंट 178 देशों में, बीटा 123 देशों में और गामा 75 देशों में मिल चुका है। दक्षिण पूर्व एशिया रीजन में मौतों के मामले में भारत सबसे आगे है। यहां 6 हजार नई मौतें दर्ज की गई हैं।

संपादकीय लेख : देश में तीसरी लहर को आने से रोकना जरूरी
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : विश्व में कोविड-19 की तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है। अमेरिका और ब्रिटेन में महज 11 दिन में नए केस दोगुना हो गए तो इंडोनेशिया में तीन गुना बढ़े। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बुधवार को ही कोरोना की तीसरी लहर आने का ऐलान किया। कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। तीसरी लहर में सबसे ज्यादा मामले अमेरिका में देखे जा रहे हैं। यहां पिछले 25 दिन में नए संक्रमण के मामलों में 350 फीसदी इजाफा हुआ है, लेकिन यूएस में वैक्सीनेशन में गिरावट हो रही है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में 48 फीसदी आबादी के वैक्सीनेशन के बाद भी नए केस बढ़ रहे हैं। अमेरिका अब कोरोना की नई लहर की तरफ बढ़ रहा है। वहां करीब 10 करोड़ पर संक्रमण का खतरा है। 27 करोड़ आबादी वाला इंडोनेशिया इस समय कोरोना मामलों में एशिया का एपीसेंटर बना हुआ है, यहां इस समय भारत से भी ज्यादा संक्रमण के नए मामले सामने आ रहे हैं, तो स्पेन में पूरी महामारी के दौरान पहली बार एक दिन में 44 हजार केस दर्ज हुए हैं। दुनिया के 5 वें सबसे संक्रमित देश रूस में आधी से ज्यादा 54 फीसदी आबादी वैक्सीन लगवाने को तैयार नहीं है। पिछले कुछ हफ्तों में रूस् में डेल्टा वैरिएंट की वजह से नए संक्रमण देखने को मिले हैं। ब्रिटेन खुद को तीसरी लहर से बचाने के लिए फ्रांस को रेड लिस्ट में डालने जा रहा है, इसके बाद वहां से आने वाले लोगों पर पाबंदियां लगाई जाएंगी। विश्व के ये आंकड़े बता रहे हैं कि अमेरिका, ब्रिटेन, स्पेन, इंडोनेशिया आदि देशों में कोविड की तीसरी लहर आ चुकी है। इंडोनेशिया में 45%, ब्रिटेन में 28%, अमेरिका में 67%, स्पेन में 61% तक मामले बढ़े हैं। इससे पहले तक दुनिया में सबसे ज्यादा नए केस ब्राजील में मिल रहे थे। डेल्टा वैरिएंट के बढ़ते मामलों और वायरस के म्यूटेट होने से भारत में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जल्द ही सच में बदल सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दोहराया है कि केवल वैक्सीन से ही महामारी नहीं रोकी जा सकेगी। देशों को इससे निपटने के लिए लगातार सावधानी रखनी होगी। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, डेल्टा वैरिएंट 111 से ज्यादा देशों में पहुंच चुका है। यह जल्द ही पूरी दुनिया में भी फैल सकता है। वायरस का अल्फा वैरिएंट 178 देशों में, बीटा 123 देशों में और गामा 75 देशों में मिल चुका है। दक्षिण पूर्व एशिया रीजन में मौतों के मामले में भारत सबसे आगे है। यहां 6 हजार नई मौतें दर्ज की गई हैं। इसके बाद इंडानेशिया और बांग्लादेश हैं। भारत में पाबंदियों में छूट से जोखिम बढ़ा है। कई राज्य कोविड बंदिशों में ढील दे रहे हैं, बाजार खुल रहे हैं, देश में वैक्सीनेशन की रफ्तार भी धीमी पड़ने लगी है। इस वजह से तीसरी लहर का जोखिम और ज्यादा हो गया है।

यूबीएस की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले भारत में औसतन 40 लाख डोज हर दिन लगाए जा रहे थे। अब यह संख्या 34 लाख तक आ गई है। यह स्थिति इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि अब 45% केस ग्रामीण इलाकों में सामने आ रहे हैं। देश के ज्यादातर केस 20 फीसदी जिलों में मिल रहे हैं। यहां दूसरी लहर का ही असर खत्म नहीं हुआ है और तीसरी लहर की आहट सुनाई देने लगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80 फीसदी मामले वाले छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में कहा है कि तीसरी लहर रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं। कोविड की नई लहर को रोकने के लिए राज्य सरकारों को तत्परता से काम करना होगा। नीति आयोग के सदस्य डा. वीके पॉल ने चेताया है कि तीसरी लहर के मद्देनजर अगले 100 दिन अहम रहेंगे। देश में अभी तक हर्ड इम्यूनिटी नहीं बन सकी है। दुनिया के कुछ देशों में कोविड तीसरी लहर के दस्तक देने के संकेत के बीच भारत का सतर्क रहना बहुत जरूरी है।

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