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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस : सुखी व स्वस्थ जीवन का मार्ग

भारत में योग का इतिहास कम से कम पांच हजार साल पुराना है लेकिन वैश्विक स्तर पर इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों के चलते वर्ष 2015 में अपनाया गया था। स्वामी विवेकानंद ने भी अपने शिकागो सम्मेलन के भाषण में सम्पूर्ण विश्व को योग का संदेश दिया था। योग न केवल कई गंभीर बीमारियों से छुटकारा दिलाने में मददगार साबित होता है बल्कि मानसिक तनाव को खत्म कर आत्मिक शांति भी प्रदान करता है। िश्व योग दिवस की इस बार की थीम ‘मानवता के लिए योग’ रखा गया है। योग का मकसद है ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित दुःख भाग भवेत तो है ही, ‘यत्र विश्वं भवति एकनीडम’ भी है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस : सुखी व स्वस्थ जीवन का मार्ग
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योगेश कुमार गोयल/अखिलेश आर्येन्दु

योगेश कुमार गोयल/अखिलेश आर्येन्दु

भारत में योग का इतिहास कम से कम पांच हजार साल पुराना है लेकिन वैश्विक स्तर पर इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों के चलते वर्ष 2015 में अपनाया गया था। 2700 ईसा पूर्व वैदिक काल में और उसके बाद पतंजलि काल तक योग की मौजूदगी के ऐतिहासिक प्रमाण मिलते हैं। महर्षि पतंजलि ने अभ्यास तथा वैराग्य द्वारा मन की वृत्तियों पर नियंत्रण करने को ही योग बताया था। हिन्दू धर्म शास्त्रों में भी योग का व्यापक उल्लेख मिलता है। विष्णु पुराण में कहा गया है कि जीवात्मा तथा परमात्मा का पूर्णतया मिलन ही अद्वेतानुभूति योग कहलाता है। इसी प्रकार भगवद्गीता बोध में वर्णित है कि दुःख-सुख, पाप-पुण्य, शत्रु-मित्र, शीत-उष्ण आदि द्वंदों से अतीतय मुक्त होकर सर्वत्र समभाव से व्यवहार करना ही योग है।

भारत में योग को निरोगी रहने की मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक पद्धति के रूप में मान्यता प्राप्त है, जो भारतीयों की जीवनचर्या का अहम हिस्सा है। सही मायनों में योग भारत के पास प्रकृति प्रदत्त ऐसी अमूल्य धरोहर है, जिसका भारत सदियों से शारीरिक और मानसिक लाभ उठाता रहा है लेकिन कालांतर में इस दुर्लभ धरोहर की अनदेखी का ही नतीजा है कि लोग तरह-तरह की बीमारियों के मकड़जाल में जकड़ते गए। वैसे तो स्वामी विवेकानंद ने भी अपने शिकागो सम्मेलन के भाषण में सम्पूर्ण विश्व को योग का संदेश दिया था लेकिन कुछ वर्षों पूर्व योग गुरू स्वामी रामदेव द्वारा योग विद्या को घर-घर तक पहुंचाने के बाद ही इसका व्यापक प्रचार-प्रसार संभव हो सका और आमजन योग की ओर आकर्षित होते गए। देखते ही देखते सम्पूर्ण विश्व के कई देशों में लोगों ने इसे अपनाना शुरू किया। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में योग का महत्व कई गुना बढ़ गया है।

योग न केवल कई गंभीर बीमारियों से छुटकारा दिलाने में मददगार साबित होता है बल्कि मानसिक तनाव को खत्म कर आत्मिक शांति भी प्रदान करता है। यही वजह है कि जिस प्रकार किसी बीमारी के इलाज के लिए आज दवा की जरूरत मानी जाती है, उसी प्रकार स्वस्थ जीवन के लिए दिनचर्या में अब योग आवश्यक माना जाता है। दरअसल यह एक ऐसी साधना, ऐसी दवा है, जो बिना किसी लागत, बगैर किसी खर्च के शारीरिक एवं मानसिक बीमारियों का इलाज करने में सक्षम है। यह न केवल मानसिक तनाव से छुटकारा दिलाता है बल्कि मस्तिष्क की सक्रियता बढ़ाकर दिनभर शरीर को ऊर्जावान बनाए रखता है, जिससे योग करने वाले व्यक्ति के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। यही कारण है कि अब युवाओं में भी योग की लोकप्रियता बढ़ रही है तथा ऐसे युवा एरोबिक्स व जिम छोड़कर योग अपनाने लगे हैं। माना गया है कि योग तथा प्राणायाम से जीवनभर दवाओं से भी ठीक न होने वाले मधुमेह रोग का भी इलाज संभव है। यह वजन घटाने में भी सहायक है।

योग की इन्हीं महत्ताओं को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 सितम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा से आह्वान किया था कि दुनियाभर में प्रतिवर्ष योग दिवस मनाया जाए ताकि प्रकृति प्रदत्त भारत की इस अमूल्य पद्धति का लाभ पूरी दुनिया उठा सके और विश्वभर के लोग स्वस्थ जीवन जी सकें। यह भारत के लिए बेहद गर्व भरी उपलब्धि रही कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री के इस प्रस्ताव के महज तीन माह के भीतर 177 देशों ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाए जाने पर स्वीकृति की मोहर लगा दी, जिसके उपरांत संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 11 दिसम्बर 2014 को घोषणा कर दी गई कि प्रतिवर्ष 21 जून का दिन दुनियाभर में 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' के रूप में मनाया जाएगा। 21 जून 2015 को सम्पूर्ण विश्व में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन किया गया। इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, जब किसी राष्ट्र द्वारा दिए गए प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र द्वारा 90 दिनों से भी कम अवधि में लागू कर दिया गया हो। उस वक्त यूएन महासभा के अध्यक्ष सैम के. कुटेसा ने कहा भी था कि इतने सारे देशों द्वारा समर्थन देने से स्पष्ट है कि लोग योग के फायदों के प्रति आकर्षित हो रहे हैं।

योग को अपनाकर मानसिक शांति प्राप्त करते हुए हर प्रकार की बीमारियों से सहजता से बचा जा सकता है। वैश्विक स्तर पर योग दिवस मनाए जाने का उद्देश्य यही है कि शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में सबको इसका लाभ मिले। दुनियाभर के 170 से भी ज्यादा देश अब प्रतिवर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाते हैं और योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लेते हैं। 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' के लिए 21 जून का ही दिन निर्धारित किए जाने की भी खास वजह रही। दरअसल यह दिन उत्तरी गोलार्ध का पूरे कैलेंडर वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है, जिसे 'ग्रीष्म संक्रांति' भी कहा जाता है। इस दिन प्रकृति, सूर्य तथा उसका तेज सर्वाधिक प्रभावी रहता है और भारतीय संस्कृति के नजरिये से देखें तो ग्रीष्म संक्रांति के बाद सूर्य दक्षिणायन हो जाता है तथा यह समय आध्यात्मिक सिद्धियां प्राप्त करने में अत्यंत लाभकारी माना गया है।

योग से न केवल मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ती है बल्कि इससे मांसपेशियों में लचीलापन आता है, शरीर मजबूत बनता है, तनाव और अवसाद दूर होता है, रीढ़ की हड्डी सीधी होती है तथा पीठ दर्द में बहुत आराम मिलता है। इसके अलावा लगभग सभी गंभीर बीमारियों में योग के चमत्कारिक प्रभाव देखे गए हैं। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी अब योग के महत्व को स्वीकारने लगा है। इसलिए स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीने तथा रोगों को दूर भगाने के लिए जरूरी है कि योग को अपनी दिनचर्या का अटूट हिस्सा बनाया जाए।

विश्व योग दिवस की इस बार की थीम 'मानवता के लिए योग' रखा गया है। योग से ऊर्जा, विश्वबंधुत्व की भावना, प्रतिरक्षा प्रणाली की मजबूती और भाईचारे की भावना को मजबूत करने में मदद मिलती है। योग दुनिया में आसन, प्राणायाम, व्यायाम, ध्यान, तक सीमित नहीं रह गया है, यह मंथन, विचार-विमर्श, सांस्कृतिक आयोजन और आनंद का उत्सव भी बन गया है। भारतीय परंपरा में योग के अनगिनत स्वरूप देखने में आते हैं। क्रियायोग, राजयोग, सहजयोग के अलावा मंत्रयोग, हठयोग लययोग आदि स्वरूप हैं। इनमें एक बात कामन है कि सभी शरीर, मन, आत्मा, प्रकृति और ईश्वर के साथ एकता स्थापित करने की बात करते हैं। योग का मकसद है 'सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित दुःख भाग भवेत तो है ही, 'यत्र विश्वं भवति एकनीडम' भी है। यानी सभी सुखी हांे, सभी निरोग हों, सभी एक दूसरे के प्रति बेहतर व्यवहार करें और किसी को दुख का हिस्सा न बनना पड़े। यह योग के जरिए ही संभव है। वैदिक दृष्टि सारे विश्व को एक परिवार मानने की रही है। योग इस दृष्टि को मूर्तरूप देने का कार्य करता है। योग इंसान को ऐसी दृष्टि देता है, जिससे सभी तरह के भेदभाव और नकारात्मकता को खत्म करने का संकल्प दृढ़ होता है। आज दुनिया के विकसित और विकासशील देशों में योग का 'महानाद' गूंजायमान हो रहा है। आओ हम सब योग को अपनाने का संकल्प लें।

(लेखकद्वय वरिष्ठ विशेषज्ञ हैं, ये उनके अपने विचार हैं।)

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