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ड्रग्स के अंधेरे संसार से देश को बचाना जरूरी

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने मुंबई में समंदर में क्रूज पर पार्टी में ड्रग्स के आरोप में आर्यन समेत बारह की गिरफ्तारी की है। आर्यन समेत बारह आरोपित निर्दोष हैं या गुनहगार, यह जांच के बाद पता लगेगा, इस मामले पर कानून अपना काम कर रहा है। हमें किसी भी नतीजे पह पहुंचने से पहले कानून के फैसले का इंतजार करना चाहिए।

ड्रग्स के अंधेरे संसार से देश को बचाना जरूरी
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : भारत में ड्रग्स कारोबार किस तरह जड़ें जमा रहा है, इसकी बानगी मुंबई क्रूज केस है। देश के प्रतिष्ठित अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन का ड्रग्स सेवन का कबूलनामा दिखाता है कि समाज में आदर्श प्रस्तुत करने वाले के परिवार भी नशे की गिरफ्त से अछूते नहीं हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने मुंबई में समंदर में क्रूज पर पार्टी में ड्रग्स के आरोप में आर्यन समेत बारह की गिरफ्तारी की है। आर्यन समेत बारह आरोपित निर्दोष हैं या गुनहगार, यह जांच के बाद पता लगेगा, इस मामले पर कानून अपना काम कर रहा है। हमें किसी भी नतीजे पह पहुंचने से पहले कानून के फैसले का इंतजार करना चाहिए। शाहरुख खान के बेटे के आरोपित होने के चलते इसका मीडिया ट्रायल भी नहीं होना चाहिए।

सोशल मीडिया पर भी संयम दिखाना चाहिए, लेकिन इस मामले ने भारत को घुन की तरह चाट रहा ड्रग्स कारोबार के अंधेरे संसार को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या केस की जांच के दौरान मुंबई पुलिस ने ड्रग्स व बॉलीवुड कनेक्शन का भंडाफोड़ किया था। उस समय पुलिस को मुंबई में सक्रिय कई ड्रग्स पैडलर के बारे में पता चला था, उस भंडाफोड़ से ड्रग्स कारोबार पर नकेल कसने की दिशा में पुलिस जरूर अपना काम कर रही होगी, हालांकि जांच व शिकंजा कसने की गति बहुत धीमी है। अब क्रूज में ड्रग्स मामले से इतना तो पता चल रहा है कि ड्रग्स व बॉलीवुड कनेक्शन के भंडाफोड़ का ड्रग्स सेवकों व कारोबारियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा है, वे बेधड़क इसमें लिप्त हैं, लगता है उन्हें किसी कानून का खौफ भी नहीं है। ड्रग्स कारोबार में अमीर व रसूखदार नेक्सस बहुत शक्तिशाली है। शायद इसलिए भारत में पिछले तीन सालों में ही ड्रग्स का बाजार 455 फीसदी तक बढ़ गया, जोकि चिंतित करने वाला आंकड़ा है।

देश के 2.1 प्रतिशत लोग गैरकानूनी नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं, जिसमें मिजोरम पहले, पंजाब दूसरे और दिल्ली तीसरे नंबर पर है। करीब एक करोड़ 3 लाख लोग गांजा या चरस का सेवन करते हैं। दुनिया के मुकाबले भारत में अफीम से बनने वाले गैरकानूनी नशीले पदार्थों का सेवन ज्यादा होता है। देश में ड्रग्स का बढ़ता कल्चर गंभीर समस्या बन चुका है। संयुक्त राष्ट्र एजेंसी यूएनओडीसी के 2015 के आंकड़े के मुताबिक, दुनियाभर में करीब 23.4 करोड़ लोग ड्रग्स का इस्तेमाल करते हैं। हर साल ड्रग्स के कारण करीब 2 लाख लोग जान गंवा बैठते हैं। जुलाई 2016 में राज्यसभा में पेश किए गए राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो (एनसीबी) के नशे संबंधी आंकड़ों के अनुसार भारत में हर दिन ड्रग्स या शराब के चलते 10 मौतें या आत्महत्याएं होती हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक ड्रग्स की लत से जुड़ी सबसे ज्यादा आत्महत्याएं महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में होती हैं, एक मौत पंजाब में होती है। 2021 में आंकड़े और बढ़े ही हैं। ड्रग्स माफिया को लेकर बॉलीवुड में कई फिल्में बन चुकी हैं। अवैध नशे से जुड़े अपराधियों को सजा देने के मामले पिछले 4 सालों में 11 प्रतिशत तक बढ़े हैं। 2020 में नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़े अपराधों में 81.6 प्रतिशत अपराधियों को सजा मिली है।

भारत में नशाखोरी की समस्या कितनी बड़ी है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने 'मन की बात'कार्यक्रम तक में इसे मुद्दा बना चुके हैं। निजी संस्थाएं और सरकार भी नशामुक्ति के लिए नियमित जागरुकता अभियान चला रही हैं। बावजूद इसके ड्रग्स के सौदागर देश में तेजी से पांव पसार रहे हैं। अनुमान के मुताबिक भारत में 65 हजार अरब रुपये का अवैध ड्रग्स का कारोबार है। ड्रग्स की लत के चलते लोग आत्महत्या तक कर लेते हैं। अफगानिस्तान, पाकिस्तान, म्यांमार और नेपाल से हेरोइन, कोकेन और मॉर्फीन भारत में आते हैं। सरकार को चाहिए कि देश को ड्रग्स के अंधेरे संसार बचाने की दिशा में वह ठोस प्रयास करे।

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