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डॉ. मोनिका शर्मा का लेख : आपदा में अभद्र व्यवहार चिंतनीय

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के आंकड़े आपदा की भयावहता दर्शा रहे हैं। ऐसे में नियमों की पालना को लेकर दी जा रही हिदायतों को मानने के बजाय लोगों का अभद्र और आक्रोशित व्यवहार वाकई दुखद है। हाल ही में राजधानी दिल्ली में वीकेंड कर्फ्यू को लेकर तैनात पुलिसकर्मियों ने कार में बिना मास्क पहने जा रहे दंपती को मास्क पहनने की हिदायत दी तो पुलिसकर्मियों को उनकी बदसलूकी झेलनी पड़ी। ऐसे वाकये एक पल में शिक्षा, समझ, मानवीय संवेदनाओं और इस संकट में भी सजगता न बरतने जैसे पहलुओं पर निराशाजनक हालात सामने लाते हैं। कुदरत के कहर को झेल रही दुनिया में ऐसे लोगों के मन-मस्तिष्क पर मानो अहंकार कब्जा जमाकर बैठा हुआ है।

डॉ. मोनिका शर्मा का लेख : आपदा में अभद्र व्यवहार चिंतनीय
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डॉ. मोनिका शर्मा

डॉ. मोनिका शर्मा

देशभर में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के आंकड़े आपदा की भयावहता दर्शा रहे हैं। ऐसे में नियमों की पालना को लेकर दी जा रही हिदायतों को मानने के बजाय लोगों का अभद्र और आक्रोशित व्यवहार वाकई दुखद है। हाल ही में राजधानी दिल्ली में वीकेंड कर्फ्यू को लेकर तैनात पुलिसकर्मियों ने कार में बिना मास्क पहने जा रहे दंपती को मास्क पहनने की हिदायत दी तो पुलिसकर्मियों को उनकी बदसलूकी झेलनी पड़ी। अफसोस कि दोनों ने नियम पालन को गंभीरता से लेने के बजाय पुलिस को ही खरी-खोटी सुनानी शुरू कर दी। खासकर महिला ने पुलिसकर्मियों से जमकर अभद्रता की। बेवजह रौब और दबंगई का व्यवहार करने वाली महिला ने पुलिसकर्मियों को अपशब्द भी कहे। महामारी से बढ़ते मौत के आंकड़ों के दुखद हालात में वह यह कहने भी से नहीं चूकी कि कोई कोरोना नहीं है। बेवजह लोगों को परेशान किया जा रहा है। इस घटना के बाद पुलिस ने दंपती के खिलाफ सरकारी आदेश के उल्लंघन का मामला दर्ज किया। बीते दिनों ऐसे ही एक और वायरल वीडियो में एक पिता इस बात पर भड़क गए कि पड़ोसी ने लिफ्ट में साइकिल ले जा रहे उनके किशोर बेटे को मास्क लगाने को कहा| वीडियो में बच्चे के नाराज पिता अभद्र भाषा बोलते हुए दिख रहे हैं। नियमों की पालना को लेकर बच्चे को समझाने के बजाय मास्क पहनने को कहने वाली पड़ोसी के साथ आक्रोश भरा व्यवहार अपनाते नजर आ रहे हैं।

दरअसल, ऐसे वाकये एक पल में शिक्षा, समझ, मानवीय संवेदनाओं और इस संकट में भी सजगता न बरतने जैसे पहलुओं पर निराशाजनक हालात सामने लाते हैं। कुदरत के कहर को झेल रही दुनिया में ऐसे लोगों के मन-मस्तिष्क पर मानो अहंकार कब्जा जमाकर बैठा हुआ है, जिसके चलते अपना जीवन सहेजने की सलाहों के मामले में भी खुद के आगे कोई सही नहीं लगता। किसी का मान करना जरूरी नहीं लगता। कोई नियम कायदा अपने आप से ऊपर नजर नहीं आता। जानलेवा विपत्ति के इस दौर में ऐसा बर्ताव कई सवाल ही नहीं उठाता, बल्कि निराशाजनक परिवेश बनाने वाला भी है। कहना गलत नहीं होगा कि इस वैश्विक आपदा से लड़ते हुए आक्रोश और ढिठाई का व्यवहार अपनाकर कई लोग कोरोना वॉरियर्स का मनोबल तोड़ने वाला व्यवहार कर रहे हैं। पहली पंक्ति में आम लोगों का जीवन सहेजने को डटे योद्धाओं के मन को ठेस पहुंचा रहे हैं। अफ़सोस कि शिक्षित और जागरूक नागरिक भी ऐसा कर रहे हैं। इन दोनों मामलों में पुलिसकर्मियों और अपने जागरूक-जिम्मेदार पड़ोसी के साथ दुर्व्यवहार करने वाले लोग उच्च शिक्षित हैं। उनसे सजगता और सामुदायिक संकट को समझने की कि आशा रखना कोई बड़ी उम्मीद रखना तो नहीं है। राजधानी दिल्ली में पुलिस से बदसलूकी करने वाली महिला प्रशासनिक अधिकारी बनने का स्वप्न संजोये है, जबकि इस बेवजह की बहस के दौरान उसने संवेदनशील बन गलती मानने के बजाय पुलिस कर्मियों को कम पढ़ा लिखा और खुद को यूपीएससी टॉपर बताकर नीचा दिखाने तक की कोशिश की है।

संक्रमण की दूसरी लहर वाकई घातक साबित हो रही है | हर दिन जीवन गंवाने वालों और सक्रिय संक्रमण के मामलों के आंकड़ों का नया रिकॉर्ड बन रहा है। ऐसे में इससे बचने के उपायों में मास्क का इस्तेमाल सबसे प्रभावी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही ढंग से मास्क लगाने भर से 96 प्रतिशत तक संक्रमण से बचाव होता है। पिछले एक साल मास्क पहनने को लेकर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। सरकार ही नहीं सजग नागरिक भी लापरवाही करने वालों से मास्क पहनने की अपील करते नजर आते हैं।

एक अध्ययन के मुताबिक सही माप के मास्क सही ढंग से पहने जाएं तो दोगुने प्रभावी साबित होते हैं। यह संक्रमण को व्यक्ति की नाक, मुंह तक पहुंचने से रोकते हैं, जिससे व्यक्ति संक्रमण की चपेट में नहीं आता। यही वजह है कि कोविड-19 से बचाव के लिए मास्क सबसे महत्वपूर्ण है। बावजूद इसके लोग संकट की गंभीरता को न समझकर मास्क पहनने में लापरवाही बरत रहे हैं। इन्हीं दिनों विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख डॉ. टेड्रोस ने भी चेतावनी दी है कि अभी हमारे बीच से कोरोना वायरस नहीं जाएगा। यह माहमारी लम्बे समय तक चलने वाली है। ऐसे में टीकाकरण के साथ-साथ मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग से ही बचा सकता है। डब्ल्यूएचओ ने एक पोस्ट जारी कर बाकायदा यह समझाया भी है कि किसे, कैसे और कब मास्क पहनना चाहिए। इस महामारी ने जीवन के हर मोर्चे पर अनिश्चितता का माहौल दिया है। सामाजिक-आर्थिक-पारिवारिक यहां तक मनोवैज्ञानिक मोर्चे पर तो उलझनें हैं ही बड़ी संख्या में लोगों की जान भी जा रही है।

इसके बावजूद जीवन बचाने वाले गाइडलाइंस की अनदेखी जारी है। इतना ही नहीं सामुदायिक संकट बनी इस आपदा से मिलकर जूझने के बजाय कभी पुलिसकर्मियों तो कभी चिकित्सकों के साथ दुर्व्यव्हार के मामले सामने आते रहते हैं। नियम कायदों की ताकीद देने वाले कोरोना वॉरियर्स को ऊंची-अहंकारी आवाज़ में कभी सबक सिखा देने की बात तो कभी हम तो ऐसा ही करेंगे की जिद। सोच और दबंगई का यह तेवर खुद ऐसे लोगों की ही दूसरों की जान के लिए भी जोखिम बन रहा है, जबकि कोरोना संक्रमण से आम लोगों की सजगता, समझ और सहयोग के बिना नहीं जूझा जा सकता।

किसी एक की असावधानी औरों के लिए मुसीबत बन जाती है। फिर से विकराल हुई महामारी के प्रकोप को देखते हुए बिना जरूरत घर से न निकलने, मास्क लगाने, दो गज की दूरी बनाए रखने, दिन में कई बार हाथ धोने को लेकर को अब फिर से सतर्क हो जाना आवश्यक है। रात का कर्फ्यू, सप्ताहांत कर्फ्यू और यहां तक कि पूर्ण लॉकडाउन जैसे रास्ते अपनाकर प्रशासनिक अमला जरूरी कदम उठा रहा है, लेकिन आम लोगों का साथ मिले बिना इस संकट से नहीं लड़ा जा सकता। अब, जब संक्रमण का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है, नागरिकों की ज़िम्मेदारी भी कई मोर्चों पर और बढ़ गई है। इसमें व्यक्तिगत रूप से अपना और अपने परिवार का ख्याल रखने के दायित्व के साथ ही, सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन और फ्रंटलाइन वर्कर्स के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने जैसी बातें शामिल हैं। विपत्ति के दौर में सकारात्मक सोच के साथ मानवीय भावों से जुड़े रहना ही इस जंग को आसान बना सकता है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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