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हरिभूमि संपादकीय: दिलों के तार छेड़ती थी इरफान की अदाकारी

इरफान ने दर्जनों फिल्मों में बेमिसाल अदाकारी का लोहा मनवाया। उन्होंने हासिल, मकबूल, लाइफ इन ए मेट्रो, आन: मैन एट वर्क, द किलर, सनडे, क्रेजी-4, बिल्लू, स्लमडॉग मिलियनेयर, न्यूयॉर्क, लंचबॉक्स, पीकू और अंग्रेजी मीडियम जैसी फिल्मों में काम किया, जिसे लोगों ने खूब सराहा।o

हरिभूमि संपादकीय: दिलों के तार छेड़ती थी इरफान की अदाकारी

राजस्थान से दिल्ली और फिर यहां नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से मुंबई जाकर अपने अभिनय से धाक जमाने वाले इरफान खान बेहतरीन अदाकार और उम्दा इंसान थे। उनके निधन से दुनियाभर में शोक की लहर है। वे ऐसे अभिनेता थे, जिन्हें बॉलीवुड से पहले हॉलीवुड ने पहचाना। वे हॉलीवुड से होकर बॉलीवुड पहुंचे। वे भारत के पहले इंटरनेटशनल अभिनेता भी थे। इरफान ने दर्जनों फिल्मों में बेमिसाल अदाकारी का लोहा मनवाया। उन्होंने हासिल, मकबूल, लाइफ इन ए मेट्रो, आन: मैन एट वर्क, द किलर, सनडे, क्रेजी-4, बिल्लू, स्लमडॉग मिलियनेयर, न्यूयॉर्क, लंचबॉक्स, पीकू और अंग्रेजी मीडियम जैसी फिल्मों में काम किया, जिसे लोगों ने खूब सराहा। उनकी आखिरी फिल्म अंग्रेजी मीडियम थी।

उन्हें हॉलीवुड में भी खूब सफलता मिली। द नेमसेक, लाइफ ऑफ पाई, जुरासिक वर्ल्ड, स्लमडॉग मिलियनेयर, इन्फर्नो, द अमेजिंग स्पाइडर मैन और ए माइटी हार्ट जैसी हिट और लोकप्रिय फिल्मों में अपने बोलते अभिनय की छाप छोड़ी। साल 2012 में रिलीज हुई फिल्म पान सिंह तोमर के लिए इरफान खान को राष्ट्रीय पुरुस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके मित्र तिग्मांशु धूलिया की इस फिल्म में इरफान ने विद्रोही डकैत पान सिंह तोमर की जीवंत भूमिका अदा की थी।

इरफान खान ने सपोर्टिंग और निगेटिल रोल के लिए आईफा, स्टारस्क्रीन, जी सिने, फिल्मफेयर जैसे तमाम अवार्ड अपने नाम किए। इसके अलावा, लाइफ ऑफ पाई और स्लमडॉग मिलियनेयर जैसी फिल्मों ने ऑस्कर में भी धूम मचाई। ऐसा नहीं हैं कि इरफान को यह कामयाबी यूं ही मिल गई हो। इसके पीछे उन्हें लंबा संघर्ष और कड़ी मेहनत करनी पड़ी। वो बताते थे कि संघर्ष के दौरान पैसे न होने के कारण न जाने कितने दिनों तक भूखा ही रहना पड़ा। एक बार तो सब्जी तक बेची, लेकिन हार नहीं मानी। इरफान में क्रिकेट के प्रति भी गहरा लगाव था। उनका चयन सीके नायडु ट्रॉफी के लिए हुए था, जहां उभरते हुए खिलाड़ियों को तराशने का मौका मिलता है।

फिर वे प्रथम श्रेणी के लिए तैयार होते हैं, मगर पैसों की तंगी के चलते वे ज्यादा नहीं खेल पाए। जयपुर में 7 जनवरी 1967 को जन्मे इरफान का पूरा नाम साहबजादे इरफान अली खान था। पिता का नाम जागीरदार खान था। इरफान ने पठान मुस्लिम परिवार में जन्म लेने के बाद भी कभी मीट या मांस नहीं खाया और वे बचपन से ही शाकाहारी थे। यही कारण है कि उनके पिता इरफान को मजाक में कहा करते थे कि ये तो पठान परिवार में ब्राह्मण पैदा हो गया है। इरफान खान ने करियर की शुरुआत छोटे पर्दे से की। उन्होंने चाणक्य, भारत एक खोज, सारा जहां हमारा, बनेगी अपनी बात, चंद्रकांता और श्रीकांत जैसे धारावाहिकों से करियर का आगाज किया।

स्टार प्लस के सीरियल डर में विलेन की भूमिक भी निभाई। 23 फरवरी 1995 को इरफान ने अपनी दोस्त सुतपा सिकदर से शादी की थी। जिनसे उनके दो बेटे, अयान और बाबिल हैं। फरवरी 2018 में जांच के बाद इरफान को पता चला कि उन्हें कैंसर है। इसके इलाज के लिए वे एक साल के लिए लंदन गए। 53 साल के इरफान ने गुरुवार को मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में अंतिम सांस ली। चार दिन पहले ही इरफान की मां सईदा बेगम का भी देहांत हो गया था।

वे अपनी मां के अंतिम संस्कार में हिस्सा नहीं ले सके थे। मौजूदा दौर के बेहतरीन अदाकार इरफान खान अब नहीं रहे। कभी भी लौटकर नहीं आने के लिए वो ऐसे समय में दुनिया से निकल गए, जब कोई घर से बाहर नहीं निकल सकता। इरफान का शरीर अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका अभिनय हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा और याद दिलाता रहेगा कि इरफान वो कलाकार थे, जिनका अभिनय बोलता था, बहुत कुछ कहता था, दिलों के तार छेड़ता था, अलविदा इरफान।

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