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आलोक पुराणिक का लेख : डिजिटल ढांचे पर हो निवेश

देश के बहुत पुराने सरकारी बैंक-पंजाब नेशनल बैंक, जिसकी स्थापना 1895 में लाला लाजपतराय ने की थी, की वैल्यू करीब 46,000 करोड़ रुपये है।, इसे कहते हैं फिनटेक, फाइनेंस में टेकनीक। कुल मिलाकर तकनीक से जुड़ी अर्थव्यवस्था बहुत आगे निकलती दिख रही है, दरअसल इतनी आगे कि पुरानी परंपरागत अर्थव्यवस्था की पुरानी कंपनियां भी नई डिजिटल अर्थव्यवस्था में समाहित हो रही हैं।

आलोक पुराणिक का लेख : डिजिटल ढांचे पर हो निवेश
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आलोक पुराणिक

आलोक पुराणिक

आनलाइन ट्यूशन पढ़ाने वाली कंपनी बायजूस की मार्केट वैल्यू है-लगभग 1,24,000 करोड़ रुपये। देश के बड़े बड़े विश्वविद्यालयों का बजट मिला दो, तो भी इतना ना बने। ट्यूशन वाले मास्टर टेक में, टेकनीक में आ जायें, तो अरबों के हो जाते हैं, इसे कहते हैं-एडटेक यानी एजुकेशन में टेकनीक। पैसे ट्रांसफर करनेवाला ब्रांड-पेटीएम-इसकी मार्केट वैल्यू है करीब 1,17,000 हजार करोड़ रुपये। देश के बहुत पुराने सरकारी बैंक-पंजाब नेशनल बैंक, जिसकी स्थापना 1895 में लाला लाजपतराय ने की थी, की वैल्यू करीब 46,000 करोड़ रुपये है।, इसे कहते हैं फिनटेक, फाइनेंस में टेकनीक। कुल मिलाकर तकनीक से जुड़ी अर्थव्यवस्था बहुत आगे निकलती दिख रही है, दरअसल इतनी आगे कि पुरानी परंपरागत अर्थव्यवस्था की पुरानी कंपनियां भी नई डिजिटल अर्थव्यवस्था में समाहित हो रही हैं। क्लासरूम ट्यूशन का बहुत पुराना ब्रांड आकाश अब बायजूस में समाहित हो गया है। बायजूस नई डिजिटल अर्थव्यवस्था का ब्रांड है, आकाश पुरानी अर्थव्यवस्था का ब्रांड है। कुल मिलाकर डिजिटल अर्थव्यवस्था अब मुख्यधारा में है। कोरोना काल में ई पेमेंट, नेट बैंकिंग के चलन में बहुत तेजी आयी है।

भारत का दशक

'डिजिटल भारत' अभियान के 6 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी में भारत की क्षमताओं के मद्देनजर बड़े-बड़े विशेषज्ञ इस दशक को 'भारत के दशक' के रूप में देख रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर 'डिजिटल भारत' कार्यक्रम के कई लाभार्थियों के साथ संवाद भी किया और उनके अनुभव सुने। मोदी ने कहा, 'आज का दिन भारत के सामर्थ्य, संकल्प और भविष्य की असीम संभावनाओं को समर्पित है। उन्होंने कहा, ''ड्राइविंग लाइसेंस हो या जन्म प्रमाण पत्र, बिजली का बिल भरना हो या पानी का बिल भरना हो, आयकर रिटर्न भरना हो या इस तरह के अन्य काम... अब प्रक्रियाएं डिजिटल इंडिया की मदद से बहुत आसान, बहुत तेज हुई हैं। गांवों में तो यह सब, अब अपने घर के पास जन सेवा केंद्रों पर हो रहे हैं।' एक जुलाई 2015 से अब तक डिजिटल अर्थव्यवस्था एक अलग स्तर पर जा पहुंची है।

ऑनलाइन भुगतान

केंद्र सरकार व भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) देश में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा दे रहे हैं। लोग डिजिटल लेनदेन के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी-यूपीआई का काफी इस्तेमाल करते हैं। यूपीआई की मदद से होने वाला डिजिटल लेन-देन इस साल जून 2021 में मासिक आधार पर 11.6 फीसदी की वृद्धि के साथ 5.47 लाख करोड़ रुपये का हो गया। मई, 2021 में यूनीफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए 4.91 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ था। संख्या के लिहाज से जून 2021 में करीब 2.80 अरब (280 करोड़) लेनदेन हुए, जो अब तक का रिकॉर्ड है। मई में यह संख्या 2.53 अरब (253 करोड़) थी। कुल मिलाकर आनलाइन भुगतान अब सहज चलन में आ गया है।

ई-इन्फ्रा की चुनौतियां

ब्रॉडबैंड हाईवे, मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए सार्वभौमिक पहुंच, ई-गवर्नेंस - प्रौद्योगिकी के माध्यम से सरकार में सुधार, ई-क्रांति - सेवाओं की इलेक्ट्रानिक डिलीवरी, सभी के लिए सूचना। यह सब बहुत जरूरी है। कई इलाकों में थोड़ी सी बारिश से भी बिजली गायब हो जाती है। इन हालात में डिजिटल अर्थव्यवस्था को ठीक ठाक चलाये रख पाना मुश्किल होता है। रिजर्व बैंक ने हाल में पहली बार डाटा से छेड़छाड़ और साइबर हमले को अर्थव्यवस्था के जोखिम के रूप में चिह्नित किया है। भारत में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में बड़े िनवेश की जरूरत है। न केवल फाइबर ऑप्टिक, बल्कि एआई, आईओटी, क्लाउड कंपाउंटिंग, रोबोटिक्स आदि क्षेत्र में भी बड़े निवेश की जरूरत है।

धोखाधड़ी पर लगाम

डिजिटल लेनदेन ग्राहकों के लिए लाभदायक होने के साथ-साथ उनके लिए खतरा भी है। देश में तकनीक के बढ़ने के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी तेजी से बढ़ रही है। हैकर्स आम लोगों को ठगने के लिए रोज नए-नए तरीकों का उपयोग कर रहे हैं। आए दिन साइबर क्राइम की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें लोगों के खातों से लाखों रुपये उड़ा लिए जाते हैं। इस पर नियंत्रण जरूरी है। इसके लिए डिजिटल साक्षरता बहुत जरूरी है। ओटीपी, आनलाइन भुगतान पर व्यापक जन शिक्षा अभियान चलाये जाने की जरूरत है। कम पढ़े लिखे ही नहीं, बहुत पढ़े लिखे भी आनलाइन ठगी के शिकार होते हैं। सरकार यह काम करे।

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