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सतीश सिंह का लेख : इंटरनेट स्पीड की परेशानी

आज देश में इंटरनेट कनेक्टिविटी के अलावा दूसरों कारणों से भी लोग इंटरनेट का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। स्मार्टफोन की कमी, देश के दूर-दराज इलाकों में मोबाइल टावर का नहीं होना, ब्रांडबैंड की सीमित उपलब्धता आदि ऐसे कारण हैं, जिनकी वजह से देश में डिजिटलाइजेशन सपना बना हुआ है।

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सतीश सिंह

एक तरफ सरकार भारत को डिजीटल के मामले में दुनिया का अग्रणी देश बता रही है तो दूसरी तरफ सरकार के केंद्रीय उपभोक्ता मामले और खाद्य मंत्री रामविलास पासवान सरकार की महत्वाकांक्षी योजना वन नेशन, वन राशन कार्ड की राह में खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी को सबसे बड़ी बाधा बता रहे हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना को अमलीजामा पहनाने की कोशिश की जा रही है। अभी तक इस योजना से 20 राज्य जुड़ चुके हैं और एक अगस्त तक 3 और राज्य जुडने वाले हैं। हालांकि कई राज्य खराब इंटरनेट कनेक्टिविटीकी वजह से इस योजना को अपने यहां लागू करने में असमर्थता जता रहे हैं।

गौरतलब है कि इस योजना के तहत किसी भी राज्य का उपभोक्ता देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में अपने हिस्से का अनाज सरकारी राशन ले सकता है, लेकिन इस सुविधा का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को बायोमीट्रिक आधारित पॉइंट ऑफ सेल मशीन में अंगूठे के जरिये अपनी पहचान बतानी होती है। इस मशीन का संचालन इंटरनेट के जरिये किया जाता है, इसलिए इस योजना का लाभ लेने के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी का होना जरूरी है।

आज देश में इंटरनेट कनेक्टिविटी के अलावा दूसरों कारणों से भी लोग इंटरनेट का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। स्मार्टफोन की कमी, देश के दूर-दराज इलाकों में मोबाइल टावर का नहीं होना, ब्रांडबैंड की सीमित उपलब्धता आदि ऐसे कारण हैं, जिनकी वजह से देश में डिजिटलाइजेशन सपना बना हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय संस्था मैरी मीकर ने इंटरनेट के इस्तेमाल पर 2019 में एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसके अनुसार भारत में चीन के बाद सबसे अधिक इंटरनेट का इस्तेमाल होता है। अमेरिका तीसरे स्थान पर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में लगभग 3.8 अरब लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। अप्रैल 2020 के आंकड़ों के अनुसार चीन में 85 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता हैं, जबकि अमेरिका में यह संख्या लगभग 30 करोड़ है। ऑनलाइन बाजार का इस्तेमाल करने के मामले में भी भारत का स्थान दूसरा है। पहले स्थान पर चीन काबिज है। यह स्थिति तब है, जब भारत में इंटरनेट की पहुंच लगभग 40 प्रतिशत आबादी के बीच है। चीन में इंटरनेट की पहुंच 61 प्रतिशत आबादी के बीच है, जबकि अमेरिका में 88 आबादी के बीच है।

आज दुनिया में इंटरनेट के कुल उपभोक्ताओं में भारत की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत है। इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया एंड नीलसन द्वारा नवंबर 2019 में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के ग्रामीण क्षेत्र में 23 करोड़ इंटरनेट के सक्रिय उपभोक्ता थे, जबकि जबकि शहरों में इंटरनेट के उपभोक्ताओं की संख्या 21 करोड़ है। इस प्रकार, इंटरनेट के सक्रिय शहरी उपभोक्ताओं की तुलना में ग्रामीण लोग इंटरनेट का 10 प्रतिशत अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।

देखा जाए तो भारत की कुल आबादी के मुकाबले इंटरनेट का उपयोग करने वाले लोगों की संख्या कम है, लेकिन विगत 5 वर्षों से इस संख्या में तेजी आ रही है, जिसका कारण चीन की मोबाइल कंपनियों द्वारा कम कीमत पर भारत में स्मार्ट मोबाइल हैंडसेट बेचना है। फिर भी गरीबी और निरक्षरता की वजह से भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो रही है। दिसंबर 2019 के अंत तक भारत में 50 करोड़ लोगों के पास स्मार्टफोन था, लेकिन इनमें से कुछ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कभी-कभार या कभी भी नहीं कर रहे थे।

इधर, कोरोना वायरस की वजह से भारत में लोगों की इंटरनेट पर निर्भरता अभूतपूर्व ढंग से बढ़ी है। लॉकडाउन की वजह से लोगों को अपने घर में रहना पड़ रहा है। कंपनियों ने कर्मचारियों से घर से काम यानी वर्क फ्रॉम होम करने को कहा है। इसके अलावा लोग सिनेमा, वेवसीरीज, गेम खेलने आदि के लिए भी इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। देशभर में बच्चों की ऑनलाइन क्लास चल रही है,लेकिन खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी की वजह से लोगों को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

टेलीकॉम कंपनियां 4जी सेवा देने के दावे जरूर कर रही हैं, लेकिन वास्तविकता में ये आज भी लोगों को 2जी की स्पीड मुहैया करा रही हैं। कोरोना काल में ऑनलाइन क्लास की मदद से शैक्षिक सत्र को पूरा करने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन देश में इंटरनेट की पहुंच बहुत कम लोगों के बीच है। इन कारणों से औसतन देश में 40 से 50 प्रतिशत बच्चे ही ऑनलाइन क्लास कर रहे हैं। कहा जा सकता है कि सवाल सिर्फ वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना को लागू करने की नहीं है, बल्कि सवाल कोरोना काल में ऑनलाइन क्लास करने, वर्क फ्राम होम करने, ग्रामीण एवं दूरदराज़ के इलाकों में बैंकिंग सुविधाओं को मुहैया कराने, अस्पतालों में ऑपरेशन से लेकर कई अनुसंधान से जुड़े कार्यों को अमलीजामा पहनाने से भी जुड़ा हुआ है, क्योंकि इन कार्यों को बिना अच्छी स्पीड वाली कनेक्टविटी के नहीं किया जा सकता है। इसलिए सरकार को दावा करने की जगह, जमीनी हकीकत को स्वीकार करते हुए मामले से जुड़ी कठिनाइयों को दूर करने की कोशिश करनी चाहिए।

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